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राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

मानसून को लेकर पहला पूर्वानुमान जारी, क्या रहेगी इस वर्ष स्थिति

16 अप्रैल 2026, नई दिल्ली: मानसून को लेकर पहला पूर्वानुमान जारी, क्या रहेगी इस वर्ष स्थिति – भारतीय मौसम विज्ञान विभाग  ने वर्ष 2026 के दक्षिण-पश्चिम मानसून को लेकर अपना पहला विस्तृत पूर्वानुमान जारी कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, जून से सितंबर के दौरान पूरे देश में मौसमी वर्षा सामान्य से कम रहने की प्रबल संभावना है। खेती-किसानी और जल संचयन के लिहाज से यह खबर चिंताजनक हो सकती है।

मौसम विभाग के अनुसार, मात्रा के हिसाब से पूरे देश में ऋतुनिष्ठ वर्षा दीर्घावधि औसत (LPA) का 92 प्रतिशत रहने की संभावना है। इसमें मॉडल त्रुटि ± 5% मानी गई है। गौरतलब है कि 1971-2020 की अवधि के लिए देश भर में मौसमी वर्षा का LPA 87 सेंटीमीटर है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि “सामान्य से कम” (LPA का 90-95%) और “अपर्याप्त वर्षा” श्रेणियों की संभावना इस साल सबसे अधिक है। मानसून की इस सुस्त रफ्तार के पीछे सबसे बड़ा कारण प्रशांत महासागर में अल नीनो का सक्रिय होना माना जा रहा है। वर्तमान में भूमध्य प्रशांत क्षेत्र में कमजोर ला नीना की स्थिति खत्म होकर ENSO तटस्थ की ओर बढ़ रही है। ‘मानसून मिशन क्लाइमेट फोरकास्ट सिस्टम’ के संकेतों के मुताबिक, मानसून सीजन के दौरान अल नीनो विकसित होने की संभावना है, जो आमतौर पर भारतीय मानसून को कमजोर करता है। मौसम विभाग की मानें तो दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत के कुछ क्षेत्रों को छोड़कर, देश के अधिकांश हिस्सों में वर्षा सामान्य से कम रहने की प्रबल संभावना है। उत्तर और मध्य भारत के कृषि प्रधान राज्यों में इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है। जैसा की चित्र में नीले, हरे और पीले रंगों से दर्शाया गया है। जम्मू कश्मीर, लद्दाख, पूर्वोत्तर भारतीय राज्यों, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों को छोड़ दिया जाए तो देश के शेष हिस्सों में सामान्य या सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है।

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