फसल की खेती (Crop Cultivation)

सोयाबीन कृषकों को उपयोगी सलाह

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2 अगस्त 2022, इंदौर ।  सोयाबीन कृषकों को उपयोगी सलाह भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान, इंदौर ने सोयाबीन कृषकों को उपयोगी सलाह दी गई है, जो इस प्रकार है –

सामान्य सलाह
  • लगातार वर्षा होने की स्थिति में अपने खेत से जल-निकासी की व्यवस्था सुनिश्चित करें।
  • अपने खेत की नियमित निगरानी करें एवं 3-4 जगह के पौधों को हिलाकर सुनिश्चित करें कि क्या आपके खेत में किसी इल्ली/कीट का प्रकोप हुआ है या नहीं और यदि है, तो कीड़ों की अवस्था क्या हैं? तदनुसार उनके नियंत्रण के उपाय अपनाएं।
  • सोयाबीन में कीटनाशक एवं खरपतवारनाशक के मिश्रित उपयोग का संयोजन अभी तक केवल निम्न 3 कीटनाशक एवं 2 खरपतवारनाशकों के लिए ही अनुशंसित किया गया है।
  • पीला मोज़ेक रोग से सुरक्षा हेतु रोगवाहक कीट सफ़ेद मक्खी के नियंत्रण के लिए अपने खेत में विभिन्न स्थानों पर पीला स्टिकी ट्रैप लगाएं।
  • कीटनाशक या खरपतवारनाशक के छिडक़ाव के लिए पानी की अनुशंसित मात्रा का उपयोग करें (नेप्सेक स्प्रेयर से 450 लीटर/हे. या पॉवर स्प्रेयर से 120 लीटर/हे. न्यूनतम)।
  • कीटनाशक के छिडक़ाव हेतु कोन नोजल जबकि खरपतवार नाशक के छिडक़ाव हेतु फ्लड जेट/फ्लैट फेन नोजल का उपयोग करें।
  • सोयाबीन में पक्षियों की बैठने हेतु ‘ञ्ज’ आकार के बर्ड पर्चेस लगाएं।
  • किसी भी प्रकार का कृषि आदान क्रय करते समय दुकानदार से हमेशा पक्का बिल लें जिस पर बैच नंबर एवं एक्सपायरी दिनांक स्पष्ट लिखी हो।
  • सोयाबीन का जैविक उत्पादन लेने वाले किसान कृपया पत्ती खाने वाली इल्लियों (सेमीलूपर, तम्बाकू की इल्ली) से फसल की सुरक्षा एवं प्रारम्भिक अवस्था में रोकथाम हेतु बेसिलस थुरिन्जेंसिस अथवा ब्युवेरिया बेसिआना या नोमुरिया रिलेयी (1.0 ली/.हेक्टेयर) का प्रयोग करें।
  • तम्बाकू की इल्ली एवं चने की इल्लियों के प्रबंधन हेतु बाजार में उपलब्ध कीट विशेष फेरोमेन ट्रैप या प्रकाश प्रपंच लगाएं।

सोयाबीन में खरपतवार, कीट एवं रोग नियंत्रण के लिए सलाह – खरपतवार नियंत्रण के लिए अभी तक किसी भी प्रकार के खरपतवारनाशकों का प्रयोग नहीं करने वाले किसानों को सलाह है कि 15-20 दिन की फसल होने पर सोयाबीन के लिए अनुशंसित खड़ी फसल में उपयोगी किसी एक रसायनिक खरपतवार नाशक का छिडक़ाव करें।

  • बोवनी पूर्व बोवनी के तुरंत बाद उपयोगी खरपतवारनाशक का छिडक़ाव करने वाले किसानों को सलाह है कि 20-30 दिन की फसल अवस्था के दौरान डोरा/ कुलपा चलाएं।
  • जिन्होंने बोवनी पूर्व या बोवनी के तुरंत बाद उपयोगी खरपतवारनाशकों का अभी तक प्रयोग नहीं किया है, सलाह है कि अनुशंसित कीटनाशकों के साथ संगतता पाए जाने वाले वाले निम्न खरपतवारनाशक एवं कीटनाशकों में से किसी एक को मिलाकर छिडक़ाव किया जा सकता है-
  • कीटनाशक: क्लोरइंट्रानिलिप्रोल 18.5 एससी (150 मिली/हे.) या क्विनाल्फॉस 25 ईसी (1 ली./हे.) या इन्डोक्साकर्ब 15.8 एससी (333 दम.ली./हे.)।
  • खरपतवारनाशक: इमाजेथापायर 10 एसएल (1 ली./हे.) या क्विजालोफाप इथाइल 5 ईसी (1 ली./हे.)।
  • जहाँ पर फसल 15-20 दिन की हो गई हो, पत्ती खाने वाले कीटों से सुरक्षा हेतु फूल आने से पहले ही सोयाबीन फसल में क्लोरइंट्रानिलिप्रोल 18.5 एससी (150 मिली/हे.)का छिडक़ाव करें। इससे अगले 30 दिनों तक पर्ण भक्षी कीटों से सुरक्षा मिलेगी।
  • तना मक्खी के नियंत्रण हेतु सलाह है कि पूर्व मिश्रित कीटनाशक थायोमिथोक्सम 12.60 प्रतिशत +लैम्बडा सायहेलोथ्रिन 09.50 प्रतिशत जेडसी (125 मिली/हे.) का छिडक़ाव करें।
  • तम्बाकू की इल्ली के नियंत्रण हेतु निम्न में से किसी एक कीटनाशक का छिडक़ाव करने की सलाह है इससे पत्ती खाने वाली अन्य इल्लियां (चने की इल्ली या सेमीलूपर इल्ली) का भी नियंत्रण होगा।
    लैम्बडा सायहेलोथ्रिन 04.90 सीएस (300 मिली/हे.) या क्विनालफॉस 25 ईसी (1 ली./हे.) या क्लोरइंट्रानिलिप्रोल 18.5 एससी (150 मिली/हे.) या इमामेक्टिन बेंजोएट 01.90 (425 मिली/हे.) या ब्रोफ्लानिलिडे 300 एससी (42-62 ग्राम/हे.) या फ्लूबेन्डियामाइड 20 डब्ल्यूजी (250-300 ग्राम/हे.) या फ्लूबेन्डियामाइड 39.35 एससी (150 मिली/हे.) या इन्डोक्साकर्ब 15.8 एससी (333 मिली/हे.) या प्रोफेनोफॉस 50 ईसी (1 ली./हे.) या स्पायनेटोरम 11.7 एससी (450 मिली/हे.) या टेट्रानिलिप्रोल 18.18 एससी (250-300 मिली/हे.)।
  • मध्यप्रदेश के कुछ क्षेत्रों में (देवास जिला) बिहार हेयरी कैटरपिलर का प्रकोप प्रारंभ होने की सूचना है। किसानों को सलाह है कि प्रारम्भिक अवस्था में झुण्ड में रहने वाली इन इल्लियों को पौधे सहित खेत से निष्कासित करें एवं इसके नियंत्रण हेतु फसल पर क्विनालफॉस 25 ईसी (1 ली/हे) या लैम्बडा सायहेलोथ्रिन 04.90 सीएस (300 मिली/हे.) या इंडोक्साकार्ब 15.8 एससी (333 मिली/हे.) का छिडक़ाव करें।
  • कुछ क्षेत्रों में रायजोक्टोनिया एरिअल ब्लाइट का प्रकोप होने की सूचना प्राप्त हुई है। कृषकों को सलाह है कि नियंत्रण के लिए हेक्साकोनाझोल प्रतिशत 5 ईसी (1 मिली/ली. पानी) का छिडक़ाव करें।

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