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राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

कृषि क्षेत्र की चुनौतियों का समाधान शिक्षा, तकनीक और ज्ञान से होगा – श्री तोमर

कृषि में उच्च शिक्षा के लिए मिश्रित शिक्षण पारिस्थितिकी तंत्र पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन

22 मार्च 2023, नई दिल्ली: कृषि क्षेत्र की चुनौतियों का समाधान शिक्षा, तकनीक और ज्ञान से होगा – श्री तोमर – केंद्रीय कृषि मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने  नई दिल्ली में कृषि में उच्च शिक्षा के लिए मिश्रित शिक्षण पारिस्थितिकी तंत्र (ब्लेंडेड लर्निंग इकोसिस्टम) पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। विश्व बैंक के सहयोग से भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) द्वारा आयोजित सम्मेलन में श्री तोमर ने मिश्रित शिक्षण मंच का शुभारंभ किया। इस मौके पर श्री तोमर ने कहा कि कृषि शिक्षा, तकनीक और ज्ञान होना बहुत जरूरी है ताकि भविष्य में कृषि से संबंधित चुनौतियों का समाधान किया जा सके।

श्री तोमर ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि अगस्त 2020 में शुरू की गई कृषि मेघ (राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान और शिक्षा प्रणाली- क्लाउड इन्फ्रास्ट्रक्चर एंड सर्विसेज) और अप्रैल 2021 में शुरू वर्चुअल क्लासरूम जैसी सुविधाओं ने महामारी के दौरान पढ़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह मंच कृषि मेघ को देशभर के कृषि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए और भी उपयोगी बनाएगा। ब्लेंडेड लर्निंग प्लेटफॉर्म के लिए कृषि मेघ के बुनियादी ढांचे को मजबूत किया गया है जिससे विद्यार्थियों को फायदा हो। तकनीक को खेतों तक पहुंचाना हमारी जिम्मेदारी है। खेती में तकनीकी मदद काफी जरूरी है जिससे कृषि क्षेत्र को सुविधाजनक बनाते हुए नई पीढ़ी को आकर्षित किया जा सके। इसके साथ ही कृषि में रोजगार के अवसर पैदा करने, लागत घटाने और उत्पादन गुणवत्ता में सुधार किया जा सके। यह सब बहुत ही नेक इरादे और समर्पण के साथ करने की जरूरत है। विकसित भारत बनाने के लक्ष्य को पूरा करने में कृषि क्षेत्र का योगदान बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि कृषि ही देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।इसके साथ ही 2047 तक खाद्य सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन से संबंधित आने वाली चुनौतियों के लिए भी तैयार रहने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि आज सभी क्षेत्रों में तेजी से विकास हो रहा है लेकिन कृषि क्षेत्र सबसे विशेष है।  सरकार ने कृषि क्षेत्र में नए आयाम जोड़े हैं। लंबे समय से चली आ रही चुनौतियों को दूर करने का प्रयास किया गया है। आज पूरे देश में फसल बीमा योजना लागू है। योजना शुरू होने के बाद से अब तक बीमा कंपनियों द्वारा किसानों को उनकी फसल के नुकसान के मुआवजे के रूप में 1.30 लाख करोड़ रुपये दिए जा चुके हैं। किसानों के लिए 20 लाख करोड़ रुपये तक अल्पकालीन ऋण उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे किसान सशक्त हो सकें।

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इस अवसर पर सचिव, डीएआरई और महानिदेशक, आईसीएआर, डॉ. हिमांशु पाठक, उप महानिदेशक (कृषि शिक्षा) और राष्ट्रीय निदेशक – राष्ट्रीय कृषि उच्च शिक्षा परियोजना, डॉ. आर.सी. अग्रवाल और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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