राज्य कृषि समाचार (State News)

भोपाल : दो भाइयों ने गांव में शुरू की नर्सरी, आज महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में पहुंच रहे पौधे  

11 सितंबर 2026, भोपाल: भोपाल : दो भाइयों ने गांव में शुरू की नर्सरी, आज महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में पहुंच रहे पौधे – भोपाल जिले के छोटे से गांव रतुआ रतनपुर के किसान भाई हेमंत कुशवाह और ओम कुशवाह ने सीमित संसाधनों से नर्सरी शुरू कर आज इसे बड़े स्तर तक पहुंचाया है। कभी महज 10 हजार पौधों से शुरुआत करने वाले दोनों भाई अब हर महीने करीब 15 लाख पौधों का उत्पादन कर रहे हैं। उनकी नर्सरी से मध्यप्रदेश के अलावा महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और राजस्थान के किसानों तक पौधे पहुंच रहे हैं।

प्रशिक्षण से मिली नई तकनीक की जानकारी

हेमंत और ओम ने वर्ष 2017-18 में कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों के संपर्क में आने के बाद विभाग की ओर से आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रमों में हिस्सा लेना शुरू किया। इन प्रशिक्षणों के जरिए उन्हें आधुनिक कृषि तकनीक, नर्सरी प्रबंधन और उत्पादन की नई प्रणालियों की जानकारी मिली।

वर्ष 2024 में उन्होंने राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड की एमआईडीएच (MIDH) योजना के तहत करीब 45 लाख रुपये का ऋण लेकर नर्सरी का विस्तार किया। वर्तमान में उनकी नर्सरी करीब 2 एकड़ क्षेत्र में संचालित हो रही है। इसमें 4 हजार वर्गमीटर क्षेत्र में दो पॉलीहाउस बनाए गए हैं।

सब्जियों और फूलों की तैयार करते हैं पौध

नर्सरी में गुलाब, जरबेरा, गेंदा और नौरंगा जैसे फूलों के पौधों के साथ कई तरह की सब्जियों की गुणवत्तापूर्ण पौध तैयार की जा रही है। हेमंत और ओम वर्तमान में बैंगन, टमाटर, मिर्च, गिलकी, लौकी और खीरा जैसी सब्जियों के हाईब्रिड पौध तैयार कर रहे हैं।

इसके अलावा सेमिनिस, फेजेंटा और अंकुर बीएनआर जैसी उन्नत किस्मों की पौध भी किसानों को उपलब्ध कराई जा रही है। इन पौधों की मांग मध्यप्रदेश के अलग-अलग जिलों के साथ दूसरे राज्यों से भी आ रही है।

पानी की समस्या के बावजूद नहीं मानी हार

हेमंत कुशवाह बताते हैं कि वर्ष 2018 में उन्होंने अपने खेत में सिर्फ 2 हजार वर्गफीट क्षेत्र में पॉलीहाउस नर्सरी की शुरुआत की थी। शुरुआती दौर में पानी की गंभीर समस्या सामने आई, लेकिन दोनों भाइयों ने हार नहीं मानी। उन्होंने खुद कुएं की खुदाई कर पानी का स्रोत विकसित किया और धीरे-धीरे नर्सरी का विस्तार करते गए। आज उनकी 8 एकड़ जमीन पूरी तरह सिंचित है।

15 से 20 ग्रामीणों को मिला रोजगार

नर्सरी के विस्तार के साथ दोनों भाइयों ने अपने गांव के आसपास के लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर तैयार किए हैं। वर्तमान में करीब 15 से 20 ग्रामीण उनके साथ काम कर रहे हैं। वहीं सोशल मीडिया और मोबाइल के जरिए देशभर के किसान उनसे संपर्क कर पौध खरीद रहे हैं।

हेमंत कुशवाह का कहना है कि किसान भाई ‘ओम नर्सरी’ से सीधे पौधे प्राप्त कर सकते हैं। दोनों भाई लगातार प्रशिक्षण लेकर आधुनिक तकनीकों को अपना रहे हैं और नर्सरी व्यवसाय को आगे बढ़ा रहे हैं। उनका कहना है कि मेहनत के साथ सरकारी योजनाओं और प्रशिक्षण का लाभ लेकर किसान खेती को लाभकारी व्यवसाय बना सकते हैं।

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