छोटे किसानों के लिए उपयोगी कृषि यंत्र बनाएं- श्री तोमर

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25 सितंबर 2020, नई दिल्ली । छोटे किसानों के लिए उपयोगी कृषि यंत्र बनाएं- श्री तोमर – ‘सेंट्रलाइज्‍ड फार्म मशीनरी परफार्मेंस टेस्‍टिंग पोर्टल’ का शुभारंभ केंद्रीय कृषि, ग्रामीण विकास, तथा खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने किया। इस अवसर पर श्री तोमर ने कहा कि इससे फार्म मशीनरी प्रशिक्षण एवं परीक्षण संस्‍थानों (एफएमटीटीआई) के कामकाज में पारदर्शिता आएगी तथा मानीटरिंग सिस्टम सुदृढ़ होगा। श्री तोमर ने कहा कि भारत सरकार का ध्यान छोटे किसानों के उत्थान पर है, छोटे किसान बड़े यंत्र नहीं खरीद पाते है, इसलिए छोटे किसानों के लिए छोटे कृषि यंत्र बनाए जाएं, ताकि वे खेती में इन्हें उपयोग कर ज्यादा मुनाफा कमा सकें, इंडस्ट्री इस पर शोध करें।

महत्वपूर्ण खबर : कृषि में जल का जलवा

श्री तोमर ने कहा कि एफएमटीटीआई की जवाबदेही व सक्षमता बढ़ाने की दिशा में पोर्टल की शुरूआत की गई है। कृषि यंत्रीकरण से खेती करना सरल हुआ व उत्पादन बढ़ा है। सरकार का जोर पारंपरिक के बजाय आधुनिक खेती करने पर है। उन्होंने प्रमाणीकरण की समय-सीमा कम करने पर भी बल दिया। इंडस्ट्रीज को भी नए दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है। श्री तोमर ने कहा कि मशीनों के माध्यम से खेती करने से समय बचेगा, फसलों का विविधीकरण होगा तथा किसानों का मुनाफा बढ़ेगा। कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्‍याण राज्‍य मंत्री श्री परषोत्‍तम रूपाला और श्री कैलाश चौधरी तथा सचिव श्री संजय अग्रवाल भी प्रमुख रूप से शामिल हुए।

35 परीक्षण केंद्र मान्य

 बुदनी (म.प्र.), हिसार (हरियाणा), अनंतपुर (आंध्र प्रदेश) व बिस्‍वनाथ चरियाली (असम) के एफएमटीटीआई महत्‍वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। बुदनी व हिसार संस्‍थानों को ट्रैक्‍टरों एवं स्‍वचालित मशीनों की जांच के लिए मान्‍यता दी गई है। वर्ष 2010 से कृषि मशीनरी निर्माताओं के लिए, यंत्रों के परीक्षण की बढ़ती मांग को देखते हुए, कृषि मंत्रालय ने राज्य कृषि विश्वविद्यालयों, आईसीएआर संस्थानों, केंद्रीय विश्वविद्यालयों, आईआईटी व राज्य कृषि विभागों के 35 परीक्षण केंद्रों को मान्यता दी हैं।

पोर्टल के लाभ- पोर्टल से निर्माताओं, एफएमटीटीआई व कृषि मंत्रालय  को कई लाभ होंगे। सरकार की “ईज ऑफ डूइंग” नीति की तर्ज पर यह ऑनलाइन मशीनरी के परीक्षण हेतु एप्‍लाई करने हेतु सुविधा प्रदान करेगा।  फीडबैक तेजी से मिलेंगे। परीक्षण समय में कमी आएगी। कृषि निर्माताओं के व्यापार खर्चे में कमी आएगी।  मंत्रालय के अधिकारी व निर्माता इंटरनेट द्वारा किसी भी स्‍थान से परीक्षण गतिविधियों को मॉनीटर कर सकते हैं।

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