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राज्य कृषि समाचार (State News)

कीटों से फसल बचाने के लिए बिहार सरकार की नई पहल, किसानों को ट्रैप पर मिलेगा 75% तक अनुदान

31 अगस्त 2026, पटना: कीटों से फसल बचाने के लिए बिहार सरकार की नई पहल, किसानों को ट्रैप पर मिलेगा 75% तक अनुदान – फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों पर नियंत्रण और रासायनिक कीटनाशकों के अत्यधिक इस्तेमाल को कम करने के उद्देश्य से बिहार सरकार ने ‘पौधा संरक्षण उपादान वितरण योजना’ को मंजूरी दी है। कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा के अनुसार योजना के तहत किसानों को आधुनिक एवं पर्यावरण अनुकूल फसल सुरक्षा उपकरणों पर 75 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा। इसमें फेरोमोन ट्रैप, स्टिकी ट्रैप और फ्रूट फ्लाई ट्रैप शामिल हैं।

इन ट्रैप का इस्तेमाल धान, मक्का, चना, बैंगन, टमाटर, अमरूद और विभिन्न सब्जियों में नुकसान पहुंचाने वाले कीटों के प्रबंधन के लिए किया जा सकेगा। योजना का उद्देश्य किसानों को समेकित कीट प्रबंधन की ओर प्रोत्साहित करना है, ताकि फसल सुरक्षा के लिए रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता कम हो। 

धान, बैंगन और चना किसानों को फेरोमोन ट्रैप

चना में फली छेदक, बैंगन में तना एवं फल छेदक तथा धान में तना छेदक कीट के नियंत्रण के लिए फेरोमोन ट्रैप उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके लिए किसानों को 96 रुपये प्रति सेट अथवा अधिकतम 480 रुपये प्रति एकड़ की दर से अनुदान का प्रावधान है।

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मक्का की फसल में नुकसान पहुंचाने वाले फॉल आर्मी वर्म के नियंत्रण के लिए 162 रुपये प्रति सेट, जबकि अधिकतम 810 रुपये प्रति एकड़ तक सहायता दी जाएगी। इसी तरह सब्जियों में डायमंड बैक मॉथ के नियंत्रण के लिए 171 रुपये प्रति सेट अथवा अधिकतम 855 रुपये प्रति एकड़ तक अनुदान दिया जाएगा।

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रासायनिक दवाओं पर निर्भरता घटाने का प्रयास

कृषि विभाग के अनुसार फेरोमोन, स्टिकी और फ्रूट फ्लाई ट्रैप जैसे उपायों से हानिकारक कीटों की निगरानी और नियंत्रण में मदद मिलती है। सरकार का जोर किसानों को समेकित कीट प्रबंधन तकनीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने पर है। इससे रासायनिक कीटनाशकों के इस्तेमाल में कमी, उत्पादन लागत को नियंत्रित करने और पर्यावरण के अनुकूल कृषि को बढ़ावा देने में मदद मिलने की उम्मीद है।

योजना का लाभ धान, मक्का, चना, बैंगन, टमाटर, अमरूद और अन्य सब्जियों की खेती करने वाले किसानों को मिल सकेगा। हालांकि वास्तविक अनुदान संबंधित ट्रैप, फसल और निर्धारित अधिकतम सीमा के आधार पर होगा। किसानों को सामग्री लेने से पहले कृषि विभाग की ओर से जारी पात्रता, उपलब्धता और वितरण प्रक्रिया की जानकारी अवश्य लेनी चाहिए।

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