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राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

किसानों को अब नहीं भटकना पड़ेगा, कृषि और ग्रामीण विकास मंत्रालय में बनेगी अलग शिकायत निवारण टीम : शिवराज सिंह चौहान

23 मई 2026, नई दिल्ली: किसानों को अब नहीं भटकना पड़ेगा, कृषि और ग्रामीण विकास मंत्रालय में बनेगी अलग शिकायत निवारण टीम : शिवराज सिंह चौहान – प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी द्वारा मंत्रिपरिषद की बैठक में दिए गए दिशा-निर्देशों के बाद केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को अपने दोनों मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों की उच्चस्तरीय बैठक लेकर स्पष्ट संदेश दिया कि सरकार का काम केवल फाइलों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसका असर सीधे जनता के जीवन में दिखाई देना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसान, गरीब, ग्रामीण और आम नागरिक को योजनाओं का लाभ पाने या शिकायतों के समाधान के लिए भटकना न पड़े, इसके लिए जवाबदेह, समयबद्ध और प्रभावी व्यवस्था बनाई जाएगी।

बैठक में श्री चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ कहा है कि आम आदमी को योजनाओं के लिए दर-दर भटकना न पड़े और उसे समय पर राहत मिले। इसी को प्राथमिकता देते हुए उन्होंने कृषि, ग्रामीण विकास, भूमि संसाधन और आईसीएआर समेत सभी संबंधित विभागों में शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान में अलग-अलग योजनाओं के लिए अलग पोर्टल और व्यवस्थाएं हैं, लेकिन अब इन्हें अधिक प्रभावी और परिणाममुखी बनाना जरूरी है।

इसी दिशा में कृषि और ग्रामीण विकास मंत्रालय में कम से कम 10-10 अधिकारियों की अलग टीम गठित करने के निर्देश दिए गए हैं। ये टीमें प्रतिदिन शिकायतों, जनप्रतिनिधियों के पत्रों, विभिन्न पोर्टलों पर आई समस्याओं और आम नागरिकों की परेशानियों की समीक्षा करेंगी। केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि केवल कागजों में शिकायत “निपटाना” पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि यह सुनिश्चित किया जाएगा कि लाभार्थी को वास्तविक राहत मिली या नहीं।

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केवल कागजी निपटारा नहीं, जमीन पर दिखना चाहिए असर

श्री चौहान ने कहा कि कई बार रिकॉर्ड में योजना का लाभ दिया हुआ दिखता है, लेकिन वास्तविकता में लाभार्थी तक मदद नहीं पहुंचती। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि लाभार्थियों को फोन कर सत्यापन करने पर कई मामलों में कागज और जमीनी हकीकत में अंतर सामने आया। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि शिकायतों की प्रकृति, क्षेत्रवार समस्याओं और योजनाओं में आने वाली बाधाओं की पहचान कर व्यवस्था में जरूरी बदलाव किए जाएं।

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उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि शिकायत निवारण तंत्र की हर महीने समीक्षा की जाएगी। महीने के पहले सोमवार को इसकी समीक्षा होगी, जबकि जून में खरीफ सीजन की व्यस्तता को देखते हुए दूसरे सोमवार को विस्तृत बैठक आयोजित की जाएगी।

एक सप्ताह में मांगी सुधार योग्य नियमों की सूची

केंद्रीय मंत्री ने प्रक्रियाओं के सरलीकरण पर जोर देते हुए कहा कि पुराने और जटिल नियमों को खत्म करना समय की जरूरत है। उन्होंने अधिकारियों से पूछा कि हर काम के लिए लाइसेंस की आवश्यकता क्यों हो, कई जगह आसान पंजीकरण व्यवस्था से भी काम किया जा सकता है। उन्होंने निर्देश दिए कि एक सप्ताह के भीतर ऐसे नियमों और प्रक्रियाओं की पहचान की जाए जो योजनाओं के क्रियान्वयन में बाधा बन रही हैं।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना, सड़क निर्माण, कृषि योजनाएं, बागवानी, बीमा और विपणन जैसी योजनाओं में जहां कहीं लाभार्थियों को बेवजह चक्कर काटने पड़ रहे हैं, वहां तंत्र और प्रक्रियाओं को सरल बनाना होगा।

कृषि और ग्रामीण विकास में बढ़ेगा AI और टेक्नोलॉजी का उपयोग

बैठक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल प्लेटफॉर्म और डेटा आधारित मॉनिटरिंग के उपयोग पर भी विशेष चर्चा हुई। श्री चौहान ने कहा कि कृषि, ग्रामीण विकास, भूमि संसाधन और आईसीएआर समेत सभी विभागों में डेटा शेयरिंग और इंटर-डिपार्टमेंटल समन्वय को मजबूत किया जाएगा। इसके लिए अलग टीम बनाकर अध्ययन करने और उपयोगी प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।

उन्होंने कहा कि डिजिटल गवर्नेंस के माध्यम से पारदर्शिता और दक्षता दोनों बढ़ाई जा सकती हैं। बैठक में यह भी बताया गया कि विभिन्न शिकायत पोर्टलों और डेटाबेस को जोड़ने की दिशा में काम चल रहा है, ताकि समेकित शिकायत प्रणाली तैयार की जा सके।

प्रशासनिक कार्यसंस्कृति में बदलाव पर जोर

शिवराज सिंह चौहान ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली में बदलाव की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि कई बार फाइलें नीचे के स्तर पर ही उलझ जाती हैं, इसलिए केवल उच्च स्तर पर नहीं बल्कि नीचे से फाइल तैयार करने, नोटिंग और ड्राफ्टिंग की गुणवत्ता सुधारने की जरूरत है।

उन्होंने अधिकारियों को बेहतर ड्राफ्टिंग और नीति-संगत नोट्स तैयार करने के लिए प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रम शुरू करने के निर्देश दिए। उनका कहना था कि इससे फाइलें अनावश्यक रूप से नहीं अटकेंगी और निर्णय प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनेगी।

कोर्ट केसों में मजबूत होगा सरकारी पक्ष

बैठक में लंबित न्यायालयीन मामलों पर भी चिंता जताई गई। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कई मामलों में सरकार इसलिए कमजोर पड़ जाती है क्योंकि अदालत में सरकारी पक्ष प्रभावी ढंग से प्रस्तुत नहीं हो पाता। उन्होंने विभागों को लंबित मामलों की समीक्षा करने, नोडल अधिकारी नियुक्त करने और जरूरत पड़ने पर बेहतर वकीलों की व्यवस्था करने के निर्देश दिए।

‘रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म’ के साथ ‘इन्फॉर्म’ पर भी जोर

श्री चौहान ने कहा कि योजनाओं और सुधारों की जानकारी जनता तक पहुंचाना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने किसान संगठनों, मजदूरों, सरपंचों और जनप्रतिनिधियों के साथ संवाद बढ़ाने पर जोर दिया। साथ ही सोशल मीडिया, वीडियो, ग्राफिक्स और रील्स जैसे रचनात्मक माध्यमों से योजनाओं का प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि जो सुधार पहले ही किए जा चुके हैं, उनका “रिफॉर्म उत्सव” की तरह प्रचार होना चाहिए ताकि लोगों को यह पता चल सके कि सरकार ने क्या बदलाव किए हैं और उनसे क्या लाभ मिलेगा।

विकसित भारत 2047 के विजन पर होगा फोकस

बैठक में विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के अनुरूप विभागीय विजन दस्तावेज तैयार करने पर भी चर्चा हुई। श्री चौहान ने कहा कि प्रत्येक विभाग वार्षिक, छह-माही, तिमाही और साप्ताहिक कार्ययोजना तैयार करे, ताकि काम की मॉनिटरिंग और मूल्यांकन बेहतर तरीके से हो सके।

उन्होंने सरकारी भवनों में पीएम सूर्य घर योजना के तहत सोलराइजेशन बढ़ाने और राज्यों के साथ समन्वय मजबूत करने पर भी जोर दिया। साथ ही अनावश्यक विदेश यात्राओं से बचने और देश के भीतर कार्यों की गुणवत्ता सुधारने को प्राथमिकता देने की बात कही।

बैठक के अंत में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि शिकायत निवारण से लेकर टेक्नोलॉजी, सुधार, जनसंवाद और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन तक हर स्तर पर सक्रिय, जवाबदेह और परिणाममुखी कार्यशैली अपनानी होगी, ताकि सरकार का लाभ अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी ढंग से पहुंच सके

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