ICAR की राष्ट्रीय सलाहकार बोर्ड की बैठक: फसल, पशु और मछली आनुवंशिक संसाधनों के संरक्षण पर जोर
31 जुलाई 2026, नई दिल्ली: ICAR की राष्ट्रीय सलाहकार बोर्ड की बैठक: फसल, पशु और मछली आनुवंशिक संसाधनों के संरक्षण पर जोर – देश की खाद्य, पोषण, पर्यावरण और आजीविका सुरक्षा को मजबूत बनाने के उद्देश्य से भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के नवगठित आनुवंशिक संसाधनों के प्रबंधन पर राष्ट्रीय सलाहकार बोर्ड (NABMGR) की पहली बैठक 29 जुलाई को नई दिल्ली स्थित आईसीएआर-राष्ट्रीय पादप आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो (NBPGR) में आयोजित की गई। बैठक में फसल, पशु, मछली, सूक्ष्मजीव और कीट आनुवंशिक संसाधनों के संरक्षण, उनके सतत उपयोग और जलवायु परिवर्तन के अनुरूप कृषि को मजबूत बनाने के लिए कई अहम रणनीतियों पर चर्चा हुई।
कृषि जैव विविधता को बताया राष्ट्रीय संपत्ति
बैठक की अध्यक्षता पद्म भूषण डॉ. आर.एस. परोदा ने की, जबकि कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (DARE) के सचिव और ICAR के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट सह-अध्यक्ष रहे। डॉ. परोदा ने कहा कि भारत की कृषि जैव विविधता देश की सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक संपत्तियों में से एक है, जो खाद्य एवं पोषण सुरक्षा, जलवायु अनुकूल कृषि और सतत विकास की आधारशिला है। उन्होंने जर्मप्लाज्म के संरक्षण के साथ-साथ उसके अधिक उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि इससे जलवायु-अनुकूल और अधिक उत्पादक फसल किस्मों तथा पशु नस्लों के विकास को गति मिलेगी।
कृषि अनुसंधान और डिजिटल तकनीक के समन्वय पर जोर
डॉ. एम.एल. जाट ने कहा कि आनुवंशिक संसाधनों के प्रभावी प्रबंधन को मृदा विज्ञान, डिजिटल कृषि और आधुनिक फसल सुधार तकनीकों के साथ जोड़ना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग कृषि-जलवायु क्षेत्रों के अनुसार उपयुक्त फसल किस्मों की पहचान कर किसानों को बेहतर उत्पादन और जलवायु जोखिम से सुरक्षा प्रदान की जा सकती है। उन्होंने विश्वास जताया कि पुनर्गठित राष्ट्रीय सलाहकार बोर्ड विभिन्न मंत्रालयों और संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करेगा।
2026-2031 के लिए तैयार हुआ रोडमैप
बैठक में आनुवंशिक संसाधनों के संरक्षण और उपयोग के लिए वर्ष 2026-2031 का रोडमैप प्रस्तुत किया गया। छह राष्ट्रीय ब्यूरो के निदेशकों ने 2021-2026 के दौरान हुई उपलब्धियों की जानकारी दी और आने वाले वर्षों की योजनाएं साझा कीं। इनमें फसल सुधार कार्यक्रमों को मजबूत करना, अनछुए क्षेत्रों से व्यवस्थित जर्मप्लाज्म संग्रह, पारंपरिक और कम उपयोग वाली फसलों, पशु नस्लों, मछली प्रजातियों, सूक्ष्मजीवों और कीटों को मुख्यधारा में लाने जैसी पहलें शामिल हैं।
राष्ट्रीय सुरक्षा जीन बैंक पर भी हुई चर्चा
बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा जीन बैंक की स्थापना की प्रगति की समीक्षा की गई। डॉ. परोदा ने सुझाव दिया कि इस परियोजना को समय पर पूरा किया जाए, ताकि वर्ष 2028-29 में ICAR के शताब्दी वर्ष के अवसर पर इसे राष्ट्र को समर्पित किया जा सके। साथ ही कृषि जैव विविधता से जुड़े मामलों में संस्थागत समन्वय बढ़ाने और जैव विविधता अधिनियम के तहत जिम्मेदारियों के बेहतर क्रियान्वयन पर भी चर्चा हुई।
किसानों और कृषि क्षेत्र को मिलेगा लाभ
बोर्ड ने पूर्व-प्रजनन कार्यक्रमों को मजबूत करने, संरक्षित जर्मप्लाज्म के अधिक उपयोग, अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने तथा किसानों और प्रजनकों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए उपयुक्त कानूनी व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि इन पहलों से कृषि जैव विविधता का संरक्षण मजबूत होगा, जलवायु परिवर्तन से निपटने की क्षमता बढ़ेगी, किसानों को बेहतर किस्में और तकनीकें उपलब्ध होंगी तथा देश की खाद्य सुरक्षा और सतत कृषि विकास को नई मजबूती मिलेगी।
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