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राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

‘प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना’ का राष्ट्रीय सम्मेलन: शिवराज सिंह बोले- दिल्ली से नहीं, जिलों से बनेगी कृषि योजना

15 अक्टूबर 2026, नई दिल्ली: ‘प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना’ का राष्ट्रीय सम्मेलन: शिवराज सिंह बोले- दिल्ली से नहीं, जिलों से बनेगी कृषि योजना – प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत कृषि उत्पादकता बढ़ाने और किसानों की आय में सुधार करने के लिए जिला स्तर पर योजनाएं तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कृषि योजनाएं दिल्ली में बैठकर नहीं, बल्कि जिलों की जरूरतों और स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर बनाई जानी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन, बागवानी और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों को एक साथ जोड़कर काम करने की अपील की, ताकि किसानों को बेहतर परिणाम मिल सकें।

100 जिलों में कृषि विकास पर विशेष ध्यान

प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के राष्ट्रीय सम्मेलन में देश के 50 से अधिक जिलों के कलेक्टरों ने भाग लिया। सम्मेलन में योजना के क्रियान्वयन, कृषि उत्पादकता बढ़ाने और जिला स्तर पर विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर चर्चा हुई। योजना का उद्देश्य ऐसे 100 जिलों में कृषि विकास को गति देना है, जहां कृषि उत्पादकता कम है, फसलों की सघनता कम है या कृषि ऋण का प्रवाह अपेक्षाकृत कम है। इन जिलों में स्थानीय जरूरतों के अनुसार कार्ययोजना तैयार कर खेती से जुड़ी चुनौतियों का समाधान करने पर जोर दिया जा रहा है।

हर महीने कृषि कार्ययोजना की समीक्षा करने के निर्देश

शिवराज सिंह चौहान ने कलेक्टरों से कहा कि वे कृषि विकास से जुड़े सभी विभागों के बीच समन्वय स्थापित करें और हर महीने जिला कृषि कार्ययोजना की समीक्षा करें। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजनाओं का लाभ किसानों तक पहुंचाने के साथ उनके परिणामों पर भी ध्यान दिया जाए। उन्होंने कृषि वैज्ञानिकों के शोध और नई तकनीकों को किसानों के खेतों तक पहुंचाने की जरूरत बताई। साथ ही, कृषि विस्तार सेवाओं को मजबूत करने और किसानों को आधुनिक खेती की तकनीकों के बारे में जागरूक करने पर जोर दिया।

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धान की परती जमीन पर दलहन-तिलहन की खेती को बढ़ावा

सम्मेलन में धान की कटाई के बाद खाली रहने वाली जमीन का बेहतर उपयोग करने पर भी चर्चा हुई। ऐसी जमीन पर दलहन और तिलहन की खेती को बढ़ावा देकर किसानों की आय बढ़ाने और कृषि भूमि की उत्पादकता में सुधार करने की दिशा में काम करने पर जोर दिया गया। इसके अलावा किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) का विस्तार करने और उन जिलों में कृषि ऋण की उपलब्धता बढ़ाने की जरूरत बताई गई, जहां किसानों को संस्थागत ऋण प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

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कृषि के साथ पशुपालन और खाद्य प्रसंस्करण पर जोर

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए केवल फसल उत्पादन पर निर्भर रहने के बजाय खेती को पशुपालन, मत्स्य पालन, बागवानी और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों से जोड़ना जरूरी है। इससे किसानों को आय के अतिरिक्त स्रोत मिल सकते हैं और कृषि गतिविधियों को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है। सम्मेलन में जल संरक्षण, प्राकृतिक खेती और बागवानी जैसी गतिविधियों को प्रोत्साहित करने पर भी चर्चा हुई। इन क्षेत्रों में विभिन्न जिलों की ओर से किए गए नवाचारों और अनुभवों को साझा किया गया, ताकि दूसरे जिले भी उपयोगी पहल को अपनाकर अपने यहां कृषि विकास को गति दे सकें।

जिलों के नवाचारों से सीखने पर जोर

सम्मेलन में गढ़चिरौली, अल्लूरी सीताराम राजू, बांका, किश्तवाड़, कोरबा और फाजिल्का सहित विभिन्न जिलों में किए गए कृषि संबंधी प्रयासों और नवाचारों के उदाहरण साझा किए गए। इन अनुभवों के माध्यम से यह समझने पर जोर दिया गया कि स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार तैयार की गई योजनाएं किसानों के लिए किस तरह उपयोगी साबित हो सकती हैं। शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों से कहा कि वे अपने जिलों की जरूरतों के अनुरूप व्यावहारिक योजनाएं बनाएं और उनके क्रियान्वयन की नियमित निगरानी करें। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत जिला स्तर पर कृषि विकास को गति देना, विभागीय समन्वय मजबूत करना और किसानों की आय बढ़ाने के लिए प्रभावी कदम उठाना रहा। 

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