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उद्यानिकी (Horticulture)राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

केन्द्रीय कृषि मंत्रालय ने 2021-22 में बागवानी के लिए 2250 करोड़ रुपये आवंटित किए

किसानों की आय दोगुना कर सकती  है बागवानी

12  मई 2021, नई दिल्ली । केन्द्रीय कृषि मंत्रालय ने 2021-22 में बागवानी के लिए 2250 करोड़ रुपये आवंटित किए – किसानों की आय को बढ़ाने में बागवानी क्षेत्र की भूमिका और व्यापक संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए, भारत सरकार ने वर्ष 2021-22 में बागवानी क्षेत्र के विकास के लिए 2250 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं।

देशभर में बागवानी क्षेत्र के समग्र विकास और इसे बढ़ावा देने के लिए, केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने वर्ष 2021-22 को क्षेत्र पहले अधिक 2250 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। ये आवंटन ‘मिशन फॉर इंटिग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर (एमआईडीएच)’ योजना में  किया गया है। फल, सब्ज़ियाँ, जड़ और कंद फसलों, मशरूम, मसाले, फूल, सुगंधित पौधे, नारियल, काजू आदि को कवर करने वाले बागवानी क्षेत्र में मौजूद संभावनाओं को साकार करने के लिए कृषि मंत्रालय एमआईडीएच योजना को वर्ष 2014-15 से कर रहा है। वार्षिक कार्य योजना बनाने के लिए राज्यों/ केन्द्र शासित प्रदेशों तक इस आवंटन की जानकारी पहुँचा दी गई है।

आज देश में बागवानी फसलों का उत्पादन कृषि उत्पादन से आगे निकल गया है। वर्ष 2019-20 के दौरान देश में 25.66 मिलियन हैक्टेयर बागवानी क्षेत्र भूमि पर अब तक का सर्वाधिक 320.77 मिलियन टन उत्पादन हुआ। वर्ष 2020-21 के पहले अग्रिम अनुमान के अनुसार देश में 27.17 लाख हेक्टेयर भूमि पर बागवानी क्षेत्र का कुल उत्पादन 326.58 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है।

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एमआईडीएच ने बागवानी फसलों की पैदावार करने वाले क्षेत्र को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वर्ष 2014-15 से लेकर वर्ष 2019-20 तक बागवानी फसलों का क्षेत्रफल और उत्पादन क्रमशः 9% और 14% तक बढ़ा है। इसके अलावा, इस मिशन ने खेतों में इस्तेमाल की जाने वाली सर्वोत्तम प्रणालियों को बढ़ावा दिया है, जिसने खेत की उत्पादकता और उत्पादन की गुणवत्ता में काफी सुधार किया है।

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हालांकि, यह क्षेत्र फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान और प्रबन्धन एवं सप्लाई चैन के बुनियादी ढांचे के बीच मौजूद अंतर की वजह से अभी भी काफी चुनौतियों का सामना कर रहा है। भारतीय बागवानी क्षेत्र में उत्पादकता को बढ़ाने की संभावनाएं काफी ज़्यादा हैं, जो वर्ष 2050 तक देश में  650 मिलियन मीट्रिक टन फलों और सब्जियों की अनुमानित मांग को पूरा करने के लिए ज़रूरी है। इस दिशा में किए जाने वाले अच्छे प्रयासों में सामग्री उत्पादन की रोपाई पर ध्यान केन्द्रित करना, क्लस्टर विकास कार्यक्रम, कृषि अवसंरचना कोष के माध्यम से ऋण मुहैया कराना, एफपीओ के गठन और विकास जैसे कई प्रयास शामिल हैं।