राज्य कृषि समाचार (State News)

कृषि विज्ञान केंद्र, देवास में गाजर घास उन्मूलन अभियान चलाया  

26 अगस्त 2026, इंदौर: कृषि विज्ञान केंद्र, देवास में  गाजर घास उन्मूलन अभियान चलाया – कृषि विज्ञान केंद्र, देवास द्वारा  16 से 22 अगस्त तक गाजर घास उन्मूलन सप्ताह के अंतर्गत  केंद्र एवं ग्राम आनंदपुर डुंगरिया में अभियान चलाया गया। इस दौरान गाजर घास के प्रबंधन एवं उन्मूलन के बारे में अभियान चलाया गया। अभियान का आयोजन कृषि विज्ञान केंद्र, देवास के प्रधान वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. आर.पी. शर्मा के मार्गदर्शन में किया गया। जिसमें वैज्ञानिकों, कृषकों एवं छात्रों को गाजर घास के मनुष्यों, पशुओं, एवं वातावरण पर दुष्प्रभावों, प्रभावी प्रबंधन उपायों एवं सावधानियों के बारे में जानकारी दी  गई ।

वैज्ञानिकों ने बताया कि गाजरघास आक्रामक खरपतवार है। यह खेतों,  मेड़ों , बगीचों, खाली जमीन, सड़क व नहरों के किनारे तेजी से फैलता है। यह फसलों के विकास एवं उत्पादन में काफी नुकसान पहुंचाता है। खेतों में इसके कारण फसल के लिए उपलब्ध पानी, पोषक तत्व इत्यादि के लिए प्रतिस्पर्धा रहती है। साथ ही यह विभिन्न हानिकारक कीटों एवं बीमारियों को आश्रय स्थल भी देता है। वैज्ञानिक परीक्षणों से यह बात सामने आई है कि गाजरघास में फूल एवं बीज बनने से पहले ही इसे जड़ सहित उखाड़कर गड्डों में दबाने या कम्पोस्ट बनाकर ही नष्ट करना चाहिए।

केंद्र के वैज्ञानिकों ने बताया कि गाजर घास के संपर्क में आने से मनुष्यों तथा पशुओं में एलर्जी एवं त्वचा रोग संबंधी समस्याएं हो सकती है। लम्बे समय तक इसके संपर्क में रहने पर सांस से  जुड़ी  समस्याएं हो सकती है। इसलिए खेतों तथा घर के आस- पास के क्षेत्रों में इसको नष्ट करना जरुरी है। छोटे क्षेत्र में जड़ सहित उखाड़ना तथा बड़े स्तर पर इसकी रोकथाम के लिए सामूहिक रूप से एकीकृत प्रबंधन तकनीक कीआवश्यकता पड़ती है। कार्यक्रम में केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. के.एस. भार्गव, डॉ. अरविन्दर कौर, डॉ. महेंद्र सिंह, श्री विनेश मुजाल्दा एवं श्री पवन कुमार राजपूत की सक्रिय भागीदारी रही।

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