Ad DesktopAd TabletAd Mobile
फसल की खेती (Crop Cultivation)

धान में तना छेदक प्रबंधन

04 अगस्त 2026, नई दिल्ली: धान में तना छेदक प्रबंधन –

निगरानी से शुरू करें प्रबंधन

तना छेदक धान की सबसे महत्वपूर्ण कीटों में शामिल है, जो पौधों के मध्य भाग को नुकसान पहुंचाकर मृत शीर्ष (Dead Heart) तथा बालियों में सफेद बाल (White Ear) जैसी समस्याएं उत्पन्न करता है। इसके प्रभावी प्रबंधन के लिए समय पर निगरानी आवश्यक है।

आईसीएआर-सीआरआरआई ने सलाह दी है कि नर्सरी तथा मुख्य खेत दोनों में फेरोमोन ट्रैप लगाकर कीट की सक्रियता पर नजर रखी जाए। 

Ad DesktopAd TabletAd Mobile
Ad DesktopAd TabletAd Mobile

फेरोमोन ट्रैप और जैविक नियंत्रण

संस्थान के अनुसार मुख्य खेत में प्रति एकड़ 4–5 फेरोमोन ट्रैप लगाए जाएं। यदि एक ट्रैप में 4–5 नर पतंगे मिलने लगें तो नियंत्रण उपाय शुरू किए जाएं।

कृषक जगत को व्हाट्सएप पर फॉलो करें
खेती-किसानी की ताज़ा खबरें, सीधे आपके फ़ोन पर
चैनल फॉलो करें

इसके साथ ही ट्राइकोग्रामा जापोनिकम का उपयोग जैविक नियंत्रण के रूप में करने की भी सिफारिश की गई है। सात से दस दिन के अंतराल पर इसकी पाँच बार तक रिलीज करने से तना छेदक के प्रबंधन में सहायता मिलती है। 

आवश्यकता होने पर रासायनिक नियंत्रण

यदि कीट का प्रकोप बढ़ता है तो क्लोरान्ट्रानिलिप्रोल, कार्टाप हाइड्रोक्लोराइड अथवा अन्य अनुशंसित कीटनाशियों का प्रयोग निर्धारित मात्रा में किया जा सकता है। रासायनिक नियंत्रण हमेशा निगरानी के आधार पर ही किया जाना चाहिए। 

समेकित प्रबंधन से बेहतर परिणाम

फेरोमोन ट्रैप, जैविक नियंत्रण और आवश्यकता अनुसार रासायनिक नियंत्रण को मिलाकर अपनाने से तना छेदक की रोकथाम अधिक प्रभावी ढंग से की जा सकती है तथा अनावश्यक कीटनाशी उपयोग भी कम होता है।

आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़, व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture