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राज्य कृषि समाचार (State News)

चक्रवात अर्नब से आंध्र प्रदेश और झारखंड में फसल तबाह, सर्वे शुरू

04 नवंबर 2026, अमरावती: चक्रवात अर्नब से आंध्र प्रदेश और झारखंड में फसल तबाह, सर्वे शुरू – चक्रवात अर्नब से आंध्र प्रदेश में भारी बारिश और जलभराव के कारण लाखों किसानों की धान व बागवानी फसलें बर्बाद हो गई हैं। राज्य सरकार ने क्षेत्र-स्तरीय सर्वे शुरू करते हुए राज्य आपदा राहत कोष के मानदंडों के अनुसार किसानों को मुआवज़ा देने की तैयारी शुरू कर दी है।

आंध्र प्रदेश सरकार के प्रारंभिक आकलन के अनुसार 16 जिलों के 291 मंडलों के 7,613 गांवों में 5,42,003 किसानों की कुल 3,51,962.60 हेक्टेयर फसल जलमग्न हुई है, जिसमें 3,45,582.60 हेक्टेयर धान शामिल है। इसके अलावा 15 जिलों के 215 मंडलों के 1,218 गांवों में 77,431 किसानों की 22,457.75 हेक्टेयर बागवानी फसल को नुकसान पहुंचा है।

सर्वे और मुआवज़े की प्रक्रिया शुरू

राज्य के कृषि मंत्री के. अच्चन्नायडु ने विभागीय अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर सभी प्रभावित किसानों को सहायता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन और मत्स्य विभागों के फील्ड स्टाफ को 30 अक्टूबर से हर गांव में जाकर खेत-खेत निरीक्षण करने और नुकसान दर्ज करने का काम सौंपा गया है।

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राज्य के चार कृषि एवं संबद्ध विश्वविद्यालयों के कुलपतियों से भी प्रभावित क्षेत्रों में प्रोफेसरों व वैज्ञानिकों को ज़िम्मेदारी सौंपने को कहा गया है, ताकि खड़ी फसल को और नुकसान से बचाया जा सके। बागवानी फसलों के लिए राज्य आपदा राहत कोष के नियमों के तहत लगभग 99.23 करोड़ रुपये की इनपुट सब्सिडी का आकलन किया गया है। पशुधन और मत्स्य पालन को हुए नुकसान का भी आकलन किया जा रहा है, जिसमें कई जिलों में दुधारू पशुओं, मुर्गी-पक्षियों और मछली पालन के ढांचे को नुकसान शामिल है। अब तक का कुल प्रारंभिक नुकसान लगभग 176.82 करोड़ रुपये आंका गया है।

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झारखंड में भी चक्रवात अर्नब के असर से हुई बारिश ने धान की फसल को नुकसान पहुंचाया है। राज्य के आपदा प्रबंधन मंत्री इरफान अंसारी ने सभी जिलों के उपायुक्तों को पत्र लिखकर धान को हुए नुकसान का क्षेत्रीय सर्वे कराने और नियमों के अनुसार प्रभावित किसानों को मुआवज़ा देने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि किसान पूरे साल मेहनत करके फसल उगाते हैं, इसलिए सरकार उनकी परेशानी को समझती है और उनकी चिंताओं का समाधान किया जाएगा।

झारखंड में गढ़वा, पलामू, लातेहार, लोहरदगा, गुमला और सिमडेगा जिलों में भारी बारिश की चेतावनी के बाद प्रशासनिक टीमों को गांव-गांव भेजकर खेतों का मौके पर निरीक्षण करने और प्रभावित किसानों की सूची तैयार करने का काम सौंपा गया है। सूची तैयार होने के बाद ही मुआवज़े की राशि तय और वितरित की जाएगी।

पशुधन, मत्स्य पालन और नारियल के पेड़ों को भी नुकसान

आंध्र प्रदेश में चक्रवात का असर सिर्फ खेतों तक सीमित नहीं रहा। कई जिलों में दुधारू पशुओं, भेड़-बकरियों और मुर्गी-पक्षियों की भी मौत हुई है, जबकि कई जगह पशु शेड क्षतिग्रस्त हो गए। मत्स्य पालन क्षेत्र में भी नावें और मछली पकड़ने के जाल टूटने के साथ-साथ तालाब आधारित जलीय कृषि को नुकसान पहुंचा है। नारियल और ऑयल पाम के जो पेड़ तेज़ हवा में उखड़ गए, उनके लिए प्रति पेड़ 1,500 रुपये मुआवज़े का प्रस्ताव रखा गया है।

राज्य सरकार के अनुमान के अनुसार सभी क्षेत्रों को मिलाकर कुल नुकसान का दायरा कई हज़ार करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है, हालांकि कृषि, बागवानी, पशुपालन और मत्स्य विभागों का अलग-अलग औपचारिक आकलन अभी पूरा नहीं हुआ है। मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने अफसरों को निर्देश दिया है कि जलभराव वाली खड़ी फसल को बचाने के तुरंत उपाय किए जाएं और उखड़े हुए बागवानी पेड़ों को दोबारा लगाने की योजना पर भी तेज़ी से काम हो। राहत शिविरों से लौटने वाले परिवारों को चावल, ज़रूरी राशन और नकद सहायता भी दी जा रही है।

कृषि मंत्री अच्चन्नायडु ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष के मानदंडों के अनुसार अतिरिक्त इनपुट सब्सिडी की मांग भी की है, ताकि राज्य के संसाधनों पर दबाव कम हो और किसानों को तेज़ी से मदद पहुंचाई जा सके।

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