पीएमएफएमई योजना ने पार किया 2 लाख ऋण लाभार्थियों का आंकड़ा, 11 लाख रोजगार सृजित
16 जुलाई 2026, नई दिल्ली: पीएमएफएमई योजना ने पार किया 2 लाख ऋण लाभार्थियों का आंकड़ा, 11 लाख रोजगार सृजित – सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को औपचारिक अर्थव्यवस्था से जोड़ने के उद्देश्य से संचालित प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME) ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। योजना के तहत अब तक 2 लाख से अधिक सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को ऋण स्वीकृत किया जा चुका है। इस अवसर पर केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान ने नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में इस उपलब्धि को देश के सूक्ष्म उद्यमों के लिए बड़ी सफलता बताया।
मंत्रालय के अनुसार, योजना के माध्यम से अब तक 20,300 करोड़ रुपये से अधिक के परियोजना निवेश को बढ़ावा मिला है। योजना से जुड़े लगभग 90 प्रतिशत लाभार्थी प्रथम पीढ़ी के उद्यमी हैं, जबकि 44 प्रतिशत महिलाएं हैं। इसके अलावा 75,000 से अधिक उद्यम उद्यम आधार, उद्यम असिस्ट, एफएसएसएआई और जीएसटी जैसे पंजीकरणों के माध्यम से औपचारिक अर्थव्यवस्था का हिस्सा बने हैं। योजना से करीब 11 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार भी सृजित हुए हैं।
कार्यक्रम में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों, विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों, बैंकिंग संस्थानों, विकास साझेदारों, स्वयं सहायता समूहों (SHGs), किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) और उद्यमियों ने भाग लिया। इस दौरान योजना की उपलब्धियों पर आधारित प्रकाशनों का विमोचन किया गया तथा लाभार्थियों ने अपने अनुभव साझा किए।
मंत्रालय के संयुक्त सचिव देवेश देवल ने देशव्यापी मल्टीमीडिया जागरूकता अभियान की शुरुआत की घोषणा करते हुए कहा कि पीएमएफएमई योजना वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण, ब्रांडिंग, विपणन और बाजार से जोड़ने तक सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमियों को समग्र सहयोग प्रदान करती है।
खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के सचिव ए. पी. दास जोशी ने कहा कि यह उपलब्धि देश में सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के मजबूत होते पारिस्थितिकी तंत्र का संकेत है। उन्होंने बताया कि योजना वित्त, तकनीक, क्षमता निर्माण और बाजार तक पहुंच को एकीकृत कर उद्यम विकास को गति दे रही है।
मंत्रालय ने बताया कि ‘एक जिला-एक उत्पाद (ODOP)’ पहल के तहत लगभग 200 उत्पादों को कवर करने वाले 40 साझा ब्रांडों को समर्थन दिया जा रहा है। इसके माध्यम से मखाना, मोटे अनाज (मिलेट्स), मसालों और जीआई टैग वाले उत्पादों के स्थानीय मूल्य श्रृंखला विकास को बढ़ावा मिल रहा है।
अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि दो लाख ऋण लाभार्थियों का आंकड़ा यह दर्शाता है कि सरकार की योजनाएं जमीनी स्तर पर प्रभावी परिणाम दे रही हैं। उन्होंने कहा कि योजना में 44 प्रतिशत महिला लाभार्थियों की भागीदारी महिला सशक्तिकरण और विकसित भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
मंत्री ने बिहार, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के बेहतर प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि यह उपलब्धि भारत के खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के अगले विकास चरण की मजबूत नींव साबित होगी।
मंत्रालय के अनुसार, योजना के तहत अब तक 4.18 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूह (SHG) सदस्यों को सीड कैपिटल सहायता प्रदान की गई है। वहीं 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 80 कॉमन इन्क्यूबेशन सेंटर स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 32 केंद्र संचालित हो चुके हैं। योजना के अंतर्गत 1.76 लाख से अधिक लाभार्थियों को प्रशिक्षण दिया गया है, जिनमें 77 प्रतिशत महिलाएं हैं।
कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने झारखंड के रांची निवासी इंदरजीत सिंह को योजना के 2 लाखवें ऋण लाभार्थी के रूप में सम्मानित करते हुए उन्हें स्वीकृति पत्र और प्रमाण-पत्र प्रदान किया।
मंत्रालय का कहना है कि यह उपलब्धि देश के सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को संगठित और प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है तथा आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में सहायक होगी।
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