कृषि कंपनी समाचार (Industry News)

जैन इरिगेशन ने जलगांव में 20,000 टन वार्षिक क्षमता वाले बायोचार संयंत्र का उद्घाटन किया

03 जून 2026, जलगांवजैन इरिगेशन ने जलगांव में 20,000 टन वार्षिक क्षमता वाले बायोचार संयंत्र का उद्घाटन किया – जैन इरिगेशन ने जलगांव में लगभग 20,000 टन वार्षिक क्षमता वाले बायोचार संयंत्र का उद्घाटन किया है। कंपनी ने इस परियोजना को अपने साझेदारों के सहयोग से विकसित किया है। संयंत्र में कृषि एवं फल प्रसंस्करण अवशेषों का उपयोग कर बायोचार का उत्पादन किया जाएगा, जिसका उपयोग कृषि क्षेत्र में किया जा सकेगा।

कंपनी के अनुसार यह संयंत्र प्रतिदिन 50 मीट्रिक टन से अधिक कृषि और फल प्रसंस्करण अवशेषों का प्रसंस्करण करने में सक्षम है। जलगांव स्थित यह इकाई कंपनी द्वारा नियोजित कई बायोचार परियोजनाओं में पहली है और अन्य संयंत्रों के विकास पर भी कार्य चल रहा है।

बायोचार एक कार्बन-समृद्ध पदार्थ है, जिसे कृषि अवशेषों को कम ऑक्सीजन वाले वातावरण में गर्म करके तैयार किया जाता है। इस प्रक्रिया को पायरोलिसिस कहा जाता है। कृषि अवशेषों को खुले में जलाने के बजाय बायोचार में परिवर्तित करने से कार्बन का दीर्घकालिक संग्रहण संभव होता है। इसके साथ ही इसका उपयोग मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ बढ़ाने और जल धारण क्षमता सुधारने के लिए किया जाता है।

जैन इरिगेशन का कहना है कि इस परियोजना के तहत कृषि अवशेषों को बायोचार में परिवर्तित कर किसानों के खेतों तक पहुंचाया जाएगा। कंपनी के अनुसार इससे मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार, जल उपयोग दक्षता बढ़ाने तथा कृषि अवशेषों के प्रबंधन में सहायता मिल सकती है। परियोजना से कृषि अवशेषों के संग्रहण, परिवहन और प्रसंस्करण से जुड़े रोजगार के अवसर भी विकसित होने की संभावना है।

भारत में हर वर्ष बड़ी मात्रा में कृषि अवशेष उत्पन्न होते हैं, जिनमें से एक हिस्सा खुले में जला दिया जाता है। कंपनी का मानना है कि बायोचार उत्पादन के माध्यम से इन अवशेषों का उपयोग आर्थिक गतिविधियों में किया जा सकता है। साथ ही यह पहल कार्बन क्रेडिट से जुड़ी संभावनाओं को भी बढ़ावा दे सकती है।

परियोजना की प्रमुख विशेषताओं में प्रतिदिन 50 टन से अधिक कृषि एवं फल प्रसंस्करण अवशेषों का प्रसंस्करण, लगभग 20,000 टन वार्षिक क्षमता तथा औद्योगिक स्तर पर बायोचार उत्पादन शामिल है। कंपनी का दावा है कि उसका किसान नेटवर्क 120 से अधिक देशों तक फैला हुआ है।

इस अवसर पर पुरो.अर्थ के हेड ऑफ सप्लाई अल्विन ली ने कहा कि बायोचार आधारित परियोजनाएं कार्बन डाइऑक्साइड निष्कासन के साथ-साथ मिट्टी प्रबंधन और जल संरक्षण में योगदान दे सकती हैं। उन्होंने कहा कि कृषि आधारित अर्थव्यवस्थाओं में ऐसी पहलें कृषि अवशेषों के बेहतर उपयोग का अवसर प्रदान करती हैं।

जैन इरिगेशन के प्रबंध निदेशक अनिल जैन ने कहा कि कंपनी कृषि अवशेषों को उपयोगी संसाधनों में बदलने की दिशा में कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना किसानों और कृषि मूल्य श्रृंखला से जुड़े विभिन्न हितधारकों के लिए नए अवसर सृजित करने का प्रयास है।


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