सतत कृषि को बढ़ावा देने की केंद्र की मुहिम के सकारात्मक परिणाम, 26.18 करोड़ मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी
13 अगस्त 2026, नई दिल्ली: सतत कृषि को बढ़ावा देने की केंद्र की मुहिम के सकारात्मक परिणाम, 26.18 करोड़ मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी – केंद्र सरकार द्वारा देशभर में सतत और जलवायु अनुकूल कृषि को बढ़ावा देने के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। लोकसभा में सांसद थिरु डॉ. एस. जगतरक्षकन के सवाल के जवाब में कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने सरकार की ओर से उठाए गए कदमों और उनसे किसानों को मिल रहे लाभ की जानकारी दी।
राज्य मंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सहयोग से संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, सूक्ष्म सिंचाई, प्राकृतिक एवं जैविक खेती तथा जलवायु अनुकूल कृषि तकनीकों को बढ़ावा दे रही है। इन प्रयासों का उद्देश्य मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के साथ कृषि उत्पादकता और किसानों की आय में वृद्धि करना है।
26.18 करोड़ मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी
सरकार सॉयल हेल्थ एंड फर्टिलिटी स्कीम के तहत किसानों को मिट्टी की आवश्यकता के अनुसार उर्वरकों के विवेकपूर्ण इस्तेमाल और एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन के लिए प्रोत्साहित कर रही है। इसके तहत अब तक देशभर में 26.18 करोड़ मृदा स्वास्थ्य कार्ड तैयार किए जा चुके हैं।
मृदा स्वास्थ्य कार्ड के माध्यम से किसानों को उनकी भूमि में मौजूद पोषक तत्वों की स्थिति और आवश्यक उर्वरकों की जानकारी मिलती है। सरकार के अनुसार इससे उर्वरकों के संतुलित उपयोग और मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने में मदद मिल रही है।
नीति आयोग की मूल्यांकन रिपोर्ट के अनुसार, 63.78 प्रतिशत किसानों ने मृदा स्वास्थ्य कार्ड की सिफारिशों को अपनाने के बाद उर्वरक उपयोग दक्षता अथवा फसल उपज में सुधार की जानकारी दी। वहीं, 68.5 प्रतिशत किसानों ने प्राकृतिक इनपुट के इस्तेमाल से मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार होने की बात कही।
114.60 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में माइक्रो इरिगेशन
कृषि में पानी की बचत और सिंचाई की दक्षता बढ़ाने के लिए सरकार प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत ‘प्रति बूंद अधिक फसल’ योजना को आगे बढ़ा रही है। इसके तहत अब तक देश में 114.60 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को माइक्रो इरिगेशन के दायरे में लाया जा चुका है। इससे करीब 100 लाख किसान लाभान्वित हुए हैं।
माइक्रो इरिगेशन के साथ फर्टिगेशन को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। इस तकनीक में पानी में घुलनशील उर्वरकों को सिंचाई के पानी के साथ सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचाया जाता है। इससे पानी और पोषक तत्वों का अधिक सटीक एवं प्रभावी इस्तेमाल संभव होता है।
नीति आयोग की मूल्यांकन रिपोर्ट में बताया गया है कि 62.46 प्रतिशत किसानों ने ‘प्रति बूंद अधिक फसल’ योजना के तहत जल उपयोग दक्षता अथवा फसल उपज में पर्याप्त वृद्धि की जानकारी दी है। सरकार के मुताबिक, इन पहलों से कृषि क्षेत्र में संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल के साथ टिकाऊ खेती को बढ़ावा मिल रहा है I
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