धान की खेती में खरपतवार नियंत्रण के लिए यूपीएल ने लॉन्च किया स्मार्ट खरपतवार नाशक ‘राईसबॉक्स’
09 जुलाई 2026, रायपुर: धान की खेती में खरपतवार नियंत्रण के लिए यूपीएल ने लॉन्च किया स्मार्ट खरपतवार नाशक ‘राईसबॉक्स’ – यूपीएल सस्टेनेबल एग्री सॉल्यूशंस ने धान की खेती में खरपतवार प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से ‘राईसबॉक्स’ नामक नया खरपतवार नाशक लॉन्च किया है। कंपनी के अनुसार, 10 वर्षों से अधिक के अनुसंधान एवं विकास (R&D) तथा देश के प्रमुख धान उत्पादक राज्यों में व्यापक बहु-स्थलीय परीक्षणों के बाद विकसित यह फसल उगने के शुरुआती चरण में उपयोग किया जाने वाला खरपतवार नाशक धान की फसल में घास, सेज तथा चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों पर व्यापक एवं प्रभावी नियंत्रण प्रदान करता है।
धान की खेती में वर्तमान समय में किसानों के सामने खरपतवार नियंत्रण एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। अनियमित मानसून, कृषि श्रमिकों की कमी तथा बढ़ती मजदूरी लागत के कारण किसान अब फसल उगने के बाद उपयोग किए जाने वाले खरपतवार नाशकों पर अधिक निर्भर हो रहे हैं। इसके चलते कई बार अलग-अलग उत्पादों का टैंक मिक्स तैयार करना पड़ता है, बार-बार छिड़काव करना पड़ता है या अधिक मात्रा में दवा का प्रयोग करना पड़ता है। वहीं इचिनोक्लोआ क्रस-गैली (Echinochloa crus-galli) तथा साइपेरस इरिया (Cyperus iria) और साइपेरस डिफॉर्मिस (Cyperus difformis) जैसे खरपतवारों का प्रकोप भी लगातार बढ़ रहा है।
इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए विकसित किए गए राईसबॉक्स को कंपनी ने एक व्यापक प्रभाव वाला, क्रमागत (सिस्टमिक) एवं फसल उगने के शुरुआती चरण में उपयोग किया जाने वाला खरपतवार नाशक बताया है। इसमें प्रोपानिल (Propanil) तथा पेनॉक्ससलम (Penoxsulam) दो सक्रिय तत्वों का संयोजन है, जिनका काम करने का तरीकाअलग-अलग है। यह संयोजन घास, सेज तथा अन्य प्रमुख खरपतवारों पर प्रभावी नियंत्रण प्रदान करने के साथ-साथ खरपतवार नाशक प्रतिरोध के प्रबंधन में भी सहायक माना जाता है।
कंपनी के अनुसार, राईसबॉक्स संपर्क एवं क्रमागत (Systemic) दोनों प्रकार की क्रिया करता है, जिससे खरपतवारों पर तेज एवं लंबे समय तक प्रभावी नियंत्रण प्राप्त होता है। यह धान की फसल के लिए सुरक्षित है तथा प्रारंभिक अवस्था में फसल और खरपतवार के बीच होने वाली प्रतिस्पर्धा को कम कर स्वस्थ पौध वृद्धि में सहायता करता है।
राईसबॉक्स का उपयोग रोपित धान (Transplanted Rice) तथा वेट डायरेक्ट-सीडेड राइस (Wet DSR) दोनों खेती प्रणालियों में किया जा सकता है। बेहतर परिणामों के लिए कंपनी ने इसे खरपतवार की दो से तीन पत्ती अवस्था में प्रयोग करने की सलाह दी है।
यह उत्पाद तैयार प्री-मिक्स फॉर्मूलेशन के रूप में उपलब्ध है, जिससे किसानों को टैंक मिक्स तैयार करने की आवश्यकता नहीं होती। कंपनी का कहना है कि इससे उपयोग आसान हो जाता है, खेत में कार्य की जटिलता कम होती है तथा एक ही छिड़काव में प्रभावी खरपतवार नियंत्रण प्राप्त किया जा सकता है। इससे समय और लागत दोनों की बचत के साथ फसल की उत्पादकता बढ़ाने में भी सहायता मिल सकती है।
उत्पाद के शुभारंभ के अवसर पर यूपीएल के हर्बीसाइड पोर्टफोलियो लीड बिस्वजीत बोराह ने कहा कि राईसबॉक्स को कंपनी की मजबूत अनुसंधान क्षमता और उन्नत तकनीक के आधार पर विकसित किया गया है। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य धान उत्पादक किसानों के लिए खरपतवार प्रबंधन को सरल बनाना, फसल सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा बेहतर उत्पादन में सहयोग देना है।
उन्होंने कहा कि यूपीएल किसानों की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप व्यावहारिक, कुशल और टिकाऊ कृषि समाधान विकसित करने के लिए अनुसंधान एवं प्रौद्योगिकी में निरंतर निवेश कर रही है। राईसबॉक्स को फिलहाल यूपीएल के वितरण नेटवर्क के माध्यम से छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और तमिलनाडु सहित देश के प्रमुख धान उत्पादक राज्यों में उपलब्ध कराया गया है।
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