धान की वर्षा आधारित खेती प्रबंधन: कमजोर मानसून में ICAR-CRRI ने किसानों को दी ये सलाह
07 अगस्त 2026, नई दिल्ली: धान की वर्षा आधारित खेती प्रबंधन: कमजोर मानसून में ICAR-CRRI ने किसानों को दी ये सलाह –
कमजोर मानसून में बदलें खेती की रणनीति
मानसून की अनियमितता धान की खेती को सबसे अधिक प्रभावित करने वाले कारकों में से एक है। समय पर वर्षा नहीं होने से बुवाई में देरी होती है, जबकि अत्यधिक वर्षा खेत की तैयारियों और पोषक तत्व प्रबंधन को प्रभावित कर सकती है। ऐसी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए आईसीएआर–केन्द्रीय धान अनुसंधान संस्थान (ICAR-CRRI), कटक ने वर्षा आधारित क्षेत्रों के किसानों के लिए विशेष कृषि सलाह जारी की है।
वर्षा कम होने पर अपनाएं वैकल्पिक फसलें
संस्थान के अनुसार जिन क्षेत्रों में पर्याप्त वर्षा नहीं होने के कारण अपलैंड धान की बुवाई संभव नहीं हो पा रही है, वहां उपलब्ध मिट्टी की नमी का उपयोग करते हुए कम अवधि वाली वैकल्पिक फसलों की बुवाई की जा सकती है। इनमें मूंग, उड़द, रागी, मूंगफली और अरहर जैसी फसलें बेहतर विकल्प हो सकती हैं। इससे किसानों को उपलब्ध नमी का बेहतर उपयोग करने के साथ संभावित आर्थिक नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है।
भारी वर्षा के दौरान टालें ये कृषि कार्य
यदि किसी क्षेत्र में अत्यधिक वर्षा हो रही हो, तो संस्थान ने किसानों को सलाह दी है कि ऐसी स्थिति में बीज की बुवाई, उर्वरकों की टॉप ड्रेसिंग तथा खरपतवारनाशियों का प्रयोग कुछ समय के लिए स्थगित कर दें। जलभराव या अत्यधिक गीली मिट्टी में इन कृषि कार्यों की प्रभावशीलता कम हो सकती है और फसल को भी नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है।
नमी के अनुसार करें उर्वरक और खरपतवार प्रबंधन
आईसीएआर-सीआरआरआई ने सलाह दी है कि डायरेक्ट सीडेड धान में पहली टॉप ड्रेसिंग तभी करें, जब मिट्टी में पर्याप्त नमी उपलब्ध हो। इसी प्रकार, खेत में पर्याप्त नमी के अभाव में खरपतवार नियंत्रण के लिए शाकनाशियों का छिड़काव नहीं करना चाहिए, क्योंकि ऐसी स्थिति में उनका अपेक्षित प्रभाव नहीं मिल पाता। मौसम और मिट्टी की नमी को ध्यान में रखकर लिए गए निर्णय फसल की बेहतर वृद्धि और संसाधनों के कुशल उपयोग में सहायक होते हैं।
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