कृषि कंपनी समाचार (Industry News)

‘द इंडिया स्टोरी’ फिल्म में कीटनाशकों पर किए गए दावों पर ACFI ने जताई आपत्ति

09 जुलाई 2026, नई दिल्ली: द इंडिया स्टोरी’ फिल्म में कीटनाशकों पर किए गए दावों पर ACFI ने जताई आपत्ति – एग्रो केम फेडरेशन ऑफ इंडिया (ACFI) ने आगामी फिल्म ‘द इंडिया स्टोरी: स्लो पॉइज़न इन प्रोग्रेस’ के ट्रेलर में कीटनाशकों, भारतीय कृषि और खाद्य सुरक्षा से जुड़े दावों पर कड़ी आपत्ति जताई है। संगठन ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के अध्यक्ष को पत्र लिखकर फिल्म के वैज्ञानिक तथ्यों और दावों की गहन जांच कराने तथा किसी भी भ्रामक या अप्रमाणित सामग्री को सार्वजनिक प्रदर्शन से पहले संबोधित करने की मांग की है। फिल्म 24 जुलाई 2026 को रिलीज़ होने वाली है।

ACFI के महानिदेशक डॉ. कल्याण गोस्वामी ने कहा कि फिल्म भारत की कृषि और खाद्य प्रणाली को सनसनीखेज और भय पैदा करने वाले तरीके से प्रस्तुत करती है तथा आधुनिक कृषि पद्धतियों और सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्याओं के बीच बिना किसी वैज्ञानिक आधार के प्रत्यक्ष संबंध स्थापित करने का प्रयास करती है।

उन्होंने कहा, “फिल्म का कथानक वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित नहीं है। इस प्रकार का चित्रण न केवल भारतीय कृषि की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि किसानों की आजीविका, देश की खाद्य सुरक्षा और नियामक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।”

भारत के लगभग 85 प्रतिशत एग्रोकेमिकल उद्योग का प्रतिनिधित्व करने वाले ACFI ने कहा कि ट्रेलर में कीटनाशकों, कैंसर, मृत्यु दर और खाद्य सुरक्षा को लेकर कई ऐसे दावे किए गए हैं जिनके समर्थन में कोई वैज्ञानिक स्रोत, शोध पद्धति या संदर्भ प्रस्तुत नहीं किया गया है।

संगठन ने संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि भारत में वार्षिक कीटनाशक खपत लगभग 40,094 मीट्रिक टन है। इसका अर्थ यह नहीं है कि लोग “50,000 मीट्रिक टन कीटनाशक खा रहे हैं।” ACFI ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के अध्ययनों का उल्लेख करते हुए कहा कि परीक्षण किए गए 96.5 प्रतिशत से अधिक कृषि उत्पाद निर्धारित कीटनाशक अवशेष सीमा (MRL) के भीतर पाए गए हैं और उपभोग के लिए सुरक्षित हैं।

कैंसर से जुड़े दावों पर ACFI ने कहा कि फिल्म का ट्रेलर कृषि उत्पादों और कैंसर के बीच प्रत्यक्ष संबंध स्थापित करने का प्रयास करता है, जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के स्थापित वैज्ञानिक आकलन इस प्रकार के निष्कर्ष का समर्थन नहीं करते।

संगठन ने राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की Accidental Deaths and Suicides in India 2024 रिपोर्ट का भी उल्लेख किया। ACFI के अनुसार रिपोर्ट में 41,818 मौतें कीटनाशक विषाक्तता से संबंधित दर्ज हैं, जिनमें से केवल 7,821 मामले कीटनाशकों या कीटनाशक दवाओं के आकस्मिक सेवन से जुड़े थे। संगठन का कहना है कि इन आंकड़ों को बिना संदर्भ के प्रस्तुत करना जनता को गुमराह कर सकता है।

ACFI ने यह भी चिंता व्यक्त की कि भारतीय खाद्य पदार्थों को “स्लो पॉइज़न” बताने से देश में उपभोक्ताओं का भरोसा कमजोर हो सकता है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय कृषि उत्पादों की छवि प्रभावित हो सकती है। संगठन का कहना है कि ऐसे दावों का उपयोग विदेशी नियामक संस्थाएं, प्रतिस्पर्धी निर्यातक या अन्य हितधारक भारतीय कृषि उत्पादों की सुरक्षा पर सवाल उठाने के लिए कर सकते हैं।

संगठन ने यह भी कहा कि फिल्म भारत की मजबूत खाद्य सुरक्षा और कीटनाशक नियामक व्यवस्था की अनदेखी करती है। देश में कीटनाशकों के पंजीकरण, उपयोग, अवशेष निगरानी और खाद्य सुरक्षा की निगरानी के लिए कई सरकारी संस्थाएं कार्यरत हैं, जिन्होंने भारत को 1.4 अरब से अधिक लोगों की खाद्य आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम बनाया है।

अंत में ACFI ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है, विशेषकर तब जब विषय सार्वजनिक स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा, किसानों की आजीविका और राष्ट्रीय हितों से संबंधित हो। संगठन ने CBFC से आग्रह किया कि फिल्म को प्रमाणन देने से पहले सभी भ्रामक, अतिरंजित और वैज्ञानिक रूप से अप्रमाणित दावों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए।

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