राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

शहद उत्पादन में बड़ी छलांग, 2014-15 के 80,530 टन से बढ़कर 2025-26 में 1.51 लाख टन हुआ उत्पादन

11 अगस्त 2026, नई दिल्ली: शहद उत्पादन में बड़ी छलांग, 2014-15 के 80,530 टन से बढ़कर 2025-26 में 1.51 लाख टन हुआ उत्पादन – देश में मधुमक्खी पालन और शहद उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने संसद में एक सवाल के लिखित जवाब में बताया कि देश में शहद का उत्पादन वर्ष 2014-15 के 80,530 मीट्रिक टन से बढ़कर वर्ष 2025-26 में 1,51,690 मीट्रिक टन हो गया है। सरकार वैज्ञानिक मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने के साथ शहद की गुणवत्ता, प्रसंस्करण, भंडारण और विपणन व्यवस्था को मजबूत करने पर भी जोर दे रही है।

राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन एवं शहद मिशन के तहत हो रहा काम

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड (NBB) के माध्यम से केंद्रीय क्षेत्र की योजना राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन एवं शहद मिशन (NBHM) को लागू कर रहा है। इस मिशन का उद्देश्य मधुमक्खी पालन उद्योग का समग्र विकास करना और वैज्ञानिक तरीके से मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देना है।

योजना के तहत शहद और अन्य मधुमक्खी उत्पादों का उत्पादन बढ़ाने, आय एवं रोजगार के अवसर पैदा करने, कृषि और गैर-कृषि परिवारों को आजीविका सहायता देने तथा मधुमक्खी पालन के माध्यम से महिलाओं के सशक्तिकरण पर भी जोर दिया जा रहा है। इसके अलावा सामूहिक दृष्टिकोण के जरिए मधुमक्खी पालकों के लिए संस्थागत ढांचा विकसित करने और कृषि एवं बागवानी उत्पादन बढ़ाने के लिए भी सहायता दी जा रही है।

एकीकृत मधुमक्खी पालन केंद्र और लैब स्थापित

राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन एवं शहद मिशन के तहत विभिन्न गतिविधियों के लिए पात्र कार्यान्वयन एजेंसियों को परियोजना आधारित वित्तीय सहायता दी जाती है। इसमें एकीकृत मधुमक्खी पालन विकास केंद्र, शहद परीक्षण प्रयोगशालाएं, मधुमक्खी रोग निदान प्रयोगशालाएं और गुणवत्तापूर्ण न्यूक्लियस स्टॉक विकास केंद्र स्थापित करने जैसी गतिविधियां शामिल हैं।

सरकार के अनुसार, शहद में मिलावट की जांच और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए अब तक 7 विश्वस्तरीय शहद परीक्षण प्रयोगशालाएं और 66 मिनी शहद परीक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित की जा चुकी हैं। इसके साथ ही 83 शहद प्रसंस्करण इकाइयां तथा 90 शहद संग्रहण, ब्रांडिंग एवं पैकेजिंग इकाइयां भी स्थापित की गई हैं। इन इकाइयों से शहद के बेहतर प्रसंस्करण, सुरक्षित भंडारण और प्रभावी विपणन में मदद मिल रही है।

गुणवत्तापूर्ण रानी मधुमक्खियों के उत्पादन पर जोर

मधुमक्खी कॉलोनियों के विस्तार और गुणवत्तापूर्ण रानी मधुमक्खियों के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए भी सरकार सहायता दे रही है। अब तक 81 गुणवत्तापूर्ण न्यूक्लियस स्टॉक विकास केंद्रों को सहायता प्रदान की जा चुकी है। इन प्रयासों का उद्देश्य मधुमक्खी पालन के लिए गुणवत्तापूर्ण संसाधनों की उपलब्धता बढ़ाना और वैज्ञानिक मधुमक्खी पालन को अधिक प्रभावी बनाना है।

महिलाओं को भी मधुमक्खी पालन से जोड़ने की पहल

राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन एवं शहद मिशन में महिलाओं के सशक्तिकरण को भी विशेष महत्व दिया गया है। योजना के तहत मधुमक्खी पालन से महिलाओं को जोड़ने, उनकी क्षमता बढ़ाने और आजीविका के नए अवसर उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न गतिविधियों को सहायता दी जाती है। इसके अलावा क्षमता निर्माण, तकनीक का प्रदर्शन, विपणन, ब्रांडिंग, मूल्य संवर्धन और अनुसंधान एवं विकास जैसी गतिविधियों को भी मिशन के तहत बढ़ावा दिया जा रहा है।

मधुमक्खी पालन से कृषि उत्पादकता बढ़ाने पर जोर

सरकार के अनुसार मधुमक्खी पालन केवल शहद उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि परागण के माध्यम से कृषि और बागवानी फसलों की उत्पादकता बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसी उद्देश्य से NBHM के तहत वैज्ञानिक मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने और राज्य सरकारों, कार्यान्वयन एजेंसियों तथा अन्य हितधारक संगठनों के प्रयासों को सहायता दी जा रही है।

सरकार की इन पहलों के बीच देश में शहद उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2014-15 में 80,530 मीट्रिक टन शहद का उत्पादन हुआ था, जो 2025-26 में बढ़कर 1,51,690 मीट्रिक टन हो गया। यानी करीब 11 वर्षों में उत्पादन लगभग दोगुना हो गया है।

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