रबी सीजन 2026-27: सरकार ने तय किया 17.77 करोड़ टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य, कमजोर बारिश से बढ़ी किसानों की चिंता
24 सितंबर 2026, नई दिल्ली: रबी सीजन 2026-27: सरकार ने तय किया 17.77 करोड़ टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य, कमजोर बारिश से बढ़ी किसानों की चिंता – देश में रबी सीजन 2026-27 की तैयारियां जोर पकड़ रही हैं और सरकार ने इस सीजन के लिए कुल 17.77 करोड़ टन (177.72 मिलियन टन) खाद्यान्न उत्पादन का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। यह आंकड़े पिछले सप्ताह सामने आए, जब कृषि मंत्रालय के हवाले से रबी उत्पादन अनुमानों की रिपोर्ट सार्वजनिक हुई। हालांकि इसके साथ ही सितंबर महीने में देश के कई हिस्सों में सामान्य से काफी कम बारिश होने की खबरों ने किसानों और नीति-निर्माताओं दोनों की चिंता बढ़ा दी है।
रबी सीजन की सबसे अहम फसल गेहूं का उत्पादन लक्ष्य इस बार 12.10 करोड़ टन (121 मिलियन टन) रखा गया है। बीते वर्षों की तरह इस बार भी गेहूं के दाम, सरकारी खरीद और घरेलू मांग को देखते हुए इस लक्ष्य को हासिल करना खाद्य सुरक्षा और महंगाई नियंत्रण, दोनों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
दलहन फसलों के लिए 1.72 करोड़ टन (17.20 मिलियन टन) उत्पादन का लक्ष्य तय किया गया है, जिसमें अकेले चना 1.233 करोड़ टन और मसूर 21 लाख टन का योगदान देगा। दलहन में आत्मनिर्भरता भारत की लंबे समय से प्राथमिकता रही है, क्योंकि देश को अब भी बड़ी मात्रा में दालों का आयात करना पड़ता है।
मोटे अनाज और तिलहन पर भी फोकस
पोषक/मोटे अनाज का लक्ष्य 2.23 करोड़ टन (22.30 मिलियन टन) रखा गया है, जिसमें जौ 24.2 लाख टन और ज्वार 31.9 लाख टन शामिल हैं। तिलहन फसलों में सरसों का लक्ष्य 1.43 करोड़ टन (14.3 मिलियन टन) है, जो खाद्य तेल आयात पर निर्भरता घटाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसके अलावा रबी चावल का लक्ष्य 1.672 करोड़ टन और मक्के का लक्ष्य 1.669 करोड़ टन रखा गया है।
ये सभी आंकड़े रबी बुवाई से ठीक पहले सामने आए हैं, जब देशभर के किसान अपनी बुवाई योजना बना रहे हैं। ऐसे लक्ष्य आमतौर पर राज्यों को बीज, उर्वरक और सिंचाई संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा देने का काम करते हैं, ताकि तय उत्पादन स्तर हासिल किया जा सके।
कमजोर बारिश बनी सबसे बड़ी चुनौती
लेकिन इस बार लक्ष्य के साथ-साथ मौसम की चुनौती भी सुर्खियों में है। रिपोर्टों के अनुसार सितंबर महीने में देशभर में बारिश सामान्य से करीब 21 प्रतिशत कम दर्ज हुई है। पंजाब में यह कमी करीब 56 प्रतिशत और हरियाणा में करीब 42 प्रतिशत तक बताई गई है — ये दोनों राज्य देश के अनाज उत्पादन, खासकर गेहूं की खेती में, बेहद अहम भूमिका निभाते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि अल नीनो प्रभाव के मजबूत होने की आशंका के चलते आने वाले हफ्तों में मिट्टी की नमी और तापमान की स्थिति रबी बुवाई को प्रभावित कर सकती है। अक्टूबर-नवंबर में होने वाली बुवाई के लिए खेतों में पर्याप्त नमी न होना उत्पादन लक्ष्य हासिल करने में रुकावट बन सकता है। यही वजह है कि लक्ष्य के ऐलान के साथ मौसम पर करीबी नजर रखने की सलाह भी दी जा रही है।
किसानों के नजरिए से यह लक्ष्य आने वाले महीनों की बुवाई योजना, बीज-उर्वरक की जरूरत और संभावित एमएसपी नीति को समझने के लिए एक अहम संकेत है। खासकर पंजाब, हरियाणा जैसे राज्यों के किसानों को बारिश की कमी को देखते हुए सिंचाई के वैकल्पिक इंतजाम पहले से करने होंगे, ताकि बुवाई समय पर हो सके।
बीज, उर्वरक और कृषि-यंत्र कारोबार से जुड़े लोगों के लिए यह आंकड़ा मांग का अंदाजा देने वाला है — गेहूं और सरसों जैसी प्रमुख रबी फसलों के तय लक्ष्य से आने वाले हफ्तों में बीज और डीएपी/यूरिया जैसी खादों की मांग में तेजी की उम्मीद की जा सकती है। साथ ही अगर बारिश की कमी लंबे समय तक बनी रहती है, तो सिंचाई उपकरण, ड्रिप-स्प्रिंकलर सिस्टम और जल-संरक्षण तकनीकों से जुड़े कारोबार के लिए भी यह सीजन अवसर ला सकता है।
कुल मिलाकर, सरकार का 17.77 करोड़ टन का लक्ष्य महत्वाकांक्षी जरूर है, लेकिन इसे हासिल करना काफी हद तक आने वाले हफ्तों की बारिश और मौसम की स्थिति पर निर्भर करेगा। किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्रों और मौसम विभाग की सलाह के अनुसार ही बुवाई का समय तय करें।
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