राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

एनआरआईआईपीएम ने गांवों में स्थापित किए स्मार्ट कृषि कियोस्क, किसानों को डिजिटल मिलेगी फसल और कीट प्रबंधन की जानकारी

06 जून 2026, नई दिल्ली: एनआरआईआईपीएम ने गांवों में स्थापित किए स्मार्ट कृषि कियोस्क, किसानों को डिजिटल मिलेगी फसल और कीट प्रबंधन की जानकारी – भाकृअनुप-राष्ट्रीय समेकित कीट प्रबंधन अनुसंधान संस्थान (एनआरआईआईपीएम), नई दिल्ली ने अनुसूचित जाति उप-योजना के तहत कृषि विज्ञान केन्द्र-II, सीतापुर के सहयोग से गोद लिए गए ग्राम अमरापुर और कमुवा में किसानों के लिए तकनीकी एवं वैज्ञानिक सशक्तिकरण कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को आईसीटी आधारित समेकित कीट प्रबंधन (आईपीएम) तकनीकों से जोड़ना, कृषि को अधिक टिकाऊ बनाना तथा डिजिटल माध्यमों से फसल एवं कीट प्रबंधन संबंधी जानकारी उपलब्ध कराना था। इस अवसर पर गांवों में आईसीटी-सक्षम स्मार्ट कृषि कियोस्क स्थापित किए गए, जो किसानों को समय पर वैज्ञानिक परामर्श और कृषि संबंधी जानकारी उपलब्ध कराएंगे।

स्मार्ट कियोस्क से मिलेगी त्वरित कृषि सलाह

कार्यक्रम के दौरान एनआरआईआईपीएम के निदेशक डॉ. आर. थंगावेल्लू ने दोनों गांवों में आईसीटी-सक्षम कियोस्क का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीकों के उपयोग से किसानों को फसलों में लगने वाले कीटों और रोगों की समय पर जानकारी मिलेगी, जिससे नुकसान कम करने में मदद मिलेगी। ये कियोस्क गांव स्तर पर सूचना एवं परामर्श केंद्र के रूप में कार्य करेंगे और किसानों को मौसम आधारित सलाह, फसल-विशिष्ट समेकित कीट प्रबंधन सिफारिशें तथा कीट एवं रोग निगरानी संबंधी अद्यतन जानकारी उपलब्ध कराएंगे।

 मोबाइल ऐप और डिजिटल प्लेटफॉर्म से होगा कीट प्रबंधन

कार्यक्रम में राष्ट्रीय कीट निगरानी प्रणाली (एनपीएसएस) ऐप एवं वेब पोर्टल का प्रदर्शन किया गया। वैज्ञानिकों ने किसानों को बताया कि मोबाइल ऐप, जीआईएस मैपिंग, ड्रोन और पूर्वानुमान मॉडल जैसी आधुनिक सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकियों के माध्यम से कीट प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। किसानों को एनपीएसएस मोबाइल एप्लिकेशन डाउनलोड करने के लिए प्रोत्साहित किया गया, जिसके माध्यम से वे प्रभावित फसलों की तस्वीरें अपलोड कर तत्काल वैज्ञानिक सलाह प्राप्त कर सकते हैं। इससे गलत निदान और रसायनों के अनावश्यक उपयोग में कमी आएगी।

 किसानों को बांटे गए आधुनिक कृषि उपकरण

कार्यक्रम के दौरान किसानों की स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सोलर ड्रायर, बहु-फसली थ्रेशर, रीपर बाइंडर, स्प्रेयर तथा कृषि कियोस्क जैसे आधुनिक कृषि उपकरण वितरित किए गए। वैज्ञानिकों ने बताया कि इन उपकरणों के उपयोग से कृषि कार्यों में दक्षता बढ़ेगी, श्रम लागत कम होगी और किसानों की आय में वृद्धि होगी। साथ ही किसानों को समेकित कीट प्रबंधन की विभिन्न तकनीकों, जैविक नियंत्रण उपायों तथा आवश्यकता आधारित कीटनाशक उपयोग के बारे में भी जानकारी दी गई।

एफपीओ और क्षमता निर्माण पर भी जोर

कार्यक्रम में किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) की भूमिका पर भी चर्चा की गई। वैज्ञानिकों ने बताया कि एफपीओ सामूहिक विपणन, संसाधन प्रबंधन और नई कृषि तकनीकों के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। कृषि विज्ञान केन्द्रों द्वारा किसानों के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रमों और आवश्यकता आधारित कृषि तकनीकों को बढ़ावा देने के प्रयासों की जानकारी भी साझा की गई। बड़ी संख्या में किसानों, महिला स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण युवाओं ने कार्यक्रम में भाग लिया तथा डिजिटल कृषि तकनीकों के प्रति उत्साह दिखाया।

वैज्ञानिकों ने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म और स्मार्ट कृषि कियोस्क के माध्यम से कीट नियंत्रण की पारंपरिक व्यवस्था को अधिक तेज, सटीक और किसान-केंद्रित बनाया जा सकता है। इससे फसल उत्पादकता बढ़ाने, उत्पादन लागत कम करने और पर्यावरण अनुकूल कृषि को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी। किसानों ने भी इस पहल का स्वागत करते हुए इसे आधुनिक और टिकाऊ कृषि की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

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