राज्य कृषि समाचार (State News)

ग्वालियर के किसान का कमाल! अमरूद की 2 नई किस्में विकसित कर बनाई अलग पहचान; हजारों किसानों को दे रहे प्रशिक्षण

16 जुलाई 2026, ग्वालियर: ग्वालियर के किसान का कमाल! अमरूद की 2 नई किस्में विकसित कर बनाई अलग पहचान; हजारों किसानों को दे रहे प्रशिक्षण – ग्वालियर जिले के डबरा विकासखंड के ग्राम बिलौआ निवासी प्रगतिशील किसान प्राण सिंह ने अपनी मेहनत, नवाचार और प्राकृतिक खेती के जरिए ऐसी मिसाल कायम की है, जिसकी चर्चा अब मध्यप्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के कई राज्यों में हो रही है। कभी बंजर रही जमीन को उन्होंने जैविक खेती के दम पर हरे-भरे बाग में बदल दिया। आज उनके कृषि फार्म पर विकसित अमरूद की दो नई किस्में उन्हें अलग पहचान दिला चुकी हैं, जबकि हजारों किसान और कृषि के विद्यार्थी उनके फार्म पर प्राकृतिक खेती के गुर सीखने पहुंचते हैं।

प्राण सिंह ने बताया कि उन्होंने वर्ष 1984 में यह जमीन खरीदी थी, जो पूरी तरह बंजर और अनुपजाऊ थी। शुरुआती वर्षों में कड़ी मेहनत के बावजूद कई बार निराशा हाथ लगी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। कृषि विभाग के अधिकारियों और विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में पहले खेत के एक हिस्से में जैविक खेती शुरू की और धीरे-धीरे पूरी कृषि भूमि को प्राकृतिक खेती में परिवर्तित कर दिया। आज उनका फार्म आधुनिक जैविक खेती का सफल मॉडल बन चुका है।

अमरूद की दो किस्में हुईं पेटेंट

प्राण सिंह के फार्म पर अमरूद, आम, चीकू, कटहल और जामुन सहित कई फलदार पौधों की जैविक खेती की जा रही है। उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि अमरूद की दो नई किस्में ‘बिलौआ-22’ और ‘बिलौआ रेड’ का विकास है। इन दोनों किस्मों को पेटेंट मिल चुका है, जिससे उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान मिली है। इसके अलावा वे जामुन की एक नई किस्म के पंजीकरण की प्रक्रिया में भी जुटे हुए हैं, जो कृषि नवाचार के प्रति उनके समर्पण को दर्शाता है।

देशभर के किसानों के लिए बना प्रशिक्षण केंद्र

प्राण सिंह का कृषि फार्म अब प्राकृतिक खेती सीखने का प्रमुख केंद्र बन चुका है। मध्यप्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के विभिन्न राज्यों से किसान, कृषि वैज्ञानिक और कृषि की पढ़ाई कर रहे विद्यार्थी यहां प्रशिक्षण लेने पहुंचते हैं। अब तक 40 से 50 हजार से अधिक किसान उनके फार्म पर प्रशिक्षण लेकर जैविक एवं प्राकृतिक खेती की तकनीकों को सीख चुके हैं। उनका मानना है कि सही तकनीक, वैज्ञानिक मार्गदर्शन और धैर्य के साथ बंजर जमीन को भी उपजाऊ बनाया जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने किया सम्मानित

हाल ही में राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय, ग्वालियर में किसान कल्याण वर्ष के तहत आयोजित उन्नत कृषि विषयक संभागीय कार्यशाला में प्राण सिंह ने प्राकृतिक खेती के अपने अनुभव साझा किए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जैविक खेती के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान की सराहना करते हुए सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने उनके प्रयासों को प्रदेश के किसानों के लिए प्रेरणादायक बताया।

प्राण सिंह का कहना है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर वर्ष 2026 को ‘किसान कल्याण वर्ष’ के रूप में मनाया जा रहा है, जिससे प्राकृतिक और जैविक खेती को नया प्रोत्साहन मिल रहा है। उन्होंने किसानों से आधुनिक तकनीक और प्राकृतिक खेती अपनाने की अपील करते हुए कहा कि मेहनत, धैर्य और सही मार्गदर्शन के साथ कोई भी किसान अपनी जमीन की तस्वीर बदल सकता है। उनकी सफलता इस बात का प्रमाण है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और नवाचार के दम पर खेती को लाभदायक और प्रेरणादायक बनाया जा सकता है।

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