किसान संगठनों के हस्तक्षेप के बाद किसानों को हुआ 40 लाख का भुगतान

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19 मई 2022, इंदौर । किसान संगठनों के हस्तक्षेप के बाद किसानों को हुआ 40 लाख का भुगतान इंदौर की छावनी अनाज मंडी में कई  किसानों का माल 15 दिन पहले खरीदने के बाद भी व्यापारियों द्वारा भुगतान में टालम टोल करने और अब तक भुगतान नहीं होने का मामला सामने आने पर संयुक्त किसान मोर्चा से जुड़े संगठनों किसान मजदूर सेना और किसान संघर्ष समिति द्वारा  कृषि उपज मंडी से तुरंत भुगतान करवाने की मांग की गई। किसान संगठनों के हस्तक्षेप के बाद कुछ किसानों को करीब 40 लाख रुपए का भुगतान हो पाया है। अन्य कई किसानों का भुगतान अभी भी बाकी है।

किसान नेता बबलू जाधव ने कृषक जगत को बताया कि  मई माह के पहले सप्ताह में गेहूं और अन्य फसल खरीदी जाने के बाद व्यापारी किसानों को  भुगतान करने  में टालमटोल कर रहे थे , इसकी जानकारी मिलने पर किसान संगठनों ने मंडी सचिव से किसानों को तुरंत भुगतान कराने की मांग की। इसके बाद कुछ किसानों को करीब 40 लाख रुपए का भुगतान हो पाया है। जिन किसानों का भुगतान हुआ है उनमें गजराज सिंह, सिद्धनाथ, ऊंकार ,सनावदा,  ममता पटेल, अनुकूल ,राजेश, शाहिद,  प्रीति,कृष्णा  , ज्ञानचंद ,अमीन पटेल, रोहित ,किस्मत अली, अमन यादव, सुभाष और संतोष प्रमुख हैं । जबकि अभी भी कई किसानों का भुगतान बकाया है। जिनमें गारी पिपलिया  के किसान दिनेश यादव और महेश यादव, काजी पलासिया के फारुख पटेल, खुडैल के अनोखी लाल और लीलाधर आदि शामिल है। भुगतान नहीं होने वालों की सूची लम्बी है।

संयुक्त किसान मोर्चा इंदौर के संयोजक श्री रामस्वरूप मंत्री  ने बताया कि किसानों के भुगतान को लेकर लगातार विवाद की स्थिति बनती है। कई व्यापारी किसानों का माल खरीदने के बाद फरार हो गए हैं । 3 साल पूर्व 186 से ज्यादा किसानों से पौने तीन करोड़ रुपये के गेहूं  खरीदकर बिना भुगतान किए फरार हुए खंडेलवाल परिवार से पीड़ित किसान अब भी भुगतान के लिए भटक रहे हैं। वहीं  दो माह पूर्व लाखों रुपए का आलू और प्याज खरीद कर मुकाती ट्रेडिंग कंपनी के मालिक भी फरार हैं। पुरानी घटनाओं को देखकर दूध के जले किसानों को अपना भुगतान समय पर नहीं मिलने पर भय बना रहता है। 


किसान नेता द्वय श्री जाधव और श्री मंत्री ने  2019 में मंडी बोर्ड के प्रबंध संचालक और राज्य शासन के उस आदेश  की ओर  भी ध्यान आकृष्ट कराया ,जिसमें दो लाख से कम की फसल यदि किसान बेचता है, तो उसको तत्काल नगद भुगतान किया जाए। लेकिन उस आदेश का भी पालन नहीं हो रहा है। मंडी परिसर में लायसेंसी व्यापरियों द्वारा खरीदी गई फसल का समय पर भुगतान करवाना मंडी का दायित्व है। यदि दो लाख तक के नगद भुगतान का नियम सख्ती से लागू कर दिया जाए तो किसानों के साथ ठगी होने की आशंका नहीं रहेगी। किसान हितैषी मुख्यमंत्री से आग्रह है कि वह सभी मंडियों को निर्देश देकर दो लाख तक की फसल के नगद भुगतान को अनिवार्य करें।

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