किसानों की समृद्धि का संकल्प : मध्य प्रदेश सरकार ने खोले राहत और विकास के नए द्वार
एक वर्ष के लिए एकमुश्त फसल ऋण से लेकर भूमि अधिग्रहण पर चार गुना मुआवजा; भावांतर, बिजली, खाद और डेयरी योजनाओं से अन्नदाताओं को व्यापक राहत
22 जुलाई 2026, भोपाल: किसानों की समृद्धि का संकल्प : मध्य प्रदेश सरकार ने खोले राहत और विकास के नए द्वार – किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने, उनकी लागत कम करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश शासन ने किसानों के हित में कई महत्वपूर्ण और दूरगामी निर्णय लिए हैं। सरकार का प्रयास है कि किसान को ऋण, बाजार मूल्य, बिजली, खाद, भूमि अधिग्रहण और पशुपालन—हर क्षेत्र में आवश्यक सहयोग मिले, ताकि खेती लाभ का व्यवसाय बन सके और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो।
मध्यप्रदेश शासन के निर्णय के अनुसार अब किसानों को पूरे वर्ष के लिए एक ही फसल ऋण स्वीकृत किया जाएगा। इस ऋण को चुकाने के लिए उन्हें पूरे 12 महीने का पर्याप्त समय मिलेगा। इससे किसानों पर बार-बार ऋण लेने और कम समय में भुगतान करने का दबाव कम होगा।
विकास कार्यों के लिए यदि ग्रामीण क्षेत्र में किसी किसान की कृषि भूमि का भू-अर्जन किया जाता है, तो अब उसे बाजार दर से चार गुना तक अधिक मुआवजा दिया जाएगा। यह निर्णय किसानों के हितों की रक्षा और उनके आर्थिक पुनर्वास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
सोयाबीन किसानों को 1,475 करोड़ की राहत
बाजार के उतार-चढ़ाव से किसानों को राहत देने के लिए प्रदेश के 7 लाख से अधिक सोयाबीन किसानों के खातों में ₹1,475 करोड़ की राशि अंतरित की गई है। इसके साथ ही सरसों और धान को भी भावांतर भुगतान योजना में शामिल किया गया है, ताकि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके।
धान उत्पादक किसानों को ₹4,000 प्रति हेक्टेयर की अतिरिक्त राशि दी जा रही है। वहीं, प्रदेश में पहली बार कोदो-कुटकी की एमएसपी पर रिकॉर्ड खरीदी की गई है और किसानों को ₹1,000 प्रति क्विंटल बोनस का भुगतान किया गया है।
10 घंटे बिजली, 24 घंटे का लक्ष्य
किसानों को वर्तमान में प्रतिदिन 10 घंटे निर्बाध बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। आने वाले समय में इसे 24 घंटे तक करने का लक्ष्य रखा गया है। खाद वितरण में पारदर्शिता लाने और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को रोकने के लिए ‘ई-विकास प्रणाली’ लागू की गई है।
डेयरी और पशुपालन को भी मिल रहा प्रोत्साहन
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए मध्यप्रदेश शासन पशुपालन और डेयरी क्षेत्र को भी बढ़ावा दे रहा है। कम से कम 25 दुधारू पशुओं की डेयरी स्थापित करने पर ₹42 लाख तक का ऋण और 33 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। वहीं, प्रति गाय मिलने वाली सहायता राशि को ₹20 से बढ़ाकर ₹40 कर दिया गया है।
किसान कल्याण को केंद्र में रखकर लिए गए ये निर्णय मध्यप्रदेश शासन की उस नीति को दर्शाते हैं, जिसमें अन्नदाता को केवल उत्पादनकर्ता नहीं, बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार माना गया है। ऋण में राहत, बेहतर मुआवजा, फसल के उचित मूल्य, पर्याप्त बिजली, पारदर्शी खाद वितरण और डेयरी क्षेत्र में सहायता जैसे कदम किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण जीवन को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हैं।
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