राज्य कृषि समाचार (State News)

कृषि रथों द्वारा हरदा जिले की 162 ग्राम पंचायतों में भ्रमण किया गया

09 फरवरी 2026, हरदा: कृषि रथों द्वारा हरदा जिले की 162 ग्राम पंचायतों में भ्रमण किया गया – प्रदेश में वर्ष 2026 को “कृषक कल्याण वर्ष“ के रूप में मनाया जा रहा है। इसी क्रम में हरदा जिले के तीनों विकास खंडों में किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग द्वारा कृषि रथ का संचालन किया जा रहा है।

कृषि रथ के साथ कृषि विज्ञान केंद्र, कोलीपुरा के वैज्ञानिक, कृषि विभाग एवं संबद्ध विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों द्वारा किसानों से सीधा संपर्क कर ई-विकास प्रणाली से उर्वरक क्रय करने के लिये जागरूक किया जा रहा है। साथ ही नरवाई प्रबंधन, ग्रीष्मकालीन मूंग फसल के स्थान पर उड़द, मूंगफली, तिल आदि फसलों को प्रोत्साहन, प्राकृतिक व जैविक कृषि करने के लिये प्रोत्साहन, मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर उर्वरकों की संतुलित मात्रा का उपयोग करने और भूमि पर बोई गई फसल अनुसार सूक्ष्म पोषक तत्वों के उपयोग करने आदि का व्यापक प्रचार-प्रसार भी किया जा रहा है। विभागीय योजनाओं की जानकारी के साथ-साथ किसानों को समसामयिक सलाह भी प्रदान की जा रही है। कृषि रथों द्वारा जिले की 162 ग्राम पंचायतों में भ्रमण किया गया है। इस दौरान 5270 किसानों, 247 जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में विभागीय अधिकारी कर्मचारी तथा वैज्ञानिकों द्वारा विस्तृत जानकारी प्रदाय की गई।

किसानों को आधुनिक खेती और नरवाई प्रबंधन की दी जा रही जानकारी

कटनी जिले के किसानों को आधुनिक कृषि यंत्रों और उन्नत खेती की जानकारी देने के लिए कृषि विभाग द्वारा कृषि रथ के माध्यम से किसानों को जागरूक किया जा रहा है। इसी कड़ी में विकासखंड रीठी के गांवों में ‘कृषि रथ’ चलाकर किसानों को आधुनिक कृषि यंत्रों एवं नरवाई प्रबंधन की जानकारी दी गई। किसानों को नरवाई (फसल अवशेष) प्रबंधन के लिए आधुनिक यंत्रों जैसे सुपर सीडर, हैप्पी सीडर, जीरो टिलेज सीड कम फर्टिलाइजर ड्रिल, स्ट्रा रीपर और रीपर कम बाइंडर की तकनीकी जानकारी दी। सुपर सीडर और हैप्पी सीडर खेत की तैयारी, नरवाई प्रबंधन और बोनी सहित तीन काम एक साथ करते हैं। इन यंत्रों के उपयोग से न केवल समय और लागत की बचत होती है, बल्कि पैदावार भी अच्छी मिलती है। नरवाई जलाने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति नष्ट होती है और वायु प्रदूषण फैलता है, जिससे बीमारियां बढ़ती हैं। नरवाई न जलाकर उसे खाद के रूप में उपयोग करना ही श्रेष्ठ है। किसानों को कस्टम हायरिंग, डीबीटी, यंत्रदूत ग्राम योजना, वर्मी कम्पोस्ट, नाडेप और जीवामृत खाद बनाने की विधि की भी जानकारी दी गई।

Advertisements
Advertisement
Advertisement

आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture

Advertisements
Advertisement
Advertisement