पराली जलाने की घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए केंद्र-राज्य के मंत्रियों की बड़ी बैठक, मशीनों के शत-प्रतिशत उपयोग पर जोर
15 अक्टूबर 2026, नई दिल्ली: पराली जलाने की घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए केंद्र-राज्य के मंत्रियों की बड़ी बैठक, मशीनों के शत-प्रतिशत उपयोग पर जोर – धान कटाई के मौजूदा सीजन में पराली (फसल अवशेष) जलाने की घटनाओं को रोकने और इसके बेहतर प्रबंधन के लिए केंद्र सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी सिलसिले में नई दिल्ली स्थित कृषि भवन में अंतर-मंत्रालयी उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की सह-अध्यक्षता केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने की। बैठक में पराली प्रबंधन के लिए उपलब्ध मशीनों के शत-प्रतिशत उपयोग, किसानों को सस्ते विकल्प उपलब्ध कराने और राज्यों में निगरानी बढ़ाने पर जोर दिया गया।
बैठक में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी, दिल्ली-एनसीआर सहित पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कृषि मंत्री, केंद्रीय कृषि सचिव अतीश चंद्रा, केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन सचिव नरेंद्र भूषण और केंद्र व राज्यों के संबंधित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
पराली प्रबंधन के लिए जमीन पर तेजी से काम करने के निर्देश
बैठक में दोनों केंद्रीय मंत्रियों ने कहा कि धान की कटाई और रबी फसलों की बुवाई के बीच बहुत कम समय बचा है। ऐसे में पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए केवल निर्देश जारी करना पर्याप्त नहीं होगा। प्रशासनिक अधिकारियों को जमीन पर उतरकर तेजी से काम करना होगा। इसके लिए जिला स्तर पर कलेक्टरों की बैठकें आयोजित करने, निगरानी मजबूत करने और किसानों की समस्याओं का व्यावहारिक समाधान निकालने के निर्देश दिए गए।
पराली को किसान की अतिरिक्त आय का जरिया बनाने पर जोर
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसानों को केवल पराली नहीं जलाने के लिए कहना पर्याप्त नहीं है। उन्हें ऐसे विकल्प उपलब्ध कराने होंगे, जो आसान, सस्ते और सुलभ हों। पराली जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है और मिट्टी में मौजूद लाभकारी कीटों के साथ पोषक तत्व भी नष्ट होते हैं। उन्होंने कहा कि पराली को खेत में मिलाने से जैविक खाद तैयार की जा सकती है।
वहीं, खेत से बाहर निकालकर इसका इस्तेमाल बायो-सीएनजी, बायो-इथेनॉल, बिजली उत्पादन और पशु चारे के लिए किया जा सकता है। इससे किसानों को अतिरिक्त आमदनी भी मिल सकती है। कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल पराली जलाने की घटनाओं को रोकना नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था तैयार करना है, जिससे किसानों को पराली जलाने की जरूरत ही न पड़े। पर्यावरण अनुकूल खेती के माध्यम से किसानों को कार्बन क्रेडिट जैसी संभावनाओं का लाभ दिलाने पर भी जोर दिया गया।
मध्य प्रदेश और राजस्थान में बढ़ीं घटनाएं, विशेष कार्ययोजना बनाने के निर्देश
बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, 15 सितंबर से 12 अक्टूबर की अवधि में पिछले वर्ष की तुलना में हरियाणा में पराली जलाने की घटनाओं में 53.3 प्रतिशत और उत्तर प्रदेश में करीब 32 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। पंजाब में भी घटनाओं में गिरावट आई है। हालांकि, मध्य प्रदेश और राजस्थान में पराली जलाने की घटनाओं में बढ़ोतरी को लेकर शिवराज सिंह चौहान ने चिंता जताई। उन्होंने दोनों राज्यों को प्रभावित जिलों और गांवों की पहचान कर तत्काल विशेष कार्ययोजना लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि धान की कटाई का बड़ा हिस्सा अभी बाकी है। ऐसे में जिन राज्यों में पराली जलाने की घटनाएं कम हुई हैं, उन्हें भी ढिलाई नहीं बरतनी चाहिए और लगातार निगरानी रखनी चाहिए।
फसल अवशेष प्रबंधन की मशीनों का शत-प्रतिशत उपयोग सुनिश्चित करें
केंद्रीय कृषि मंत्री ने फसल अवशेष प्रबंधन के लिए उपलब्ध मशीनों के अधिकतम उपयोग पर जोर दिया। बैठक में बताया गया कि केंद्र सरकार अब तक राज्यों को 3.54 लाख से अधिक फसल अवशेष प्रबंधन मशीनें उपलब्ध करा चुकी है। चालू वित्त वर्ष 2026-27 में 26,109 नई मशीनें भी दी गई हैं। शिवराज सिंह चौहान ने निर्देश दिए कि नई मशीनें उपलब्ध कराने के साथ पुरानी और बंद पड़ी मशीनों की भी तत्काल मरम्मत कराई जाए, ताकि वे दोबारा काम करने लगें। उन्होंने कहा कि मशीनें उपलब्ध होने के बावजूद उनका इस्तेमाल नहीं होना संसाधनों की बर्बादी है और इससे किसानों के सामने उपकरणों की कमी की समस्या खड़ी हो सकती है। उन्होंने कस्टम हायरिंग सेंटर (सीएचसी) को सक्रिय करने और छोटे व सीमांत किसानों को सस्ती दरों पर कृषि मशीनें उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए।
राज्यों को मिले 4,266.47 करोड़ रुपये, पंजाब से उपयोगिता प्रमाण पत्र मांगा
बैठक में बताया गया कि फसल अवशेष प्रबंधन (सीआरएम) योजना के तहत वर्ष 2018-19 से 2025-26 के दौरान केंद्र सरकार ने राज्यों को कुल 4,266.47 करोड़ रुपये जारी किए हैं। इसमें पंजाब को 2,056.50 करोड़ रुपये, हरियाणा को 1,171.71 करोड़ रुपये, उत्तर प्रदेश को 868.67 करोड़ रुपये और मध्य प्रदेश को 59 करोड़ रुपये दिए गए हैं। वहीं, वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 592.57 करोड़ रुपये का आवंटन तय किया गया है, जिसमें से 430.87 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। योजना के तहत जारी राशि के उपयोग की धीमी गति पर शिवराज सिंह चौहान ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि किसानों को समय पर जरूरी संसाधन उपलब्ध कराना आवश्यक है। उन्होंने पंजाब सरकार से पहले जारी की गई राशि का उपयोगिता प्रमाण पत्र (यूसी) जल्द केंद्र को भेजने का आग्रह किया, ताकि योजना की अगली किस्त जारी करने में देरी न हो।
सूखे क्षेत्रों में चारे के रूप में इस्तेमाल होगी पराली
शिवराज सिंह चौहान ने निर्देश दिए कि सूखे से प्रभावित क्षेत्रों में पराली को सुरक्षित रूप से एकत्र कर पशुओं के चारे के रूप में इस्तेमाल करने की व्यवस्था की जाए। इसके अलावा थर्मल पावर प्लांटों में पराली से बने पेलेट्स के इस्तेमाल, कंप्रेस्ड बायो गैस (सीबीजी) और दूसरी पीढ़ी के बायो-इथेनॉल संयंत्रों तक किसानों की सीधी आपूर्ति व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया गया। उन्होंने राज्यों से कहा कि पराली की आपूर्ति से जुड़ी स्वीकृत परियोजनाओं को बिना देरी के शुरू कराया जाए, ताकि फसल अवशेष का उपयोग बढ़ सके और किसानों को इसका आर्थिक लाभ मिल सके। कृषि मंत्री ने पूसा-44 जैसी अधिक समय में तैयार होने वाली धान की किस्मों के स्थान पर कम अवधि में पकने वाली उन्नत किस्मों, जैसे पूसा 2090 और पीआर126, को बढ़ावा देने की बात कही। इससे धान की कटाई के बाद खेत खाली करने और रबी फसलों की बुवाई के लिए पर्याप्त समय मिल सकेगा।
राज्यों को हरसंभव मदद देगा केंद्र
केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि पराली प्रबंधन के जमीनी क्रियान्वयन की मुख्य जिम्मेदारी राज्यों की है। हालांकि, केंद्र सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में तकनीकी, प्रशासनिक और आर्थिक स्तर पर राज्यों और किसानों की मदद के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने सभी संबंधित मंत्रालयों, कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) और जिला प्रशासन से पराली प्रबंधन को साझा राष्ट्रीय संकल्प के रूप में लेने का आह्वान किया, ताकि खेतों को प्रदूषण से बचाने के साथ किसानों की आय बढ़ाने के प्रयास भी किए जा सकें।
दोपहर 3 बजे के बाद भी पराली जलाने पर निगरानी के निर्देश
केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए जमीनी निगरानी और कार्रवाई मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने पंजाब के संगरूर, तरनतारन, अमृतसर, पटियाला और गुरदासपुर तथा हरियाणा के कैथल, करनाल, कुरुक्षेत्र, अंबाला और फतेहाबाद जैसे जिलों में विशेष निगरानी करने की बात कही। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में फसल कटाई के रुझानों का आकलन किया जाए, ताकि पराली जलाने की संभावित घटनाओं का पहले से अनुमान लगाकर जरूरी कदम उठाए जा सकें। उन्होंने पराली जलाने से जुड़े आंकड़ों को वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के साथ जोड़ने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
भूपेंद्र यादव ने कहा कि आने वाले दिनों में फसल कटाई के संभावित समय का पूर्वानुमान और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में वायु प्रदूषण को प्रभावित करने वाली मौसम संबंधी परिस्थितियों पर नजर रखना जरूरी है। इससे समय रहते उचित कदम उठाए जा सकेंगे और पराली प्रबंधन के लिए किए जा रहे प्रयासों के प्रभाव का आकलन भी किया जा सकेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि पराली जलाने की निगरानी केवल उपग्रह से मिलने वाले आंकड़ों पर निर्भर नहीं रहनी चाहिए। जिला कलेक्टरों को जमीन पर स्थिति का आकलन करने और नियमों का पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए। खास तौर पर दोपहर 3 बजे के बाद उपग्रह निगरानी में आने वाले अंतराल के दौरान ग्राउंड पेट्रोलिंग और फ्लाइंग स्क्वॉड के माध्यम से सख्त निगरानी रखने पर जोर दिया गया।
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