राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

मध्यप्रदेश के चार जिलों के लिए कृषि रोडमैप तैयार, देश में कृषि परिवर्तन का मॉडल बनेंगे: शिवराज सिंह चौहान

06 जून 2026, नई दिल्ली: मध्यप्रदेश के चार जिलों के लिए कृषि रोडमैप तैयार, देश में कृषि परिवर्तन का मॉडल बनेंगे: शिवराज सिंह चौहान –  केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मध्यप्रदेश के रायसेन, विदिशा, सीहोर और देवास जिलों के लिए तैयार विशेष कृषि रोडमैप को देश में कृषि परिवर्तन का मॉडल बनाने की दिशा में बड़ा कदम बताया है। दिल्ली में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में उन्होंने कहा कि यह रोडमैप केवल एक सरकारी दस्तावेज नहीं, बल्कि किसान की आय बढ़ाने, जल संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य सुधारने, वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देने और विभिन्न योजनाओं के प्रभावी अभिसरण पर आधारित एक जवाबदेह मिशन है। बैठक में मध्यप्रदेश के कृषि मंत्री एंदल सिंह कंसाना सहित केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

किसान आय होगी सफलता का सबसे बड़ा पैमाना
बैठक में शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट किया कि कृषि रोडमैप की सफलता का सबसे महत्वपूर्ण आधार किसानों की शुद्ध आय होगी। उन्होंने कहा कि चारों जिलों में वर्तमान किसान आय का आकलन किया जाएगा और रोडमैप लागू होने के बाद उसमें होने वाली वृद्धि के आधार पर प्रगति की समीक्षा की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह केवल औपचारिक समीक्षा प्रक्रिया नहीं, बल्कि परिणाम सुनिश्चित करने वाली जवाबदेही की व्यवस्था है। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि उन्होंने स्वयं इन जिलों का दौरा कर खेतों की स्थिति देखी है, जहां भूजल स्तर में गिरावट, मिट्टी की कमजोर होती सेहत और किसानों को अपेक्षित आय नहीं मिलना प्रमुख चुनौतियां हैं।

जल संकट, अल नीनो और वैज्ञानिक खेती पर विशेष फोकस
शिवराज सिंह चौहान ने अल नीनो और संभावित जल संकट को देखते हुए दीर्घकालिक रणनीति बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों से आगे की सोच रखते हुए ऐसे उपाय किए जाने चाहिए, जिनसे रबी फसलों पर किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। उन्होंने अल नीनो को चुनौती के साथ अवसर भी बताया और कहा कि यदि कठिन परिस्थितियों में भी किसान की फसल और आय सुरक्षित रहती है, तो वैज्ञानिक खेती और एकीकृत कृषि मॉडल पर किसानों का विश्वास और मजबूत होगा। उन्होंने राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तर पर गठित समितियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि केवल समितियों का गठन पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि जमीनी स्तर पर परिणाम भी दिखाई देने चाहिए।

योजनाओं के अभिसरण और जिला स्तर पर जवाबदेही पर जोर
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY), राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (NFSM), राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-ऑयल पाम (NMEO), मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर (MIDH) और कृषि यंत्रीकरण योजनाओं (SMAM) का लाभ किसानों तक एकीकृत रूप में पहुंचना चाहिए। उन्होंने आईसीएआर द्वारा उन्नत बीज उपलब्ध कराने, कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से प्रदर्शन प्लॉट स्थापित करने तथा आत्मा परियोजना के जरिए विस्तार गतिविधियों को गति देने के निर्देश दिए। बैठक में जिला कलेक्टरों की अध्यक्षता में गठित जिला समितियों, मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरण, सूक्ष्म सिंचाई योजनाओं की प्रगति, कृषि यंत्रों की उपलब्धता और कस्टम हायरिंग सेंटरों की कार्यशीलता की भी समीक्षा की गई।

फसल विविधीकरण और समेकित कृषि प्रणाली को मिलेगा बढ़ावा
शिवराज सिंह चौहान ने फसल विविधीकरण को रोडमैप का केंद्रीय तत्व बताते हुए जिलेवार कृषि प्रणालियों को बढ़ावा देने पर बल दिया। इसके तहत विदिशा में सोयाबीन-मक्का अंतरफसल प्रणाली, सीहोर में उच्च मूल्य वाली फसलें, रायसेन में धान-लहसुन प्रणाली तथा देवास में मक्का-लहसुन-प्याज आधारित कृषि मॉडल को प्रोत्साहित किया जाएगा। उन्होंने खरीफ 2026 से प्रत्येक जिले में कम से कम एक ब्लॉक में समेकित कृषि प्रणाली का पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने के निर्देश दिए। इसके तहत कृषि के साथ डेयरी, मत्स्य पालन और बागवानी को जोड़कर किसानों के लिए आय के बहु-स्रोत विकसित किए जाएंगे।

एफपीओ, बागवानी और किसान प्रशिक्षण पर भी रहेगा फोकस
बैठक में किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को बाजार से जोड़ने, बागवानी क्षेत्र को मजबूत करने तथा कोल्ड चेन और नर्सरी विकास के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने पर भी चर्चा हुई। शिवराज सिंह चौहान ने जल संकट और शीत श्रृंखला से जुड़ी बाधाओं को दूर करने के निर्देश दिए। उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्रों की सक्रिय भूमिका पर जोर देते हुए भारतीय मृदा विज्ञान संस्थान और केंद्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान जैसे संस्थानों की भागीदारी बढ़ाने की बात कही। साथ ही प्रत्येक ब्लॉक में कम से कम एक अग्रणी किसान तैयार करने का लक्ष्य रखा गया, जो स्थानीय स्तर पर अन्य किसानों को नई तकनीकों और कृषि नवाचारों के लिए प्रेरित कर सके।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि रायसेन के उन्नत कृषि महोत्सव में की गई घोषणा अब क्रियान्वयन के चरण में पहुंच चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में तैयार यह कृषि रोडमैप केवल चार जिलों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य में देशभर में कृषि नवाचार, जल प्रबंधन, वैज्ञानिक खेती, फसल विविधीकरण और किसान आय वृद्धि के एक सफल मॉडल के रूप में विकसित किया जा सकता है।

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