कर्नाटक-महाराष्ट्र के गन्ना किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए एक हफ्ते में बनेगी कमेटी, शिवराज सिंह चौहान ने किया ऐलान
15 अक्टूबर 2026, नई दिल्ली: कर्नाटक-महाराष्ट्र के गन्ना किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए एक हफ्ते में बनेगी कमेटी, शिवराज सिंह चौहान ने किया ऐलान – कर्नाटक और महाराष्ट्र के गन्ना किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए केंद्र सरकार एक हफ्ते के भीतर उच्च स्तरीय संयुक्त कमेटी का गठन करेगी। यह कमेटी गन्ने की रिकवरी, वजन में कटौती, वेस्टेज, लैब टेस्टिंग और फसल बीमा से जुड़े मुद्दों की जांच करेगी। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी के साथ हुई बैठक में यह घोषणा की। बैठक में दोनों राज्यों से आए गन्ना किसानों के प्रतिनिधिमंडलों ने अपनी समस्याएं रखीं। कर्नाटक सरकार के संबंधित मंत्री और केंद्र व राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी भी इसमें शामिल हुए।
रिकवरी और वजन में अंतर की होगी जांच
बैठक में गन्ना किसानों ने शुगर मिलों में गन्ने की रिकवरी के आंकड़ों में अंतर, वजन में कटौती, वेस्टेज और वास्तविक रिकवरी को लेकर अपनी चिंताएं सामने रखीं। इसके अलावा प्रयोगशाला जांच और फसल बीमा से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई।केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों की समस्याओं को गंभीरता से सुना। उन्होंने कहा कि किसानों के हितों की रक्षा करना सरकार की प्राथमिकता है और उनके साथ किसी भी तरह का शोषण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने रिकवरी के आंकड़ों में अंतर, वजन में कटौती और मिलों द्वारा वास्तविक रिकवरी की जानकारी को लेकर सामने आई विसंगतियों को महत्वपूर्ण विषय बताया। उन्होंने कहा कि इन समस्याओं का समाधान केवल तात्कालिक उपायों तक सीमित नहीं होना चाहिए। इसके लिए पारदर्शी और वैज्ञानिक व्यवस्था विकसित करना जरूरी है, ताकि गन्ना किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके और भविष्य में ऐसी समस्याओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
कमेटी में केंद्र और राज्य सरकारों के प्रतिनिधि होंगे शामिल
शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि प्रस्तावित संयुक्त कमेटी में केंद्र सरकार, कर्नाटक और महाराष्ट्र सरकारों, किसान संगठनों के अधिकृत प्रतिनिधियों, शुगर मिलों के प्रतिनिधियों और संबंधित विषयों के विशेषज्ञ वैज्ञानिकों को शामिल किया जाएगा। कमेटी गन्ने की कटाई के समय, रिकवरी मापने के वैज्ञानिक मानकों, आधुनिक प्रयोगशाला जांच व्यवस्था और वजन की शुद्धता से जुड़े तकनीकी पहलुओं की विस्तृत जांच करेगी। इसके बाद निर्धारित समय-सीमा के भीतर अपनी व्यावहारिक सिफारिशें सरकार को सौंपेगी। इस प्रक्रिया में संबंधित राज्य सरकारों से भी सहयोग की अपेक्षा की गई है, ताकि किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए प्रभावी कदम उठाए जा सकें।
समस्याओं का समाधान दो चरणों में होगा
बैठक में यह भी तय किया गया कि गन्ना किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए अल्पकालिक और दीर्घकालिक, दोनों स्तरों पर काम किया जाएगा। अल्पकालिक उपायों के तहत तत्काल प्रशासनिक सुधारों पर ध्यान दिया जाएगा, जबकि दीर्घकालिक योजना में नीतिगत और तकनीकी व्यवस्थाओं को वैज्ञानिक आधार पर मजबूत किया जाएगा। इसका उद्देश्य गन्ने की रिकवरी, वजन और जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना तथा किसानों के हितों की सुरक्षा के लिए स्थायी व्यवस्था विकसित करना है।
एफआरपी निर्धारण की प्रक्रिया पर भी हुई चर्चा
केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी ने बैठक में गन्ने के उचित एवं लाभकारी मूल्य (FRP) के निर्धारण की वैज्ञानिक प्रक्रिया और लागत आकलन के तरीकों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार राज्यों और किसानों के समन्वय से विभिन्न स्तरों पर पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में काम कर रही है। बैठक में शिवराज सिंह चौहान ने किसानों को भरोसा दिलाया कि उनकी समस्याओं और सुझावों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। केंद्र सरकार का उद्देश्य गन्ना किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ उनकी उपज के मूल्यांकन और भुगतान से जुड़ी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ाना है।
आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़, व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture


