धन-धान्य कृषि योजना का एक साल: शिवराज सिंह चौहान ने टॉप-3 जिलों को किया सम्मानित, एमपी का उमरिया तीसरे स्थान पर
15 अक्टूबर 2026, नई दिल्ली: धन-धान्य कृषि योजना का एक साल: शिवराज सिंह चौहान ने टॉप-3 जिलों को किया सम्मानित, एमपी का उमरिया तीसरे स्थान पर – प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना (PMDDKY) के कार्यान्वयन का एक साल 11 अक्टूबर 2026 को पूरा हो गया। इस अवसर पर भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने नई दिल्ली के पूसा स्थित राष्ट्रीय कृषि विज्ञान परिसर (NAS C) के भारत रत्न सी. सुब्रमण्यम सभागार में कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने योजना के तहत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले जिलों को सम्मानित किया। बिहार के गया जिले ने पहला, राजस्थान के नागौर ने दूसरा और मध्य प्रदेश के उमरिया जिले ने तीसरा स्थान हासिल किया। कार्यक्रम में कृषि विकास, किसानों की आय बढ़ाने और योजना के अगले वर्ष में जमीनी स्तर पर ठोस परिणाम हासिल करने पर जोर दिया गया।
पहले साल में मजबूत नींव, अब ठोस परिणामों पर जोर
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि योजना के पहले वर्ष में मजबूत नींव स्थापित करने पर ध्यान दिया गया। अब आने वाले वर्ष में जमीनी स्तर पर स्पष्ट और मापने योग्य परिणाम हासिल करने होंगे। उन्होंने कृषि उत्पादकता में सुधार, फसल सघनता बढ़ाने, सिंचाई एवं जल प्रबंधन को मजबूत करने, कृषि ऋण की उपलब्धता आसान बनाने, उच्च मूल्य वाली कृषि को बढ़ावा देने और फसल कटाई के बाद भंडारण सहित अन्य बुनियादी सुविधाओं में सुधार की आवश्यकता बताई।
उन्होंने कहा कि योजना की सफलता का वास्तविक आकलन किसानों के जीवन में आने वाले सकारात्मक बदलाव से होगा। इसके लिए सभी संबंधित विभागों और हितधारकों को आपसी समन्वय मजबूत करना होगा, कार्यान्वयन में तेजी लानी होगी और कृषि उत्पादन के साथ किसानों की सतत आय बढ़ाने पर ध्यान देना होगा।
शिवराज सिंह चौहान ने राज्य सरकारों, जिला प्रशासनों, वैज्ञानिक संस्थानों और किसानों के साथ मिलकर जिला कार्ययोजनाओं को ठोस परिणामों में बदलने की प्रतिबद्धता दोहराई। अगले वर्ष सभी चिन्हित जिलों में सफल पहलों को बड़े स्तर पर लागू करने और कृषि संबंधी परिणामों में सुधार लाने पर ध्यान दिया जाएगा। इसका लक्ष्य सभी 100 चयनित जिलों को कृषि उत्पादन और समृद्धि के लिहाज से आदर्श बनाना है।
22 अक्टूबर से शुरू होगा खेत बचाओ अभियान
केंद्रीय मंत्री ने मृदा स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए 22 अक्टूबर से 30 नवंबर 2026 तक सभी राज्यों में आयोजित होने वाले खेत बचाओ अभियान का भी उल्लेख किया। इस अभियान का उद्देश्य उर्वरकों के संतुलित और विवेकपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देना है।
उन्होंने राज्य सरकारों और संबंधित अधिकारियों से अभियान में सक्रिय रूप से भाग लेने की अपील की। उन्होंने मृदा की उर्वरता बनाए रखने, पर्यावरण की रक्षा करने और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों को संरक्षित करने के लिए टिकाऊ कृषि पद्धतियां अपनाने पर जोर दिया।
जिलों की जरूरतों के अनुसार तैयार होती हैं कार्ययोजनाएं
कार्यक्रम के स्वागत भाषण में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव ने योजना के जिला-केंद्रित दृष्टिकोण की जानकारी दी। इसके तहत प्रत्येक जिले की मिट्टी की स्थिति, वर्षा, फसल पैटर्न, जल उपलब्धता, बुनियादी ढांचे और किसानों की जरूरतों के अनुसार कार्ययोजनाएं तैयार की जाती हैं।
उन्होंने योजना को लागू करने में राज्य सरकारों, जिला कलेक्टरों, जिला नोडल अधिकारियों, केंद्रीय नोडल अधिकारियों, कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) के वैज्ञानिकों और जमीनी स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों के योगदान की सराहना की। उन्होंने योजना के बेहतर समन्वय और क्रियान्वयन में जिला धन-धान्य समितियों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया।
योजना के तहत एक समर्पित डैशबोर्ड के माध्यम से 121 संकेतकों के आधार पर जिलों के प्रदर्शन की निगरानी की जाती है। इसमें मासिक रैंकिंग के जरिए पारदर्शिता बनाए रखने और जिलों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करने की व्यवस्था है।
प्रतिनिधियों ने साझा किए अपने अनुभव
कार्यक्रम में योजना के अंतर्गत शामिल जिलों के प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव और नवाचारों को प्रस्तुत किया।
- गढ़चिरोली, महाराष्ट्र: जल संरक्षण और सूखा प्रबंधन से जुड़े कार्यों की जानकारी दी।
- अल्लूरी सीताराम राजू, आंध्र प्रदेश: उच्च मूल्य वाली बागवानी को बढ़ावा देने के लिए किए गए प्रयास प्रस्तुत किए।
- बांका, बिहार: लिलावरन प्राकृतिक कृषि भूमि पुनरुद्धार मॉडल का प्रदर्शन किया।
इन प्रस्तुतियों में बताया गया कि स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप योजनाएं तैयार करने, विभिन्न विभागों के बीच समन्वय और किसानों की भागीदारी से कृषि संबंधी चुनौतियों का समाधान किया जा सकता है। ऐसे प्रयास अन्य जिलों के लिए भी उपयोगी साबित हो सकते हैं।
छह प्रमुख उद्देश्यों में बेहतर प्रदर्शन करने वाले 18 जिले सम्मानित
कार्यक्रम में समग्र प्रदर्शन के आधार पर गया, नागौर और उमरिया को क्रमशः पहला, दूसरा और तीसरा स्थान मिलने के अलावा योजना के छह प्रमुख उद्देश्यों के तहत उत्कृष्ट कार्य करने वाले 18 जिलों को भी सम्मानित किया गया।
1. कृषि उत्पादकता बढ़ाना
- छत्रपति संभाजीनगर, महाराष्ट्र
- चित्रकूट, उत्तर प्रदेश
- गेजिंग, सिक्किम
2. फसल विविधीकरण और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना
- महोबा, उत्तर प्रदेश
- डिंडोरी, मध्य प्रदेश
- चमोली, उत्तराखंड
3. फसल कटाई के बाद भंडारण क्षमता बढ़ाना
- टीकमगढ़, मध्य प्रदेश
- सीधी, मध्य प्रदेश
- दंतेवाड़ा, छत्तीसगढ़
4. सिंचाई अवसंरचना में सुधार करना
- किश्तवाड़, जम्मू-कश्मीर
- दाहोद, गुजरात
- छोटा उदयपुर, गुजरात
5. अल्पकालिक और दीर्घकालिक कृषि ऋण की पहुंच बढ़ाना
- नारायणपेट, तेलंगाना
- जालौन, उत्तर प्रदेश
- श्री सत्य साईं, आंध्र प्रदेश
6. बेहतर शासन और सेवा वितरण
- नगर, राजस्थान
- कुरनूल, आंध्र प्रदेश
- कच्छ, गुजरात
- हावेरी, कर्नाटक
इन पुरस्कारों के माध्यम से कृषि विकास में जिला स्तर पर किए गए प्रयासों को मान्यता दी गई। साथ ही अन्य जिलों को भी नवाचार अपनाने और अपने प्रदर्शन में सुधार करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
क्या है प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना?
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना की घोषणा केंद्रीय बजट 2025-26 में की गई थी। इसे 11 अक्टूबर 2025 को कम कृषि उत्पादकता, कम फसल सघनता और कम कृषि ऋण वितरण वाले 100 जिलों को ध्यान में रखकर शुरू किया गया था।
योजना के प्रमुख उद्देश्य हैं:
- कृषि उत्पादकता बढ़ाना।
- फसल विविधीकरण और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित करना।
- पंचायत और ब्लॉक स्तर पर फसल कटाई के बाद भंडारण की सुविधाएं बढ़ाना।
- सिंचाई सुविधाओं और जल प्रबंधन में सुधार करना।
- किसानों के लिए अल्पकालिक और दीर्घकालिक कृषि ऋण की उपलब्धता आसान बनाना।
इस योजना के तहत 11 मंत्रालयों और विभागों की 36 केंद्रीय योजनाओं को संबंधित राज्य सरकारों की योजनाओं के साथ एक समन्वित ढांचे में जोड़ा गया है। इसका उद्देश्य प्रत्येक जिले की कृषि संबंधी प्राथमिकताओं और जरूरतों के अनुसार विकास कार्यों को आगे बढ़ाना है।
कार्यक्रम का समापन जिला स्तरीय योजना को मजबूत करने, नवाचार को बढ़ावा देने और केंद्र एवं राज्य सरकारों की योजनाओं के बेहतर समन्वय के संकल्प के साथ हुआ। योजना के दूसरे वर्ष में पहले साल की उपलब्धियों को किसानों के लिए ठोस लाभों में बदलने पर जोर रहेगा। इसमें कृषि उत्पादकता में सुधार, टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाना, बेहतर बुनियादी ढांचा विकसित करना और संस्थागत कृषि ऋण तक पहुंच बढ़ाना शामिल है। सरकार का लक्ष्य सभी 100 चयनित जिलों को कृषि प्रगति, समृद्धि और किसान कल्याण के आदर्श के रूप में विकसित करना है।
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