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उद्यानिकी (Horticulture)

प्याज प्रसंस्करण: 5 से 30 लाख तक का उद्योग स्थापित करें

प्याज प्रसंस्करण की संभावनाएं

  • डॉ. विजय अग्रवाल
    उपसंचालक, उद्यानिकी (वैज्ञानिक)

18  मई 2021, भोपाल ।  5 से 30 लाख तक का उद्योग स्थापित करें – प्याज भारत में दैनिक आधार पर बड़े पैमाने पर भोजन में उपयोग की जाने वाली महत्वपूर्ण सब्जियों में से एक है। भारत 12.85 लाख हैकटर मे 232.62 लाख मीट्रिक टन (2017-18) उत्पादन के साथ चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा प्याज उगाने वाला देश है। भारत द्वारा वर्ष 2017-2018 में 15.89 लाख मीट्रिक टन प्याज का निर्यात कर रुपये 308882.23 लाख की विदेशी मुद्रा अर्जित की।

योजनाओं का लाभ उठाएं

भारतीय प्याज अपने तीखेपन के लिए प्रसिद्ध हैं और साल भर उपलब्ध रहती हैं। हालांकि, कटाई के बाद के बुनियादी ढांचे और मूल्य वृद्धि के अपर्याप्त होने के कारण आपूर्ति श्रृंखला में प्याज की एक बड़ी मात्रा खराब हो जाती है। इसलिए, विभिन्न मूल्य वर्धित उत्पादों में प्याज का प्रसंस्करण घाटे को कम कर सकता है और प्रभावी शासकीय योजनाओं जैसे खाद्य प्रसंस्करण एवं उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार की प्रधानमंत्री किसान सम्पदा योजना एवं हाल ही आत्म निर्भर भारत अभियान के तहत देश भर सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमो की स्थापना एवं उन्नयन हेतु शुरू की गयी प्रधानमंत्री सूक्ष्मय खाद्य उद्यम उन्न्यन योजना प्रसंस्करण को बढ़ावा देने हेतु मील का पत्थर साबित हो रही है । इन योजनायों के माध्यम से सूक्ष्म, लघु, मध्यम एवं वृहद स्तर के उद्योगों को स्थापित एवं उन्नयन किया जा सकता है।

मध्यप्रदेश की जलवायु एवं भूमि मे प्याज का अच्छा उत्पादन होता है। उत्पादन एवं खपत के आधार ज्यादातर वर्षो मे प्रदेश में प्याज का अधिशेष उत्पादन एवं प्रसंस्करण की संभावनाओं को ध्यान मे रखते हुए प्रदेश में सूक्ष्म स्तर की प्याज प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना की जा सकती है। प्याज प्रसंकरण एवं मूल्य संवर्धन के माध्यम से भंडारण एवं परिवहन के दौरान होने वाले नुकसान को बचाने के साथ ही उद्यमिता और रोजगार सृजन को भी बढ़ावा दिया जा सकता है। सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम योजना (पीएम-एफएमई) के तहत अपनाए गए वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ओडीओपी) परिकल्पना के अंतर्गत प्रदेश में हरदा, खंडवा, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा मे प्याज को ओडीओपी के रूप में चुना गया है। जिससे इक्छुक व्यक्तिगत अथवा समूह/ संगठन उपरोक्त योजना के अंतर्गत मौजूदा सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों के उन्नयन एवं नवीन इकाइयों की स्थापना हेतु योजना का का लाभ उठा सकते हैं। इसके अतिरिक्त प्रदेश के अन्य जिलो मे भी प्याज के मौजूदा सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों का भी योजना के अंतर्गत उन्नयन किया जा सकता है ।

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प्रसंस्करण उद्योग

प्रसंस्करण के माध्यम से प्याज के अलग – अलग मुल्य संवर्धित उत्पादों को तैयार किया जाना संभव है जैसे न्यूनतम प्रसंकृत ताजा प्याज, निर्जलीकृत प्याज के रिंगस, पाउडर, तेल, सिरका, पेस्ट, चटनी, सूप मिक्स आदि। वर्तमान मे गुजरात के भावनगर जिले के महुआ मे निर्जलित प्याज प्रसंस्करण का व्यापक कार्य होता है। प्रसंस्कृत उत्पाद, तकनीक एवं उत्पादन क्षमता के आधार पर लगभग रु. 5 लाख से लेकर 30 लाख तक का उढ्योग स्थापित किया जा सकता है।

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वर्तमान मे आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत शुरू की गई प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन (पीएम एफएमई) योजना केंद्र प्रायोजित योजना के तहत प्रसंकरण इकाइयां स्थापित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इस योजना का उद्देश्य खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के असंगठित खंड में मौजूदा व्यक्तिगत सूक्ष्म उद्यमों की प्रतिस्पर्धात्मकता को प्रोत्साहित करना और क्षेत्र के औपचारिकता को प्रोत्साहन देना और किसान उत्पादक संगठनों, स्वयं सहायता समूहों और उत्पादक सहकारी समितियों को उनकी संपूर्ण मूल्य श्रृंखला के साथ सहायता प्रदान करना है। वर्ष 2020-21 से 2024-25 तक पांच वर्षों की अवधि में 500 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ इस योजना में मौजूदा सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों के उन्नयन एवं नवीन इकाइयों की स्थापना के लिए वित्तीय, तकनीकी और व्यावसायिक सहायता प्रदान कर सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण यूनिटों को सीधे सहायता देने की परिकल्पना की गई है।

अनुदान भी मिलेगा

योजना में निजी इकाईयों को 35 प्रतिशत, अधिकतम 10.00 लाख क्रेडिट लिंक्ड अनुदान तथा एफ.पी.ओ./एस.एच.जी./ कॉपरेटिव को पूंजी निवेश, प्रशिक्षण एवं विपणन पर 35 प्रतिशत क्रेडिट लिंक अनुदान की व्यवस्था है । इसके साथ ही वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट के तहत चयनित जिलो मे कॉमन इन्फ्रा स्ट्रॉक्चंर जिसमें प्रयोगशाला इन्यू था बेशन सेंटर, वेयर हाऊस एवं कोल्डन स्टोररेज शामिल है की स्थापना पर एफ.पी.ओ., एस.एच.जी., कॉपरेटिव, कंपनी को 35 प्रतिशत क्रेडिट लिंक्ड अनुदान देय है। योजना में हितग्राहियों को प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन की भी व्यवस्था है ।
प्याज के व्यापक उत्पादन को देखते हुए कृषक प्याज के उत्पादन के साथ – साथ फसल का प्रसंस्करण करते हैं तो उन्हें इसके तीन से चार गुना अधिक मूल्य प्राप्त हो सकता हैं। साथ ही राज्य एवं केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ लेकर प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना की जा सकती है एवं खेती को फायदे का व्यापार बनाकर कृषकों की दुगनी आय का सपना साकार किया जा सकता है।