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राज्य कृषि समाचार (State News)

बालाघाट ने धान उपार्जन में बनाया रिकॉर्ड, 60 लाख क्विंटल खरीद के साथ पूरे प्रदेश में रहा अव्वल

04 नवंबर 2026, बालाघाट: बालाघाट ने धान उपार्जन में बनाया रिकॉर्ड, 60 लाख क्विंटल खरीद के साथ पूरे प्रदेश में रहा अव्वल – मध्यप्रदेश का ‘धान का कटोरा’ कहे जाने वाले बालाघाट जिले ने धान उपार्जन के मामले में पूरे प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया है। इस वर्ष जिले में 60 लाख क्विंटल धान का उपार्जन किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जिले के किसानों की इस उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि बालाघाट की पहचान चिन्नौर चावल के साथ-साथ कोदो और अन्य श्रीअन्न के उत्पादन से भी है। यहां के मेहनती और प्रगतिशील किसानों ने खेती के क्षेत्र में नई मिसाल कायम की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन से बालाघाट की कृषि उपज मंडी, गोंगलई में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कार्यक्रम में शामिल प्रगतिशील किसानों और कृषि योजनाओं के विजेताओं से संवाद किया तथा उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दीं।

नक्सलवाद से मुक्ति के बाद बालाघाट के विकास को मिलेगी गति

मुख्यमंत्री ने कहा कि बालाघाट जिला लंबे समय से वीरता, त्याग और पराक्रम की गौरवशाली परंपरा के लिए जाना जाता है। यह जिला खनिज संपदा और खास खान-पान के लिए भी देशभर में प्रसिद्ध है। यहां के चिन्नौर चावल की खुशबू लोगों को आकर्षित करती है और इसका निर्यात विदेशों तक किया जाता है। जिले में देश का लगभग 80 प्रतिशत मैंगनीज उत्पादन होता है, जबकि मलाजखंड में तांबे का विशाल भंडार मौजूद है।

उन्होंने कहा कि बालाघाट को नक्सलवाद से मुक्ति मिलने के बाद जिले के विकास को नई गति मिलेगी। सड़क, पानी और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के साथ खेती-किसानी और दुग्ध उत्पादन को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है। बलराम कृषि महोत्सव भी जिले की कृषि व्यवस्था को मजबूत बनाने और किसानों को नई संभावनाओं से जोड़ने में मददगार साबित हुआ है।

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किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा 2026

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मना रही है। किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि खेती को अधिक टिकाऊ और लाभकारी बनाया जा सके। उन्होंने बताया कि समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के लिए किसानों का पंजीयन किया गया है। बालाघाट जिले के कुछ किसानों का पंजीयन छूट जाने के कारण पोर्टल 4 नवंबर तक खोल दिया गया है। जिन किसानों ने अभी तक पंजीयन नहीं कराया है, वे निर्धारित तारीख तक अपना पंजीयन करा सकते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के माध्यम से किसानों को आर्थिक सहायता दे रही है। प्रदेश सरकार भी किसानों को आर्थिक मदद उपलब्ध करा रही है। इसके साथ ही लाड़ली बहनों को भी सहायता दी जा रही है। डबल इंजन की सरकार के कारण जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ लोगों तक पहुंचाया जा रहा है।

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दूध संग्रहण 10 हजार लीटर प्रतिदिन पहुंचा, अब 50 हजार लीटर का लक्ष्य

बालाघाट जिले में दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए बंद हो चुकी 36 दुग्ध समितियों को दोबारा शुरू किया जा रहा है। इसके साथ ही नए मिल्क रूट तैयार किए जा रहे हैं, ताकि जिले के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भी दूध संग्रहण को प्रोत्साहन मिल सके। मुख्यमंत्री ने बताया कि जिले में प्रतिदिन दूध संग्रहण 3,500 लीटर से बढ़कर 10,000 लीटर हो गया है। प्रदेश सरकार का लक्ष्य इसे बढ़ाकर 50 हजार लीटर प्रतिदिन तक पहुंचाना है। उन्होंने दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए पशुपालकों के बीच आयोजित की जा रही प्रतियोगिता का भी उल्लेख किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पहल को लेकर पशुपालकों में उत्साह है। ऐसी गतिविधियों से पशुपालन को प्रोत्साहन मिलेगा और किसानों की आय के नए अवसर बनेंगे।

15 हजार मत्स्य पालकों को 9 करोड़ रुपये से अधिक का ऋण

मुख्यमंत्री ने कहा कि बालाघाट जिला प्रदेश में मत्स्य पालन के क्षेत्र में भी अग्रणी है। जिले के 15 हजार मत्स्य पालकों को किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) उपलब्ध कराए गए हैं और उन्हें 9 करोड़ रुपये से अधिक का ऋण दिया गया है। धरती आबा ग्राम उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत खराड़ी जलाशय में 94 केज कल्चर स्थापित किए गए हैं, जिनसे 282 मीट्रिक टन मछली का उत्पादन हुआ है। इससे जिले में मत्स्य पालन की संभावनाओं को बढ़ावा मिला है। उन्होंने बताया कि बालाघाट जिले के 1 लाख 29 हजार से अधिक किसानों को कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन और उद्यानिकी गतिविधियों के लिए 876 करोड़ रुपये का ब्याज मुक्त ऋण दिया गया है। वहीं, जिले के 3 लाख 76 हजार से अधिक किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ मिल रहा है। मुख्यमंत्री ने किसानों से पारंपरिक खेती के साथ पशुपालन, मत्स्य पालन और उद्यानिकी जैसी गतिविधियां अपनाने की अपील की, ताकि उनकी आय के स्रोत बढ़ सकें।

निजी भूमि पर बांस और सागौन लगाकर बढ़ा सकेंगे आय

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार निजी भूमि पर वृक्षारोपण को भी प्रोत्साहित कर रही है। किसान अपनी जमीन पर बांस, सागौन और अन्य इमारती पौधे लगाकर अतिरिक्त आय अर्जित कर सकते हैं। सरकार इस दिशा में लगातार प्रयास कर रही है, ताकि किसानों को खेती के अलावा अन्य गतिविधियों से भी आर्थिक लाभ मिल सके।

मुख्यमंत्री रजिस्ट्री योजना से ग्रामीणों को मिलेगा मालिकाना हक

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुख्यमंत्री रजिस्ट्री योजना की जानकारी देते हुए बताया कि इसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में आबादी भूमि की नि:शुल्क रजिस्ट्री कराकर लोगों को वैध दस्तावेज उपलब्ध कराए जा रहे हैं। प्रदेश सरकार इस योजना के अंतर्गत नि:शुल्क रजिस्ट्री पर 10 हजार करोड़ रुपये खर्च कर रही है। उन्होंने कहा कि आबादी भूमि के दस्तावेज मिलने से ग्रामीणों को बैंक से ऋण लेने में सुविधा होगी और उन्हें भूमि पर वैध मालिकाना हक प्राप्त होगा। इसके साथ ही वे अपनी जमीन बच्चों के नाम भी हस्तांतरित कर सकेंगे। योजना का लाभ गांवों में रहने वाले किसानों और आम नागरिकों को मिलेगा।

प्रगतिशील किसानों ने साझा किए खेती और आय बढ़ाने के अनुभव

बलराम कृषि महोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री ने जिले के प्रगतिशील किसानों से संवाद कर उनकी कृषि गतिविधियों, नवाचारों और आय के स्रोतों के बारे में जानकारी ली। ग्राम पांडेवाड़ा के किसान वेदराम राहंगडाले ने बताया कि वे मछली पालन का काम करते हैं और इसके माध्यम से 30 लोगों को रोजगार दे रहे हैं। लांजी तहसील के ग्राम अमेड़ा के किसान मुकेश नेवारे ने बताया कि वे धान की खेती के साथ सब्जी उत्पादन, मत्स्य पालन और उद्यानिकी का काम भी करते हैं। उन्होंने अब मशरूम उत्पादन भी शुरू किया है। ग्राम कोहकाडीबर की मंजू नगपुरे ने बताया कि वे आत्मा परियोजना और आजीविका मिशन से जुड़ी हैं तथा ड्रोन दीदी के रूप में काम कर रही हैं। इस काम से उन्हें 1.25 लाख रुपये की आय हो रही है।

ग्राम बगड़ मारा के किसान जियालाल राहंगडाले ने मुख्यमंत्री को प्राकृतिक खेती के बारे में जानकारी दी। वहीं, ग्राम गुदमा के किसान गुलाब चौधरी ने बताया कि वे 30 एकड़ जमीन में गेहूं की खेती करते हैं और इससे 425 क्विंटल उत्पादन प्राप्त करते हैं।

कृषि योजनाओं की क्विज के विजेताओं को मिलेंगे ट्रैक्टर, बुलेट और ई-स्कूटी

कार्यक्रम में कृषि योजनाओं पर आधारित क्विज प्रतियोगिता के विजेताओं से भी मुख्यमंत्री ने संवाद किया। लॉटरी के माध्यम से चुने गए विजेताओं में लामता तहसील के ग्राम कुम्हारी की दिवला पटले को ट्रैक्टर, वारासिवनी तहसील के ग्राम एकोड़ी के मनोज हरिनखेड़े को बुलेट बाइक और ग्राम सिकंदरा की कविता शिव को ई-स्कूटी पुरस्कार में दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने तीनों विजेताओं को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। कार्यक्रम में बालाघाट-सिवनी की सांसद भारती पारधी, विधायक गौरव सिंह पारधी, अपेक्स बैंक के अध्यक्ष महेंद्र सिंह यादव, मध्य प्रदेश पिछड़ा वर्ग आयोग की सदस्य मौसम बिसेन, नगर पालिका अध्यक्ष बालाघाट भारती सुरजीत सिंह ठाकुर, पूर्व मंत्री रामकिशोर कावरे सहित अन्य जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे। 

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