Jaipur Agri Conference: खेत से बाजार तक कृषि का नया मॉडल तैयार, शिवराज सिंह ने बताया आगे का पूरा प्लान
08 अप्रैल 2026, नई दिल्ली: Jaipur Agri Conference: खेत से बाजार तक कृषि का नया मॉडल तैयार, शिवराज सिंह ने बताया आगे का पूरा प्लान – जयपुर में आयोजित रीजनल एग्रीकल्चर कॉन्फ्रेंस में केंद्र सरकार ने खेती को लेकर एक बड़ा विजन सामने रखा। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अब देशभर में खेती को एक समान तरीके से नहीं बल्कि अलग-अलग क्षेत्रों की जरूरत के हिसाब से विकसित किया जाएगा। इसके लिए देश को एग्रो–क्लाइमेटिक जोनों में बांटकर हर राज्य के लिए अलग कृषि रोडमैप तैयार किया जाएगा, ताकि किसान अपनी जमीन, मौसम और संसाधनों के अनुसार सही फसल और तकनीक अपना सकें।
उन्होंने बताया कि यह पहली बार है जब इस तरह की रीजनल कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई है, जिसमें वैज्ञानिकों, कृषि विशेषज्ञों, प्रगतिशील किसानों और विभिन्न संस्थाओं को एक मंच पर लाया गया। पहले केवल राष्ट्रीय स्तर पर बैठक होती थी, लेकिन अब क्षेत्रीय स्तर पर गहराई से चर्चा कर खेती की समस्याओं और समाधान पर काम किया जाएगा।
कृषि मंत्री ने साफ किया कि सरकार का फोकस अब “खेत से बाजार” तक पूरी व्यवस्था को मजबूत करने पर है, जिससे किसानों को उत्पादन से लेकर बिक्री तक बेहतर सुविधा और उचित दाम मिल सके।
फार्मर ID से बदलेगी पूरी व्यवस्था
सरकार सभी किसानों को फार्मर आईडी से जोड़ने पर तेजी से काम कर रही है। इस आईडी के जरिए खाद, बीज, फसल बीमा और मुआवजा सीधे और पारदर्शी तरीके से किसानों तक पहुंचेगा। इससे न सिर्फ लाइन और भ्रष्टाचार खत्म होगा बल्कि सही किसान तक सही लाभ भी पहुंचेगा। टेनेंट और बटाईदार किसान भी इस सिस्टम से जुड़ सकेंगे।
जोन आधारित खेती का नया मॉडल
देश को अलग-अलग एग्रो–क्लाइमेटिक जोनों में बांटकर हर इलाके के लिए अलग फसल, बीज और खेती की तकनीक तय की जाएगी। इससे उत्पादन बढ़ेगा और जोखिम कम होगा। सरकार का मानना है कि “वन मॉडल” की जगह “रीजनल मॉडल” खेती के लिए ज्यादा असरदार होगा।
तिलहन में आत्मनिर्भरता का लक्ष्य
राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन के तहत तिलहन उत्पादन को तेजी से बढ़ाने की योजना है। सरकार का लक्ष्य क्षेत्र को 29 मिलियन हेक्टेयर से बढ़ाकर 33 मिलियन हेक्टेयर करना और उत्पादन को लगभग 70 मिलियन टन तक ले जाना है। इसके लिए बीज, तकनीक और प्रोसेसिंग पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
दलहन मिशन: बीज से बाजार तक फोकस
दलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए बीज उत्पादन, नई किस्मों का विकास और दाल मिलों की स्थापना पर काम हो रहा है। किसानों को बीज उत्पादन के लिए आर्थिक सहायता दी जाएगी और उनकी उपज की 100% खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर करने का प्रावधान रखा गया है।
प्रोसेसिंग और वैल्यू चेन पर जोर
सरकार उत्पादन के साथ-साथ प्रोसेसिंग और मार्केटिंग को भी मजबूत कर रही है। इसके तहत तेल मिलों और दाल मिलों का नेटवर्क तैयार किया जा रहा है, ताकि किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिल सके।
इंटीग्रेटेड और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा
छोटी जोत वाले किसानों की आय बढ़ाने के लिए इंटीग्रेटेड फार्मिंग मॉडल को बढ़ावा दिया जाएगा, जिसमें फसल के साथ पशुपालन, मधुमक्खी पालन, मछली पालन जैसी गतिविधियां शामिल होंगी। साथ ही प्राकृतिक खेती और ऑर्गेनिक उत्पादों को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।
नकली खाद और कीटनाशकों पर सख्ती
सरकार नकली खाद और कीटनाशकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी कर रही है। इसके लिए ट्रैकिंग सिस्टम और कड़े कानून लाने की दिशा में काम किया जा रहा है, ताकि किसानों को सही गुणवत्ता के इनपुट मिल सकें।
फसल नुकसान का वैज्ञानिक आकलन
फसल खराब होने की स्थिति में अब सैटेलाइट और रिमोट सेंसिंग तकनीक का इस्तेमाल कर नुकसान का आकलन किया जाएगा। इससे किसानों को जल्दी और सही मुआवजा मिल सकेगा।
APT (आलू–प्याज–टमाटर) के लिए खास योजना
आलू, प्याज और टमाटर जैसी फसलों में कीमत गिरने पर किसानों को नुकसान से बचाने के लिए सरकार सीधे खरीद और सप्लाई सिस्टम तैयार करेगी। ट्रांसपोर्ट और स्टोरेज का खर्च भी सरकार उठाएगी।
राज्यों को लचीली फंडिंग
केंद्र सरकार राज्यों को उनकी जरूरत के अनुसार फंड देगी। जहां सिंचाई की जरूरत होगी वहां उसी पर खर्च होगा और जहां मशीनरी या प्रोसेसिंग की जरूरत होगी, वहां उस पर फोकस किया जाएगा।
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