बड़वानी: कपास की उन्नत खेती के लिए कार्यशाला आयोजित
29 अप्रैल 2026, बड़वानी: बड़वानी: कपास की उन्नत खेती के लिए कार्यशाला आयोजित – जिले में खरीफ सीजन की तैयारियों के मद्देनजर कृषि वैज्ञानिकों ने मंगलवार को आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में कृषि महाविद्यालय खंडवा के वैज्ञानिक डॉक्टर डी के श्रीवास्तव ने किसानों को कपास की उन्नत खेती के लिए तकनीकी सलाह दी।
डॉ श्रीवास्तव ने कहा कि कपास की बेहतर गुणवत्ता और अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए मिट्टी के चयन से लेकर फसल की चुनाई तक वैज्ञानिक पद्धतियों का पालन करना आवश्यक है।
भूमि का चयन और तैयारी – विशेषज्ञों के अनुसार, कपास के लिए मध्यम-काली, लाल तथा दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है, जिसमें जीवांश की पर्याप्त मात्रा और जल धारण क्षमता अधिक हो। खेत की तैयारी- अप्रैल माह में रबी फसल की कटाई के बाद एक गहरी जुताई करें। जून के प्रथम या द्वितीय सप्ताह में 4-5 इंच वर्षा होने पर कल्टीवेटर और पाटा लगाकर खेत को समतल करें। गर्मी के कपास के लिए मई के प्रथम सप्ताह में ही खेत तैयार कर लेना चाहिए।
बुवाई के सही समय पर फसल की सफलता निर्भर – गर्मी का कपास- 25 मई से 5 जून के बीच। सिंचित कपास- जून माह का प्रथम सप्ताह। असिंचित (वर्षा आधारित) कपास- 15 जून के बाद 5-6 इंच वर्षा होने पर। मौसम की सही जानकारी होने पर वर्षा से 3-4 दिन पूर्व सूखे में भी बोनी की जा सकती है।
बीज उपचार- रोगों से बचाव का कवच मिट्टी जनित रोगों से फसल को बचाने के लिए बीज उपचार अनिवार्य है। इसके लिए- थायरम या मेन्कोजेब 3 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज, अथवा कार्बेन्डाजिम 2 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचारित कर ही बोनी करें।
बोनी की विधि और खाद प्रबंधन – जिले में सामान्यतः चौफली पद्धति से कपास की बोनी की सलाह दी जाती है, जिससे दोनों दिशाओं में कुल्फा चलाने में आसानी रहती है।
उर्वरक देने की विधियाँ– बुवाई के समय उर्वरक की आधार मात्रा 6-8 सेमी की गहराई पर दें। रिंग पद्धति- बुवाई के 25-30 दिन बाद पौधों के चारों ओर गोलाकार घेरे में खाद देकर मिट्टी में मिलाएं। कॉलम पद्धति- बुवाई के 60-70 दिन बाद 6-8 इंच गहरे चार गड्ढे बनाकर खाद दें। सितंबर में इस विधि से खाद (12 :32 :16) का प्रयोग करने से कपास के डेंडु कम गिरते हैं और पत्तियों का रंग गुलाबी या बैंगनी नहीं पड़ता।
.जैविक खाद का प्रयोग – रासायनिक खाद के अतिरिक्त बेहतर बढ़वार के लिए जैविक खादों की ड्रेंचिंग फसल के 40वें और 80वें दिन करनी चाहिए। जैविक खाद जेसे एजोटोवेक्टर (2.5 ली/हे),पी.एस.बी. (2.5 ली/हे),वेस्ट डीकंपोजर (3.5 ली/हे),ट्राईकोडर्मा (2.5 ली/हे) डेचिंग 40 एवं 80 दिन की फसल अवस्था में की जानी चाहिए।
कपास की चुनाई – कपास एक लंबी अवधि की फसल है और इसके डेंडु एक साथ नहीं पकते। इसलिए संकर कपास में अंतराल पर चुनाई करें प्रथम चुनाई- 130-140 दिन पर। द्वितीय चुनाई- 150-160 दिन पर। तृतीय चुनाई- 170-180 दिन पर करें । कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे इन वैज्ञानिक विधियों को अपनाकर अपनी आय में वृद्धि करें और अधिक जानकारी के लिए स्थानीय कृषि विस्तार अधिकारी से संपर्क करें।
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