आलू की खेती कब करें? सही समय से लेकर खाद-बीज तक जानें सबकुछ
14 अगस्त 2026, नई दिल्ली: आलू की खेती कब करें? सही समय से लेकर खाद-बीज तक जानें सबकुछ – आलू को सब्जियों का राजा कहा जाता है। देश में शायद ही कोई ऐसा घर हो, जहां आलू का इस्तेमाल न होता हो। यही वजह है कि यह देश की प्रमुख खाद्य फसलों में शामिल है और लगभग सभी क्षेत्रों में इसकी खेती की जाती है। अब आलू की खेती का सीजन भी शुरू होने वाला है। ऐसे में किसानों के लिए सही समय पर बुवाई के साथ अच्छी किस्म के बीज, उचित खाद और सिंचाई का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। सही तरीके से खेती कर किसान 300 से 350 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन हासिल कर सकते हैं। तो आइए जानते हैं आलू की खेती का सही समय और इससे जुड़ी जरूरी बातें।
आलू की खेती के लिए कैसा हो मौसम?
आलू की अच्छी वृद्धि और पैदावार के लिए ठंडी जलवायु उपयुक्त मानी जाती है। फसल की वृद्धि और विकास के लिए 15 से 25 डिग्री सेल्सियस तापमान बेहतर रहता है। अंकुरण के लिए करीब 25 डिग्री, पौधों की वनस्पति वृद्धि के लिए 20 डिग्री और कंद के विकास के लिए 15 से 20 डिग्री सेल्सियस तापमान उपयुक्त है। तापमान 33 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंचने पर आलू की फसल प्रभावित होने लगती है और कंदों का विकास रुक सकता है।
कैसी मिट्टी में करें आलू की खेती?
आलू की खेती कई प्रकार की मिट्टी में की जा सकती है, लेकिन अच्छी पैदावार के लिए जीवांशयुक्त, भुरभुरी और अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है। बलुई दोमट और दोमट मिट्टी में भी आलू की अच्छी खेती की जा सकती है। आलू की खेती के लिए मिट्टी का pH मान 5.1 से 6.7 के बीच उपयुक्त माना गया है।
बुवाई से पहले ऐसे करें खेत की तैयारी
खेत की पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से करनी चाहिए। इसके बाद देशी हल या कल्टीवेटर से 3 से 4 जुताई कर मिट्टी को अच्छी तरह भुरभुरा बना लें। आलू कंद वाली फसल है, इसलिए मिट्टी का भुरभुरा होना बेहद जरूरी है। खेत को समतल करने के लिए पाटा भी लगाएं।
कब करें आलू की बुवाई?
आलू की अगेती किस्मों की बुवाई 1 से 20 सितंबर तक करना उपयुक्त बताया गया है। वहीं सामान्य किस्मों की बुवाई के लिए 10 से 15 अक्टूबर का समय उपयुक्त रहता है। बुवाई के लिए 30 से 45 ग्राम वजन वाले अच्छे और अंकुरित बीज का इस्तेमाल करें। प्रति हेक्टेयर सामान्य तौर पर 25 से 30 क्विंटल बीज की आवश्यकता होती है। बीज सरकारी संस्थाओं या विश्वसनीय एजेंसियों से ही खरीदना चाहिए।
बीज उपचार करना जरूरी
बुवाई से पहले बीज का उपचार करना भी जरूरी है। इसके लिए 3 ग्राम डाइथेन एम-45 या 2 ग्राम बाविस्टीन प्रति किलोग्राम बीज की दर से घोल तैयार कर बीज को करीब 30 मिनट तक उसमें डुबोकर रखें। इसके बाद बीज को छाया में सुखाकर बुवाई करें। बुवाई के दौरान लाइन से लाइन की दूरी करीब 60 सेंटीमीटर रखें। पौधे से पौधे की दूरी बीज के आकार के अनुसार रखी जा सकती है। छोटे आलू के लिए करीब 15 सेंटीमीटर और बड़े बीज के लिए करीब 40 सेंटीमीटर दूरी उपयुक्त बताई गई है। आलू को मेड़ों में 8 से 10 सेंटीमीटर की गहराई पर लगाएं।
सिंचाई और खाद प्रबंधन
आलू की फसल में जरूरत के अनुसार सिंचाई करनी चाहिए। सामान्य तौर पर फसल में 8 से 10 सिंचाई की आवश्यकता हो सकती है। पहली सिंचाई बुवाई के करीब 10 से 15 दिन बाद करें। खुदाई से करीब 10 दिन पहले सिंचाई बंद कर देनी चाहिए। अच्छी पैदावार के लिए खेत की तैयारी के दौरान 150 से 200 टन गोबर की खाद प्रति हेक्टेयर मिट्टी में मिलाने की सलाह दी गई है। इसके अलावा प्रति हेक्टेयर 180 किलोग्राम नाइट्रोजन, 80 किलोग्राम फास्फोरस, 25 किलोग्राम जिंक सल्फेट और 120 किलोग्राम पोटाश की आवश्यकता बताई गई है। खाद की पूरी मात्रा बुवाई से पहले देने की सलाह दी गई है।
खरपतवार नियंत्रण का रखें ध्यान
आलू की बुवाई के 20 से 25 दिन बाद मेड़ों के बीच खुरपी, कसोला, फावड़ा या अन्य कृषि यंत्रों से निराई-गुड़ाई करें। दूसरी निराई-गुड़ाई के दौरान पौधों पर मिट्टी चढ़ाना भी जरूरी है। खरपतवार नियंत्रण के लिए पेंडीमिथालिन 30 प्रतिशत का 3.5 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से 900 से 1000 लीटर पानी में घोल बनाकर बुवाई के दो दिन के भीतर छिड़काव किया जा सकता है।
300 से 350 क्विंटल तक हो सकती है पैदावार
आलू की खुदाई का समय उसकी किस्म और पकने की अवधि पर निर्भर करता है। बाजार में अच्छे भाव मिलने की स्थिति में किसान पकने के समय से करीब 8 से 10 दिन पहले भी खुदाई कर सकते हैं। आलू की पैदावार किस्म, मौसम और खेती के तरीके पर निर्भर करती है। सामान्य किस्मों से करीब 300 से 350 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।
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