खीरे से ₹2.40 लाख की कमाई, गेंदे से भी मुनाफा; झाबुआ में किसान की शेडनेट खेती बनी मिसाल
22 अगस्त 2026, भोपाल: खीरे से ₹2.40 लाख की कमाई, गेंदे से भी मुनाफा; झाबुआ में किसान की शेडनेट खेती बनी मिसाल – मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले में किसान अब पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक और संरक्षित खेती को अपनाकर अपनी आय बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान के तहत कलेक्टर डॉ. योगेश तुकाराम भरसट ने ग्राम कोकवद में किसान प्रभु भूरिया के शेडनेट हाउस का निरीक्षण किया। उन्होंने शेडनेट हाउस में उद्यानिकी फसलों के उत्पादन और उससे होने वाली आय की जानकारी ली। कलेक्टर ने किसानों को उन्नत कृषि तकनीकों से जोड़ने के साथ गांवों में शेडनेट हाउस को बढ़ावा देने और किसान क्लस्टर तैयार करने के निर्देश दिए।
2 हजार वर्गमीटर में शेडनेट हाउस, खीरे से हुई ₹2.40 लाख की आय
किसान प्रभु भूरिया ने बताया कि वे 2,000 वर्गमीटर क्षेत्र में शेडनेट हाउस में उद्यानिकी फसलों का उत्पादन कर रहे हैं। इससे पहले उन्होंने शेडनेट हाउस में खीरे की खेती की थी। इससे करीब 120 क्विंटल खीरे का उत्पादन हुआ, जिसे बेचकर लगभग ₹2.40 लाख की आय प्राप्त हुई। इसकी उत्पादन लागत करीब ₹60 हजार रही।
गेंदे की खेती से ₹30 हजार की आय
वर्तमान में किसान शेडनेट हाउस में गेंदे के फूलों का उत्पादन कर रहे हैं। इससे लगभग 10 क्विंटल गेंदे के फूल प्राप्त हुए। इन्हें झाबुआ में करीब ₹30 प्रति किलोग्राम की दर से बेचकर लगभग ₹30 हजार की आय हुई। गेंदे के उत्पादन पर करीब ₹20 हजार की लागत आई।
कलेक्टर ने शेडनेट हाउस में हो रहे उत्पादन की जानकारी लेते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस तरह की संरक्षित खेती को अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाया जाए। इच्छुक किसानों को शेडनेट हाउस तैयार करने के लिए प्रोत्साहित करने के साथ क्लस्टर आधारित उत्पादन को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया।
मक्का के साथ कस्तूरी भिंडी की मिश्रित खेती
कलेक्टर ने ग्राम में किसान दुल सिंह भूरिया द्वारा की जा रही मक्का और कस्तूरी भिंडी की मिश्रित खेती का भी अवलोकन किया। कस्तूरी भिंडी में औषधीय गुण बताए गए हैं और इसका प्रमुख रूप से नीमच मंडी में विक्रय किया जाता है। इसका बाजार भाव करीब ₹25 हजार से ₹30 हजार प्रति क्विंटल तक बताया गया है।
वर्तमान में रामा क्षेत्र में लगभग 30 से 40 हेक्टेयर क्षेत्र में कस्तूरी भिंडी का उत्पादन किया जा रहा है। इसकी बाजार संभावनाओं को देखते हुए कलेक्टर ने कस्तूरी भिंडी उत्पादक किसानों का क्लस्टर तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इससे उत्पादन को संगठित रूप से बढ़ावा देने और किसानों को बेहतर विपणन के अवसर उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
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