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राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

पंजाब ने फिर लगाया 10 कीटनाशकों पर प्रतिबंध; बासमती चावल को बचाने की पहल

18 मार्च 2024, पंजाब: पंजाब ने फिर लगाया 10 कीटनाशकों पर प्रतिबंध; बासमती चावल को बचाने की पहल – पंजाब के कृषि विभाग ने शुक्रवार को एक अधिसूचना जारी कर राज्य में विशिष्ट कीटनाशकों की बिक्री, वितरण और उपयोग पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की। यह निर्णय 15 जुलाई 2024 को लागू होगा। इसका उद्देश्य बासमती चावल किसानों  के हितों की रक्षा करना और बिना कीटनाशक अवशेषों के उच्च गुणवत्ता वाले चावल का उत्पादन सुनिश्चित करना है।

यह प्रतिबंध बासमती चावल के दानों में सक्षम अधिकारियों द्वारा निर्धारित अधिकतम अवशिष्ट स्तर (एमआरएल) से अधिक कीटनाशक अवशेषों पाए जाने के कारण लगाया गया है। राज्य सरकार ने कुछ कृषि रसायनों के उपयोग से जुड़े संभावित जोखिमों और चावल की फसल की गुणवत्ता पर उनके प्रभाव को पहचाना है। प्रतिबंधित कीटनाशकों में एसेफेट, बुप्रोफेज़िन, क्लोरपाइरीफोस, हेक्साकोनाज़ोल, प्रोपिकोनाज़ोल, थियामेथोक्सम, प्रोफेनोफोस, इमिडाक्लोप्रिड, कार्बेन्डाजिम और ट्राइसाइक्लाज़ोल शामिल हैं। राज्य सरकार ने, कीटनाशक अधिनियम, 1968 (1968 का केंद्रीय अधिनियम 46) के अनुपालन में, और इस संबंध में उसे सक्षम करने वाली अन्य सभी शक्तियों के साथ, पंजाब में इन कीटनाशकों के सभी फॉर्मूलेशन की बिक्री, वितरण और उपयोग पर साठ दिनों के लिए प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है। इन चिंताओं के जवाब में, लुधियाना में पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पीएयू) ने बासमती चावल की खेती में कीट नियंत्रण के लिए वैकल्पिक कृषि रसायनों की सिफारिश की है। ये विकल्प, जिनमें अवशेष प्रभाव कम होता है, पंजाब राइस मिलर्स एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन ने यह भी बताया है कि उनके द्वारा परीक्षण किए गए कई नमूनों में बासमती चावल में कीटनाशक अवशेषों का मान अधिकतम अवशिष्ट स्तर से अधिक पाया गया है। एसोसिएशन ने पंजाब की विरासत बासमती उपज की रक्षा करने और अन्य देशों में बासमती चावल के निर्बाध निर्यात को सुनिश्चित करने के प्रयास में, इन कृषि रसायनों पर प्रतिबंध लगाने का अनुरोध किया है। एसोसिएशन की चिंताएँ अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के लिए आवश्यक गुणवत्ता मानकों को बनाए रखने के लिए कड़े उपायों की आवश्यकता पर प्रकाश डालती हैं। किसानों को कम अवशेष प्रभाव वाले उपलब्ध वैकल्पिक कीटनाशकों का पता लगाने और उन्हें अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

इस नोटिफिकेशन के निर्देशों को लागू करने के लिए हर डीलर को एक लिखित नोट दिया जाएगा। यदि कोई किसान धान/बासमती पर छिड़काव करने के लिए सूचीबद्ध कीटनाशकों में से किसी की मांग करता है, तो डीलर उन किसानों को इन कीटनाशकों का उपयोग न करने के लिए मार्गदर्शन/चेतावनी देंगे और अन्य विकल्प सुझाएंगे। राज्य सरकार विभिन्न वितरण बिंदुओं की भी जांच करेगी और इन 10 कीटनाशकों की बिक्री का रिकॉर्ड भी रखेगी।

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जैसे ही प्रतिबंध 15 जुलाई 2024 से  प्रभावी होगा, बासमती चावल उत्पादकों, कृषि हितधारकों और संबंधित अधिकारियों से आग्रह किया जाता है कि वे अधिसूचना के मुताबिक कीटनाशक व्यवस्था  करें।

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वहीँ एग्रोकेमिकल एसोसिएशन पंजाब  सरकार की इस अधिसूचना का विरोध कर रहे हैं। एसोसिएशनों को चिंता है कि इस आदेश से अन्य फसलों पर कीटनाशकों की बिक्री प्रभावित होगी। ये कीटनाशक राज्य में उगाई जाने वाली अन्य कई फसलों के लिए आवश्यक हैं, जहां उपयोग के लिए सुझाए गए विकल्प प्राथमिक कीटनाशक जितना प्रभावी नहीं हो सकते हैं ।

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