बारिश नहीं हुई तो क्या करें? खरीफ फसलों को बचाने के आसान उपाय
लेखक: सतीश परसाई सेवानिवृत्त वरिष्ठ कृषि विज्ञानी 9406677601 ईमेल skparsai@yahoo.in
20 जुलाई 2026, नई दिल्ली: बारिश नहीं हुई तो क्या करें? खरीफ फसलों को बचाने के आसान उपाय – प्रदेश में पिछले कई दिनों से अच्छी और व्यापक बारिश नहीं हुई है। इसके कारण कई क्षेत्रों में सूखे जैसे हालात बनने लगे हैं। खरीफ फसलों की बढ़वार रुक गई है और यदि अगले एक सप्ताह में पर्याप्त वर्षा नहीं हुई, तो फसलों को भारी नुकसान हो सकता है। ऐसे समय में सबसे जरूरी है कि खेत में मौजूद नमी को अधिक से अधिक समय तक बचाकर रखा जाए।
1. खेत की नमी बचाएं, यही सबसे बड़ा उपाय
अभी नई नमी मिलने की संभावना कम है, इसलिए जो नमी मिट्टी में है, उसे सुरक्षित रखना जरूरी है।
- हल्की निंदाई-गुड़ाई (कोल्पा या कुदाली) करें। इससे मिट्टी की ऊपरी परत टूट जाती है और पानी का वाष्पीकरण कम होता है।
- खेत में पुआल, सूखी घास, पत्तियां या फसल के अवशेष बिछा दें। इसे जैविक मल्च कहते हैं। इससे मिट्टी ठंडी रहती है, नमी बनी रहती है और बाद में यही सामग्री खाद बन जाती है।
2. प्लास्टिक मल्च भी है अच्छा विकल्प
यदि बागवानी या सब्जी की खेती कर रहे हैं, तो प्लास्टिक मल्च का उपयोग करें।
- सिल्वर-ब्लैक मल्च में सिल्वर भाग ऊपर रहता है, जिससे कीट कम आते हैं और खरपतवार नहीं उगते।
- ब्लैक-ब्लैक मल्च पूरी तरह खरपतवार रोकने और नमी बचाने में प्रभावी होती है।
3. मिट्टी की जलधारण क्षमता बढ़ाएं
खेत में गोबर की सड़ी खाद, कम्पोस्ट या केंचुआ खाद मिलाने से मिट्टी अधिक पानी रोककर रखती है और फसल को लंबे समय तक नमी मिलती रहती है।
4. वर्षा का पानी खेत में ही रोकें
जब भी बारिश हो, उसका पानी खेत से बाहर न जाने दें।
- खेत की मेड़बंदी करें।
- ढलान वाले खेतों में समोच्च (कंटूर) जुताई करें।
- इससे पानी जमीन में समाता है और नमी लंबे समय तक बनी रहती है।
5. पौधों में पानी की कमी कम करें
पौधों की पत्तियों से पानी का नुकसान कम करने के लिए जरूरत पड़ने पर केओलिन (सफेद मिट्टी) या अन्य स्वीकृत एंटी-ट्रांसपिरेंट का छिड़काव किया जा सकता है। यह पत्तियों से पानी के अत्यधिक वाष्पीकरण को कम करता है।
6. गर्मी के तनाव से बचाएं
फसल पर गर्मी का असर कम करने के लिए पोटेशियम नाइट्रेट या पोटेशियम सल्फेट का 1–2 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव किया जा सकता है। इससे पौधे पानी का बेहतर उपयोग कर पाते हैं और सूखे का असर कुछ कम होता है।
7. खरपतवार तुरंत हटाएं
खरपतवार फसल का पानी और पोषक तत्व दोनों छीन लेते हैं।
- समय पर निंदाई करें।
- निकली हुई घास को फेंकने के बजाय खेत में ही बिछाकर मल्च के रूप में उपयोग करें।
8. यदि पानी उपलब्ध हो तो जीवनदायी सिंचाई करें
यदि कहीं थोड़ा भी पानी उपलब्ध हो, तो जीवनदायी सिंचाई करें।
- टपक सिंचाई (ड्रिप) सबसे अधिक पानी बचाती है और सीधे पौधों की जड़ों तक पानी पहुंचाती है।
- फव्वारा सिंचाई (स्प्रिंकलर) भी कम पानी में बेहतर सिंचाई का विकल्प है।
9. सरकार का अनुदान जरूर लें
मध्यप्रदेश सरकार ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली पर लगभग 45 से 90 प्रतिशत तक अनुदान देती है। किसान अपने नजदीकी कृषि विभाग या उद्यानिकी विभाग से जानकारी लेकर इसका लाभ उठा सकते हैं।
किसानों के लिए संदेश
बारिश हमारे हाथ में नहीं है, लेकिन खेत की नमी बचाना, खरपतवार नियंत्रित करना, जैविक मल्च का उपयोग करना और उपलब्ध पानी का सोच-समझकर उपयोग करना हमारे हाथ में है। समय रहते इन उपायों को अपनाकर सूखे की स्थिति में भी फसल को काफी हद तक सुरक्षित रखा जा सकता है।
आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़, व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Glo

