राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

भारत में ग्रीष्मकालीन धान का रकबा 2.47 लाख हेक्टेयर घटा, कुल बोआई क्षेत्र में हल्की बढ़त

07 अप्रैल 2026, नई दिल्ली: भारत में ग्रीष्मकालीन धान का रकबा 2.47 लाख हेक्टेयर घटा, कुल बोआई क्षेत्र में हल्की बढ़त – भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी ताज़ा आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2026 के ग्रीष्मकालीन फसल सीजन में मिश्रित रुझान देखने को मिला है। कुल ग्रीष्मकालीन फसलों के अंतर्गत बोया गया क्षेत्र जहां थोड़ा बढ़ा है, वहीं धान के रकबे में पिछले वर्ष की तुलना में गिरावट दर्ज की गई है, जो देश में बदलते फसल पैटर्न की ओर संकेत करता है।

3 अप्रैल 2026 तक ग्रीष्मकालीन फसलों का कुल बोआई क्षेत्र 58.29 लाख हेक्टेयर रहा, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 57.80 लाख हेक्टेयर था। इस प्रकार कुल क्षेत्र में 0.48 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, यह वृद्धि धान की बजाय अन्य फसलों जैसे दलहन, मोटे अनाज और तिलहन के कारण हुई है।

धान के क्षेत्र में वर्ष-दर-वर्ष गिरावट

वर्ष 2026 में ग्रीष्मकालीन धान का रकबा 30.12 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 32.59 लाख हेक्टेयर से कम है। इस प्रकार धान के क्षेत्र में 2.47 लाख हेक्टेयर की गिरावट दर्ज की गई है।

पिछले वर्ष 2025 में ग्रीष्मकालीन धान का अंतिम क्षेत्र 33.28 लाख हेक्टेयर रहा था, जो सामान्य क्षेत्र 31.49 लाख हेक्टेयर से अधिक था। इसके मुकाबले इस वर्ष बोआई की गति धीमी दिखाई दे रही है। यह बदलाव पानी की उपलब्धता, लागत में वृद्धि और किसानों द्वारा अधिक लाभकारी विकल्पों की ओर रुझान के कारण हो सकता है।

हालांकि ग्रीष्मकालीन धान का हिस्सा खरीफ की तुलना में कम होता है, फिर भी यह कई राज्यों में आपूर्ति संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

ग्रीष्मकालीन फसलों के अंतर्गत क्षेत्र कवरेज की प्रगति (दिनांक 03.04.2026 तक) – क्षेत्र लाख हेक्टेयर में

क्रमांकफसलसामान्य क्षेत्रवर्ष 2025 का अंतिम क्षेत्रवर्ष 2026 (वर्तमान)पिछले वर्ष समान अवधिवृद्धि/कमी
1धान31.4933.2830.1232.59-2.47
2दलहन23.4027.078.797.021.77
मूंग20.4423.496.094.911.18
उड़द2.963.582.421.930.49
अन्य दलहन0.000.280.170.11
3श्री अन्न एवं मोटे अनाज12.0814.0611.6410.770.87
ज्वार0.340.360.320.41-0.10
बाजरा4.435.203.913.150.76
रागी0.310.210.160.05
छोटे अनाज0.020.030.030.00
मक्का6.988.507.187.010.17
4तिलहन8.409.517.747.420.31
मूंगफली3.404.204.594.200.39
सूरजमुखी0.340.350.380.360.03
तिल4.664.962.712.80-0.09
अन्य तिलहन0.000.050.06-0.01
कुल75.3783.9258.2957.800.48

सामान्य क्षेत्र वर्ष 2022-23 से 2024-25 के औसत पर आधारित है।

दलहन और मोटे अनाज ने धान की कमी को संतुलित किया

धान के क्षेत्र में आई गिरावट को दलहन और मोटे अनाजों की बढ़ती खेती ने काफी हद तक संतुलित किया है। वर्ष 2026 में दलहन का कुल क्षेत्र 8.79 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष के 7.02 लाख हेक्टेयर से 1.77 लाख हेक्टेयर अधिक है।

मोटे अनाज और श्री अन्न का क्षेत्र भी बढ़कर 11.64 लाख हेक्टेयर हो गया है, जो पिछले वर्ष 10.77 लाख हेक्टेयर था। बाजरा और मक्का ने इस वृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

तिलहन फसलों में भी हल्की वृद्धि दर्ज की गई है, जिसमें मूंगफली प्रमुख फसल रही है।

मूंग और मक्का बने ग्रीष्मकालीन खेती के प्रमुख विकल्प

ग्रीष्मकालीन सीजन में मूंग (ग्रीन ग्राम) एक प्रमुख फसल के रूप में उभरकर सामने आई है। वर्ष 2026 में इसका क्षेत्र 6.09 लाख हेक्टेयर हो गया है, जो पिछले वर्ष 4.91 लाख हेक्टेयर था। यानी 1.18 लाख हेक्टेयर की वृद्धि दर्ज की गई है।

मूंग की कम अवधि, कम पानी की आवश्यकता और मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने की क्षमता इसे किसानों के लिए आकर्षक विकल्प बनाती है।

मक्का का क्षेत्र भी बढ़कर 7.18 लाख हेक्टेयर हो गया है, जो पिछले वर्ष 7.01 लाख हेक्टेयर था। पशु आहार, स्टार्च और एथेनॉल उद्योगों में बढ़ती मांग के कारण मक्का की खेती में लगातार वृद्धि हो रही है। साथ ही यह फसल विभिन्न जलवायु परिस्थितियों में आसानी से उगाई जा सकती है और किसानों को स्थिर आय प्रदान करती है।

कुल मिलाकर, ग्रीष्मकालीन फसलों में मूंग और मक्का का बढ़ता रकबा यह दर्शाता है कि किसान अब ऐसी फसलों की ओर बढ़ रहे हैं जो कम संसाधनों में बेहतर लाभ और स्थिर उत्पादन दे सकें।

आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture