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राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

जीरो टिलेज तकनीक से सरसों की खेती हुई लाभकारी, कम लागत में हो रही बंपर पैदावार  

07 फरवरी 2026, नई दिल्ली: जीरो टिलेज तकनीक से सरसों की खेती हुई लाभकारी, कम लागत में हो रही बंपर पैदावार – जीरो टिलेज एवं अवशेष प्रबंधन (जेडटी+आर) तकनीक अपनाने से सरसों की फसल में खरपतवारों का प्रभाव काफी कम देखा गया है। इस पद्धति में सरसों की फसल में फैलेरिस माइनर, एवेना लुडोविशियाना, मेडिकैगो डेंटिकुलाटा, रूमेक्स डेंटेटस, कोरोनोपस डिडिमस तथा साइपरस रोटंडस जैसे प्रमुख खरपतवारों का घनत्व सबसे कम दर्ज किया गया।

खरपतवार नियंत्रण की वैज्ञानिक पद्धति रही कारगर

अध्ययन के अनुसार, पेंडिमेथालिन @339 ग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से 2 दिन बाद (2 डीएएस) प्री-इमरजेंस छिड़काव किया गया। इसके बाद 30 दिन बाद हाथ से खरपतवार निकालने तथा खरपतवार के बीज की कटाई करने से सभी प्रकार के खरपतवारों का घनत्व और बायोमास सबसे कम पाया गया।

इस पूरी पद्धति को अपनाने से न केवल खरपतवारों पर प्रभावी नियंत्रण हुआ, बल्कि सरसों की बीज उपज भी सबसे अधिक दर्ज की गई, जिससे यह तकनीक किसानों के लिए लाभकारी साबित हुई।

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मिट्टी और फसल दोनों सुरक्षित

कटाई के समय किए गए परीक्षण में मिट्टी में पेंडिमेथालिन और फिनोक्साप्रोप-प्रोपार्गिल के अवशेष 0.01 माइक्रोग्राम प्रति ग्राम से कम पाए गए। वहीं सरसों की फसल में इन रसायनों के अवशेष 0.05 माइक्रोग्राम प्रति ग्राम से भी कम रहे, जो पता लगाने योग्य सीमा से नीचे थे। 

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