राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

खाद्य सुरक्षा में आत्मनिर्भरता के लिए प्रौद्योगिकी और सामूहिकीकरण महत्वपूर्ण

16 मई 2026, मुंबईखाद्य सुरक्षा में आत्मनिर्रता के लिए प्रौद्योगिकी और सामूहिकीकरण महत्वपूर्ण – आईएमसी कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण समिति द्वारा आयोजित आईएमसी कृषि सम्मेलन 2026 में, जिसका विषय था ‘आत्मनिर्भरता के लिए स्थिरता एवं जलवायु प्रौद्योगिकी’ पर कई लोगों ने अपने विचार प्रकट किए।

 महाराष्ट्र सरकार के पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव (कृषि एवं विपणन) डॉ. सुधीर कुमार गोयल (सेवानिवृत्त आईएएस) ने कहा, “भारत के कृषि क्षेत्र में लगभग 46% लोग कार्यरत हैं, फिर भी इसका सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में योगदान केवल 18% है। इसके अलावा, इनमें से अधिकांश सीमांत किसान हैं, जिनकी आजीविका देश की औसत प्रति व्यक्ति आय के आधे से भी कम पर चलती है। उनके पास आधुनिक कृषि पद्धतियों या नई तकनीक को अपनाने के लिए संसाधन या पूंजी नहीं है।” भारत में सुधारों की तत्काल आवश्यकता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, “कृषि सुधारों को गति देने के लिए भूमि समेकन के बजाय किसानों का सामूहिकरण महत्वपूर्ण है। इससे छोटे किसान संसाधनों को एकत्रित कर सकेंगे और उत्पादकता और आय बढ़ाने के लिए आईओटी और एआई जैसी प्रौद्योगिकियों को अपना सकेंगे।”

आईएमसी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री की अध्यक्ष सुश्री सुनीता रामनाथकर ने कहा, “कृषि आज भी भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ और लाखों लोगों की आजीविका का प्राथमिक स्रोत है। हालांकि, प्रमुख खाद्य पदार्थों के आयात पर बढ़ती निर्भरता, जलवायु परिवर्तन, संसाधनों की कमी और बदलते बाजार परिदृश्य जैसी चुनौतियों के कारण टिकाऊ और जलवायु-अनुकूल कृषि समाधानों की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गई है।”

आईएमसी कृषि और खाद्य प्रसंस्करण समिति के अध्यक्ष श्री आशय दोषी ने कहा, “पश्चिम एशिया संघर्ष से उर्वरकों की गंभीर कमी हो सकती है, जिससे भारत की खाद्य सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। इससे वर्षों की प्रगति भी उलट सकती है, भारत पोषण सुरक्षा के लक्ष्य से भटक सकता है और केवल खाद्य उपलब्धता पर नए सिरे से ध्यान केंद्रित करने के लिए मजबूर हो सकता है।”

भारत में जैविक उर्वरकों को बढ़ावा देने की वकालत करते हुए डॉ. गोयल ने कहा, “भारत खाद्य उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए अथक प्रयास कर रहा है, लेकिन पश्चिम एशिया संकट और होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से देश की चुनौतियाँ और बढ़ गई हैं। भारत प्रतिवर्ष 6 करोड़ टन से अधिक रासायनिक उर्वरकों का उपभोग करता है, जिनमें से लगभग आधा आयात पर निर्भर है, जबकि घरेलू उर्वरक उत्पादन के लिए निर्बाध एलएनजी आपूर्ति अत्यंत महत्वपूर्ण है।” विश्व में सबसे विशाल कृषि योग्य भूमि और सबसे बड़े कृषि कार्यबल में से एक होने के बावजूद, भारत खाद्य तेलों के लिए आयात पर अत्यधिक निर्भर है, घरेलू मांग के 60% से अधिक को पूरा करने के लिए सालाना लगभग 18 अरब डॉलर मूल्य का तेल खरीदता है। हर साल, भारत लगभग 16 मिलियन टन खाद्य तेल आयात करता है। इसी प्रकार दालों के मामले में, भारत अपनी घरेलू खपत (25-28 मिलियन टन) का लगभग 20% आयात पर निर्भर है।बढ़ती कीमतों और आपूर्ति संबंधी दबावों को लेकर लगातार चिंताओं के बीच, देश सालाना कनाडा और मोज़ाम्बिक जैसे देशों से पांच से सात मिलियन टन दालें आयात करता है। सुश्री रामनाथकर ने आगे कहा।  “कृषि में ‘आत्मनिर्भरता’ की परिकल्पना केवल उच्च उत्पादकता तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसमें किसानों और मूल्य श्रृंखला में शामिल सभी हितधारकों के लिए पर्यावरण की दृष्टि से टिकाऊ, तकनीकी रूप से उन्नत और आर्थिक रूप से व्यवहार्य प्रणालियाँ बनाना भी शामिल है।  

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