पूर्वी भारत की धान परती भूमि पर केंद्र की नजर, दाल आयात घटाने और मिट्टी सुधारने की तैयारी
20 मई 2026, नई दिल्ली: पूर्वी भारत की धान परती भूमि पर केंद्र की नजर, दाल आयात घटाने और मिट्टी सुधारने की तैयारी – भारत सरकार अब पूर्वी भारत की विशाल धान परती भूमि को दालों और तिलहनों के उत्पादन का नया केंद्र बनाने की तैयारी कर रही है। केंद्र सरकार क्षेत्र-विशिष्ट कृषि रणनीति के माध्यम से दाल उत्पादन बढ़ाने, तिलहन आत्मनिर्भरता, एकीकृत कृषि प्रणाली और मिट्टी के स्वास्थ्य सुधार पर विशेष जोर दे रही है।
भुवनेश्वर में आयोजित पूर्वी क्षेत्रीय खरीफ कृषि क्षेत्रीय सम्मेलन के दौरान केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पूर्वी भारत की कृषि राज्य-विशिष्ट और फसल-विशिष्ट रोडमैप के जरिए नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकती है। यह रोडमैप केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा संयुक्त रूप से तैयार किया जाएगा।
सम्मेलन में ओडिशा, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड और पश्चिम बंगाल के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसमें खाद्य सुरक्षा, फसल विविधीकरण, संतुलित उर्वरक उपयोग, प्राकृतिक खेती, एकीकृत कृषि, बागवानी विकास और कृषि अवसंरचना जैसे विषयों पर चर्चा हुई। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश की विविध कृषि-जलवायु परिस्थितियों और अलग-अलग कृषि चुनौतियों को देखते हुए क्षेत्रीय सम्मेलन अधिक प्रभावी साबित हो रहे हैं।
केंद्र सरकार ने कृषि क्षेत्र के लिए तीन प्रमुख लक्ष्य तय किए हैं — खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना, पोषण उपलब्धता बढ़ाना और किसानों की आय मजबूत करना। इन उद्देश्यों को पूरा करने के लिए सरकार छह बिंदुओं पर आधारित रणनीति लागू कर रही है, जिसमें उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाना, लागत कम करना, किसानों को लाभकारी मूल्य दिलाना, फसल नुकसान पर सहायता देना और कृषि विविधीकरण को बढ़ावा देना शामिल है।
हालांकि भारत धान और गेहूं उत्पादन में मजबूत स्थिति में पहुंच चुका है, लेकिन दालों और खाद्य तेलों में आत्मनिर्भरता अभी भी चुनौती बनी हुई है। इसी कारण केंद्र सरकार पूर्वी भारत की बड़ी धान परती भूमि को दालों और तिलहनों की खेती के लिए उपयोग करने की योजना बना रही है।
श्री चौहान ने कहा कि धान कटाई के बाद खाली रहने वाली भूमि की पहचान कर वहां उड़द, मसूर और अरहर जैसी फसलों की खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए गुणवत्तापूर्ण बीज, प्रदर्शन कार्यक्रम, किसानों को प्रोत्साहन और पीएम-आशा योजना के तहत खरीद सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
उन्होंने कहा कि फसल विविधीकरण केवल नई फसलें जोड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के लिए भी आवश्यक है। लगातार एक ही फसल उगाने से मिट्टी कमजोर होती है, जबकि दलहनी फसलें नाइट्रोजन स्थिरीकरण के माध्यम से मिट्टी की गुणवत्ता सुधारती हैं।
सम्मेलन में एकीकृत कृषि प्रणाली को किसानों की आय बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम बताया गया। सरकार ऐसे मॉडल को बढ़ावा दे रही है जिसमें अनाज उत्पादन के साथ बागवानी, सब्जी उत्पादन, पशुपालन, मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन और कृषि वानिकी को जोड़ा जाए, ताकि किसानों को आय के कई स्रोत मिल सकें। श्री चौहान ने कहा कि पूर्वी भारत में एकीकृत कृषि की अपार संभावनाएं हैं।
स्थानीय स्तर पर मूल्य संवर्धन बढ़ाने के लिए सरकार ने दाल मिल और तेल मिल स्थापना पर सब्सिडी देने की भी घोषणा की है। इसका उद्देश्य उत्पादन के साथ-साथ प्रसंस्करण क्षमता बढ़ाना है।
संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार 1 जून से 15 जून तक देशव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान’ चलाएगी। इस अभियान के तहत किसानों को मिट्टी परीक्षण, संतुलित उर्वरक उपयोग और मिट्टी स्वास्थ्य के बारे में जागरूक किया जाएगा। सरकार ने कहा कि बिना वैज्ञानिक जानकारी के अत्यधिक उर्वरक उपयोग से लागत बढ़ती है और मिट्टी, फसल तथा मानव स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
श्री चौहान ने किसान आईडी को कृषि क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाने वाली पहल बताया। इस डिजिटल पहचान प्रणाली में किसान की भूमि, फसल और परिवार से जुड़ी जानकारी एकीकृत होगी। इससे कृषि ऋण, डीबीटी हस्तांतरण, उर्वरक वितरण और सरकारी योजनाओं के लाभ वितरण में पारदर्शिता बढ़ेगी।
उन्होंने कहा कि नकली कीटनाशकों और घटिया बीजों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए सरकार नया कीटनाशक कानून और नया बीज कानून लाने की तैयारी कर रही है। इन कानूनों में दोषियों के खिलाफ कड़े दंड का प्रावधान होगा।
पूर्वी भारत में बागवानी क्षेत्र की संभावनाओं का उल्लेख करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मिट्टी, जलवायु और स्थानीय संसाधनों के आधार पर फसलवार और राज्यवार कृषि रोडमैप तैयार किए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि कोल्ड स्टोरेज और कोल्ड-चेन अवसंरचना को मजबूत करने के लिए एमआईडीएच, एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड और पीएम किसान संपदा योजना के तहत प्रयास किए जा रहे हैं।
श्री चौहान ने कहा कि कृषि वैज्ञानिकों, कृषि विश्वविद्यालयों, कृषि विज्ञान केंद्रों और राज्य सरकारों के समन्वय से नई तकनीकों, अनुसंधान और वैज्ञानिक जानकारी को किसानों तक प्रभावी तरीके से पहुंचाया जाएगा।
आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़, व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture

