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राज्य कृषि समाचार (State News)

ई-टोकन में उर्वरक मूल्य गड़बड़ी का मामला: गोदाम प्रभारी निलंबित, एफआईआर के आदेश

क्या यह केवल पांढुर्ना तक सीमित है या पूरे प्रदेश में करोड़ों रुपये की अनियमितता की आशंका?

24 जुलाई 2026, पांढुर्ना/भोपाल (कृषक जगत): ई-टोकन में उर्वरक मूल्य गड़बड़ी का मामला: गोदाम प्रभारी निलंबित, एफआईआर के आदेश – कृषक जगत द्वारा प्रथम पृष्ठ पर प्रमुखता से प्रकाशित “क्या ई-टोकन की आड़ में किसानों से अधिक वसूली हुई?” शीर्षक से खोजी रिपोर्ट का बड़ा असर हुआ है। शिकायत सामने आते ही पांढुर्ना कलेक्टर श्री नीरज वशिष्ठ ने तत्काल मामले का संज्ञान लेते हुए अपर कलेक्टर को मौके पर जांच के लिए भेजा। प्रारंभिक जांच में किसानों की शिकायत प्रथम दृष्टया सही पाए जाने के बाद विस्तृत प्रतिवेदन मार्कफेड मुख्यालय भेजा गया। मामला मार्कफेड के प्रबंध संचालक श्री अभिजीत अग्रवाल के संज्ञान में आने पर उन्होंने तत्काल जांच एवं दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए। जांच रिपोर्ट के आधार पर मार्कफेड मुख्यालय ने पांढुर्ना गोदाम प्रभारी श्री मनोज कुमार टेपे को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया तथा बाद में उनके विरुद्ध संबंधित थाने में एफआईआर दर्ज कराने के आदेश भी जारी कर दिए।

118 किसानों से अधिक वसूली, 38,850 रुपये का मामला – मार्कफेड की जांच में पाया गया कि गोदाम प्रभारी के रूप में कार्यरत श्री टेपे ने 118 किसानों को एमओपी उर्वरक निर्धारित 1800 रुपये प्रति बोरी के स्थान पर 1975 रुपये प्रति बोरी में बेचा। इस प्रकार प्रति बोरी 175 रुपये अतिरिक्त वसूल कर कुल 38,850 रुपये संघ के खाते में जमा नहीं कराए गए। जांच में यह भी सामने आया कि पूर्व अवधि में बेचे गए उर्वरक के बिल एवं कैश मेमो किसानों को जारी नहीं किए गए। इन्हीं तथ्यों के आधार पर निलंबन एवं एफआईआर की कार्रवाई की गई।

मार्कफेड ने माना कि उक्त कृत्य से संस्था की छवि धूमिल हुई तथा कर्मचारी सेवा नियमों की कंडिका-18 का स्पष्ट उल्लंघन हुआ है। इसलिए श्री मनोज कुमार टेपे को प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए कंडिका-27 के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय मंडल कार्यालय, जबलपुर निर्धारित किया गया है।

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26  मई को बढ़ी थीं नई दरें, यहीं से उठे सवाल ? –  इस वर्ष 26  मई  2026 से पोटाश (एमओपी) सहित कई एनपीके कॉम्प्लेक्स उर्वरकों की कीमतों में प्रति बोरी 550 रुपये तक की वृद्धि लागू की गई थी। मूल्य वृद्धि के समय प्रदेशभर के अनेक गोदामों में पुराना स्टॉक उपलब्ध था।

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कृषक जगत ने अपनी रिपोर्ट में यह सवाल उठाया था कि यदि पुराना स्टॉक नई दरों पर बेचा गया है तो किसानों से अतिरिक्त राशि वसूली गई होगी। पांढुर्ना में सामने आए मामले ने इस आशंका को बल दिया, जहां किसानों ने पुराने स्टॉक पर नई कीमत वसूले जाने, बिल नहीं दिए जाने और भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं होने की शिकायत की थी।

ऑनलाइन भुगतान नहीं, पारदर्शिता पर सवाल ?  –  ई-टोकन जैसी डिजिटल व्यवस्था लागू होने के बावजूद मार्कफेड के डबल लॉक केंद्रों पर ऑनलाइन भुगतान की व्यवस्था उपलब्ध नहीं थी। ऐसे में नकद भुगतान और बिल नहीं मिलने की शिकायतों ने पूरी वितरण व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।

क्या पूरे प्रदेश में होनी चाहिए जांच? – पांढुर्ना की जांच में शिकायत प्रथम दृष्टया सही पाई गई है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इसी प्रकार की जांच प्रदेश के सभी मार्कफेड डबल लॉक केंद्रों पर भी कराई जाएगी?

26 मई  के बाद हुए सभी उर्वरक विक्रय की हो राज्यव्यापी जांच – पांढुर्ना डबल लॉक केंद्र पर हुई कार्रवाई के बाद अब मांग उठने लगी है कि 26 मई  2026 से प्रदेशभर में हुए उर्वरक विक्रय की व्यापक जांच कराई जाए। विशेष रूप से एमओपी (पोटाश), विभिन्न एनपीके कॉम्प्लेक्स उर्वरक, एसएसपी तथा अन्य उन उर्वरकों की बिक्री की जांच आवश्यक है, जिनकी कीमतों में 26 मई  से उल्लेखनीय वृद्धि लागू की गई थी।

यदि आईएफएमएस, ई-टोकन, ई-विकास पोर्टल, स्टॉक रजिस्टर और विक्रय अभिलेखों का मिलान कर राज्यव्यापी जांच की जाती है तो यह स्पष्ट हो सकेगा कि मामला केवल एक केंद्र तक सीमित था या अन्य जिलों में भी ऐसी अनियमितताएं हुईं। यदि इसी प्रकार की गड़बड़ियां व्यापक स्तर पर सामने आती हैं, तो इसका प्रभाव लाखों किसानों और करोड़ों रुपये के लेनदेन से जुड़ा हो सकता है। इसकी पुष्टि केवल विस्तृत एवं निष्पक्ष जांच से ही संभव है।

किसानों के लिए महत्वपूर्ण सलाह–  कृषक जगत किसानों से अपील करता है कि वे निजी उर्वरक विक्रेता, सहकारी समिति या मार्कफेड के डबल लॉक केंद्र—किसी भी स्थान से उर्वरक खरीदें, हर स्थिति में बिल या कैश मेमो अवश्य प्राप्त करें। बोरी पर अंकित एमआरपी, ई-टोकन पर दर्ज राशि और बिल की राशि का मिलान करें। यदि निर्धारित मूल्य से अधिक राशि वसूली जाए या बिल देने से मना किया जाए, तो तत्काल जिला प्रशासन, कृषि विभाग या संबंधित अधिकारी के समक्ष शिकायत दर्ज कराएं।

पांढुर्ना में हुई कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन किसानों के हित में अब आवश्यकता इस बात की है कि 26  मई  2026 के बाद हुए उर्वरक विक्रय की राज्यव्यापी विशेष जांच कराई जाए, ताकि यदि कहीं भी पुराने स्टॉक पर नई कीमत वसूली गई है तो दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई हो और किसानों को न्याय मिल सके।

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