धन-धान्य कृषि योजना का एक साल पूरा, दिल्ली में सम्मानित हुए देश के शीर्ष जिले
15 अक्टूबर 2026, नई दिल्ली: धन-धान्य कृषि योजना का एक साल पूरा, दिल्ली में सम्मानित हुए देश के शीर्ष जिले – प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना ने एक साल पूरा कर लिया है। इस मौके पर 12 अक्टूबर को नई दिल्ली के राष्ट्रीय कृषि विज्ञान परिसर में एक राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित हुआ, जिसमें केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने योजना के तहत बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले जिलों को सम्मानित किया। यह जानकारी प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) की ओर से जारी विज्ञप्तियों में दी गई है।
इस योजना को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 16 जुलाई 2025 को मंजूरी दी थी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 अक्टूबर 2025 को नई दिल्ली के पूसा परिसर से इसकी शुरुआत की थी। योजना का मकसद देश के उन 100 जिलों में खेती को बेहतर बनाना है, जहां उत्पादकता, फसल सघनता और कृषि ऋण की पहुंच अपेक्षा से कम रही है। हर राज्य से कम से कम एक जिला इसमें शामिल किया गया है।
सौ जिलों में बदलाव की रफ्तार
योजना के तहत केंद्र की ओर से हर साल 24,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं। इसमें 11 मंत्रालयों की 36 केंद्रीय योजनाओं के साथ राज्य सरकारों की योजनाओं और निजी भागीदारी को भी एक साथ जोड़ा गया है, ताकि एक ही जिले में सारी मदद एक साथ पहुंच सके। कृषि मंत्रालय के मुताबिक सौ जिलों का औसत स्कोर अप्रैल 2026 के 22.54 अंक से बढ़कर जुलाई 2026 में 38.85 अंक पर पहुंच गया है।
यह सुधार छह अलग-अलग पहलुओं पर मापा जाता है। कृषि उत्पादकता का स्कोर 2.53 से 6.70 पर, फसल विविधीकरण का 5.60 से 8.65 पर, सिंचाई सुविधाओं का 1.65 से 4.20 पर और कृषि ऋण तक पहुंच का स्कोर 2.81 से 5.59 पर पहुंच गया है। जनवरी से जुलाई 2026 के बीच 6 लाख 90 हजार से ज्यादा किसानों और करीब 89 हजार विस्तार कर्मियों को अलग-अलग कौशल का प्रशिक्षण दिया गया, जबकि सवा दो लाख से अधिक लोगों को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण मिला।
महाराष्ट्र के जिले को मिली पहचान
दिल्ली के सम्मेलन में शीर्ष दस जिलों में महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर जिले का भी नाम शामिल रहा। जिले के कलेक्टर विनय गौड़ा जीसी को केंद्र सरकार की तरफ से सम्मानित किया गया। जिला अधीक्षक कृषि अधिकारी दीपक गवली ने बताया कि हर महीने योजना के डैशबोर्ड पर दर्ज प्रगति के आधार पर जिलों का चुनाव किया गया।
कलेक्टर गौड़ा जीसी ने इस सम्मान पर कहा कि यह पहचान केवल प्रशासन की नहीं है, बल्कि इसका श्रेय कृषि विभाग और जुड़े सभी कर्मचारियों को जाता है। उन्होंने आगे भी जिले को नवाचार आधारित किसान-कल्याण कार्यक्रमों के जरिये देश में अग्रणी बनाए रखने की बात कही।
महाराष्ट्र से पालघर, यवतमाल, गढ़चिरौली, धुले, रायगढ़, चंद्रपुर, नांदेड़ और बीड़ जिलों के प्रतिनिधि भी दिल्ली के इस कार्यक्रम में शामिल हुए। हर जिले से कलेक्टर, नोडल अधिकारी, कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक और एक प्रगतिशील किसान को बुलाया गया था।
योजना के तहत बनने वाले जिला स्तरीय कार्यदल में ग्राम पंचायत या जिलाधिकारी की अध्यक्षता में संबंधित विभागों के अधिकारी और प्रगतिशील किसान शामिल किए गए हैं। प्रगति पर निगरानी के लिए नीति आयोग ने एक अलग डैशबोर्ड भी तैयार किया है, जिसका वित्तीय प्रगति मॉड्यूल अगस्त 2026 के अंत में शुरू हो चुका है।
योजना के दायरे में फसलों के साथ-साथ फल उत्पादन, मछली पालन, मुर्गी-बकरी पालन, मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन और कृषि-वानिकी को भी शामिल किया गया है, ताकि किसानों की आय के कई स्रोत एक साथ विकसित हो सकें। मंत्रालय का कहना है कि हर जिले में कृषि विज्ञान केंद्रों को तकनीकी सहयोगी के तौर पर जोड़ा गया है, जो स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार किसानों को सलाह देते हैं। आने वाले महीनों में लाभार्थी-स्तर की प्रगति दर्ज करने वाला मॉड्यूल भी शुरू किया जाना है, जिससे यह पता चल सकेगा कि योजना का फायदा आखिरी छोर तक के किसान तक कितना पहुंच रहा है।
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