राज्य कृषि समाचार (State News)

छत्तीसगढ़ में खेती का बढ़ा दायरा, 2.5 साल में बागवानी का रकबा 8.42 से बढ़कर 8.91 लाख हेक्टेयर हुआ  

14 सितंबर 2026, रायपुर: छत्तीसगढ़ में खेती का बढ़ा दायरा, 2.5 साल में बागवानी का रकबा 8.42 से बढ़कर 8.91 लाख हेक्टेयर हुआ – छत्तीसगढ़ की पहचान लंबे समय से धान के कटोरे के रूप में रही है, लेकिन अब राज्य की कृषि पारंपरिक धान की खेती से आगे बढ़ रही है। आधुनिक तकनीक, सिंचाई, फसल विविधीकरण, प्रसंस्करण और बाजार तक पहुंच बढ़ाने के प्रयासों से खेती ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बदलाव का माध्यम बन रही है। इसका असर फसल उत्पादन के साथ-साथ बागवानी, पशुपालन और मत्स्य पालन जैसे क्षेत्रों में भी दिखाई दे रहा है।

धान के साथ नगदी फसलों और बागवानी पर जोर

छत्तीसगढ़ में पारंपरिक धान की खेती के साथ अब अदरक, गेंदा फूल और अन्य बागवानी फसलों का दायरा बढ़ रहा है। किसान धान तक सीमित रहने के बजाय अदरक, गेंदा और अन्य फूलों की खेती से आय बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं युवा किसान मछली पालन, मुर्गी पालन और बागवानी को एक साथ जोड़कर खेती को आय का प्रमुख जरिया बना रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में ड्रोन, ऑटोमैटिक रीपर और आधुनिक कृषि उपकरणों के इस्तेमाल से श्रम लागत कम करने और पैदावार बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।

खरीफ और रबी फसलों के उत्पादन में बढ़ोतरी

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सरकार के ढाई वर्षों से अधिक के कार्यकाल में राज्य में खेती का रकबा बढ़ने के साथ उत्पादन में भी वृद्धि दर्ज की गई है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, खरीफ फसलों के उत्पादन में करीब 17 प्रतिशत और रबी फसलों के उत्पादन में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इस बदलाव में बेहतर बीज, उर्वरक, सिंचाई और कृषि यंत्रीकरण तक किसानों की बढ़ती पहुंच की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

कृषक उन्नति योजना के तहत किसानों को मिली सहायता

किसानों को उत्पादन के साथ आर्थिक सुरक्षा देने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। कृषक उन्नति योजना के तहत खरीफ फसल के धान पर न्यूनतम समर्थन मूल्य से जुड़ी आदान सहायता के रूप में 24,73,762 किसानों को 13,289 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है।

वहीं गन्ना प्रोत्साहन योजना के तहत 1 करोड़ 3 लाख 34 हजार क्विंटल से अधिक गन्ने की खरीदी कर 32,955 किसानों को 64.95 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। फसल बीमा के दायरे में खरीफ सीजन में 15.92 लाख से अधिक और रबी सीजन में 2.99 लाख किसानों को शामिल किया गया। कृषक उन्नति योजना के तहत खरीफ 2023 से 2025 तक करीब 25.52 लाख किसानों के बैंक खातों में 35,892.90 करोड़ रुपये की सहायता राशि सीधे ट्रांसफर की गई है।

फसल विविधीकरण को दिया जा रहा बढ़ावा

छत्तीसगढ़ की मुख्य फसल धान है, लेकिन सरकार अब फसल विविधीकरण पर भी जोर दे रही है। किसानों को अन्य फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से 15 हजार रुपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। इसके तहत अरहर, मूंग, उड़द और चना जैसी दलहन फसलों के साथ सोयाबीन, मूंगफली, सूरजमुखी और तिल जैसी तिलहन फसलों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके अलावा मक्का, कपास तथा कोदो, कुटकी, रागी और बाजरा जैसे मोटे अनाजों की खेती करने वाले किसानों को भी इस राशि का लाभ मिलेगा।

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत प्रदेश के 24.63 लाख किसानों को 23वीं किस्त के रूप में 493 करोड़ रुपये सहित अब तक 11 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे ट्रांसफर की जा चुकी है।

आधुनिक तकनीक से घट रही खेती की लागत

छत्तीसगढ़ में खेती में नई तकनीकों का इस्तेमाल भी बढ़ रहा है। गांवों में स्थापित फार्म मशीनरी बैंक के जरिए छोटे किसानों को महंगी कृषि मशीनें किराये पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे किसानों की मेहनत और लागत कम करने में मदद मिल रही है। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों का विस्तार हुआ है। इससे पानी की बचत हो रही है। वहीं पिछले वर्ष 57 हजार से अधिक किसानों ने प्राकृतिक खेती को अपनाया है।

8.91 लाख हेक्टेयर तक पहुंचा बागवानी का रकबा

छत्तीसगढ़ की कृषि में बागवानी का क्षेत्र भी तेजी से विस्तार कर रहा है। पिछले ढाई वर्षों में राज्य में बागवानी का रकबा 8.42 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 8.91 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है। फल, सब्जी, मसाले और फूलों के साथ तेल पाम और बांस जैसी फसलों का विस्तार किसानों के लिए नई संभावनाएं पैदा कर रहा है। अब उत्पादन बढ़ाने के साथ इसे बाजार, प्रसंस्करण और बेहतर मूल्य से जोड़ने पर भी जोर दिया जा रहा है।

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