कृषि अब सिर्फ खेती नहीं, बेहतर करियर का भी बड़ा विकल्प; विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को दी जानकारी
25 जुलाई 2026, भोपाल: कृषि अब सिर्फ खेती नहीं, बेहतर करियर का भी बड़ा विकल्प; विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को दी जानकारी – शासकीय आदर्श महाविद्यालय, विदिशा में आयोजित “प्रशासनिक अधिकारी कैसे बनें” विषयक छह दिवसीय कार्यशाला के चौथे दिन कृषि, वैज्ञानिक खेती और कृषि क्षेत्र में रोजगार की संभावनाओं पर विशेष सत्र आयोजित किया गया। कार्यक्रम में कृषि विभाग के जिला समन्वयक डॉ. डी.के. तिवारी और सहायक तकनीकी प्रबंधक अशोक रघुवंशी ने विद्यार्थियों को आधुनिक कृषि तकनीकों, जैविक खेती, मिट्टी संरक्षण और कृषि क्षेत्र में उपलब्ध विभिन्न करियर विकल्पों की विस्तृत जानकारी दी।
कृषि विज्ञान और तकनीक आधारित लाभकारी व्यवसाय
मुख्य अतिथि डॉ. डी.के. तिवारी ने कहा कि आज के समय में कृषि केवल पारंपरिक आजीविका का साधन नहीं रह गई है, बल्कि यह विज्ञान और तकनीक पर आधारित एक लाभकारी व्यवसाय बन चुकी है। उन्होंने कहा कि खेती की सबसे बड़ी पूंजी मिट्टी है और यदि उसकी गुणवत्ता एवं उर्वरता को सुरक्षित नहीं रखा गया तो भविष्य में कृषि उत्पादन प्रभावित होगा। उन्होंने विद्यार्थियों से रासायनिक उर्वरकों का संतुलित एवं वैज्ञानिक उपयोग करने तथा जैविक खाद और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर विशेष ध्यान देने की अपील की। उन्होंने कहा, “मिट्टी बचेगी तो खेती बचेगी और खेती बचेगी तो किसान तथा देश का भविष्य सुरक्षित रहेगा।”
आत्मा योजना से मिल रहा किसानों को लाभ
विशेष अतिथि अशोक रघुवंशी ने कृषि विभाग की आत्मा (ATMA) योजना की जानकारी देते हुए बताया कि इसके माध्यम से किसानों को समय-समय पर प्रशिक्षण, आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रदर्शन और नई खेती पद्धतियों की जानकारी दी जाती है। इससे खेती की लागत कम होती है, उत्पादन बढ़ता है और किसानों की आय में भी वृद्धि होती है।
विद्यार्थियों ने पूछे कृषि और करियर से जुड़े सवाल
कार्यक्रम का सबसे आकर्षक हिस्सा विद्यार्थियों के साथ संवाद रहा। इस दौरान छात्रों ने कृषि, स्वास्थ्य, रोजगार और आधुनिक खेती से जुड़े कई सवाल पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने वैज्ञानिक और व्यावहारिक तरीके से जवाब दिया।
बीए प्रथम वर्ष की छात्रा मुस्कान श्रीवास्तव ने कृषि अधिकारियों की कार्यशैली के बारे में जानकारी मांगी। इस पर डॉ. तिवारी ने बताया कि कृषि अधिकारी किसानों से नियमित संपर्क रखते हैं, खेतों का निरीक्षण करते हैं, सरकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करते हैं और किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।
छात्रा रूचि जैन ने हाईब्रिड बीजों के स्वास्थ्य पर प्रभाव को लेकर प्रश्न किया। डॉ. तिवारी ने स्पष्ट किया कि वैज्ञानिक परीक्षण और स्वीकृति प्राप्त हाईब्रिड बीज पूरी तरह सुरक्षित होते हैं तथा इनका स्वास्थ्य पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता। उन्होंने कहा कि संतुलित पोषण और सही खेती पद्धति अधिक महत्वपूर्ण है।
वहीं, अमोल सोले ने ऑर्गेनिक फसलों की पहचान के बारे में जानकारी चाही। विशेषज्ञों ने बताया कि प्रमाणित जैविक उत्पादों पर अधिकृत प्रमाणन चिह्न अंकित होता है और केवल देखकर किसी फसल के ऑर्गेनिक होने की पहचान हमेशा संभव नहीं होती।
यूरिया का संतुलित उपयोग जरूरी
कक्षा 9वीं के छात्र-छात्राओं ने भी कार्यक्रम में भाग लिया। बी.कॉम. प्रथम वर्ष के छात्र शानू ने अधिक यूरिया के उपयोग का मिट्टी पर प्रभाव पूछा। इस पर डॉ. तिवारी ने बताया कि यूरिया का अत्यधिक उपयोग मिट्टी के जैविक संतुलन को प्रभावित कर सकता है। इसलिए रासायनिक उर्वरकों के साथ जैविक खाद का संतुलित उपयोग आवश्यक है।
वहीं, राशि कुशवाह ने कृषि क्षेत्र में रोजगार की संभावनाओं पर सवाल किया। विशेषज्ञों ने बताया कि आज कृषि क्षेत्र में कृषि वैज्ञानिक, कृषि अधिकारी, एग्री-बिजनेस विशेषज्ञ, कृषि उद्यमी, कृषि पत्रकार और शोधकर्ता सहित अनेक क्षेत्रों में बेहतर करियर के अवसर उपलब्ध हैं।
व्यक्तित्व और करियर विकास पर रहेगा फोकस
कार्यक्रम का संचालन डॉ. स्मिता सिंघई ने किया, जबकि अंत में डॉ. अवधेश पांडे ने सभी अतिथियों, विद्यार्थियों एवं उपस्थितजनों का आभार व्यक्त किया। आयोजकों ने बताया कि कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों को प्रशासनिक सेवाओं के साथ-साथ विभिन्न क्षेत्रों की व्यावहारिक एवं समसामयिक जानकारी उपलब्ध कराकर उनके व्यक्तित्व और करियर विकास को नई दिशा देना है। कार्यशाला के अगले सत्र में बेहतर स्वास्थ्य, गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) की भूमिका और आदर्श नागरिक जैसे विषयों पर विशेषज्ञ विद्यार्थियों से संवाद करेंगे।
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