NMEO-OS मिशन से बढ़ा तिलहन उत्पादन, 2030-31 तक 69.7 मिलियन टन उत्पादन का लक्ष्य
05 अगस्त 2026, नई दिल्ली: NMEO-OS मिशन से बढ़ा तिलहन उत्पादन, 2030-31 तक 69.7 मिलियन टन उत्पादन का लक्ष्य – देश को खाद्य तेलों के मामले में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में केंद्र सरकार का राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-तिलहन (NMEO-OS) लगातार गति पकड़ रहा है। मिशन के तहत तिलहन उत्पादन बढ़ाने, किसानों को उन्नत बीज और आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने तथा वैल्यू चेन को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। सरकार ने वर्ष 2022-23 के 39 मिलियन टन प्राथमिक तिलहन उत्पादन को बढ़ाकर 2030-31 तक 69.7 मिलियन टन करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
600 से अधिक वैल्यू चेन क्लस्टरों के जरिए हो रहा मिशन का क्रियान्वयन
3 अक्टूबर 2024 को मंजूर किए गए राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-तिलहन (NMEO-OS) का संचालन देशभर में 600 से अधिक वैल्यू चेन क्लस्टरों के माध्यम से किया जा रहा है। इन क्लस्टरों का संचालन किसान उत्पादक संगठन (FPO), सहकारी समितियां और अन्य एजेंसियां कर रही हैं। इसके तहत किसानों को नवीनतम उच्च उपज देने वाली किस्मों के गुणवत्तापूर्ण बीज नि:शुल्क उपलब्ध कराए जा रहे हैं तथा बेहतर कृषि पद्धतियों का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।
तेल मिलों और बीज उत्पादन को मिल रहा बढ़ावा
मिशन के तहत प्राथमिक एवं द्वितीयक स्रोतों से खाद्य तेल उत्पादन बढ़ाने के लिए कटाई उपरांत अवसंरचना, विशेषकर तेल मिलों की स्थापना और आधुनिकीकरण को सहायता दी जा रही है। इसके साथ ही प्रजनक बीजों की खरीद के लिए 100 प्रतिशत सहायता, सार्वजनिक क्षेत्र में नए सीड हब और विशेषीकृत बीज भंडारण इकाइयों की स्थापना के माध्यम से प्रमाणित बीजों की उपलब्धता को मजबूत किया जा रहा है।
किसानों को आधुनिक तकनीक अपनाने पर जोर
किसानों तक नई तकनीक पहुंचाने के लिए मिशन के अंतर्गत फ्रंटलाइन डेमोंस्ट्रेशन (FLD), क्लस्टर फ्रंटलाइन डेमोंस्ट्रेशन (CFLD) और ब्लॉक लेवल डेमोंस्ट्रेशन (BLD) आयोजित किए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों के जरिए किसानों को नई किस्मों और उन्नत कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिल रही है।
बढ़ा तिलहन उत्पादन, लक्ष्य से अधिक क्षेत्र में हुआ मुफ्त बीज वितरण
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के तीसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार, देश में तिलहन उत्पादन 2023-24 के 39.67 मिलियन टन से बढ़कर 2025-26 में 43.06 मिलियन टन हो गया है। वहीं वर्ष 2025-26 में मिशन के तहत 13.52 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में नि:शुल्क बीज वितरित किए गए, जो 10 लाख हेक्टेयर के वार्षिक लक्ष्य से अधिक है। इसके अलावा नई किस्मों के प्रजनक बीज उत्पादन के लिए 60 सीड हब और 50 विशेषीकृत बीज भंडारण इकाइयों को मंजूरी दी गई है।
खाद्य तेल आयात अभी भी बड़ी चुनौती
चीनी एवं वनस्पति तेल निदेशालय के अनुसार, भारत ने 2024-25 के दौरान 160.72 लाख टन खाद्य तेलों का आयात किया। इनमें 75.17 लाख टन पाम तेल शामिल था, जो कुल खाद्य तेल आयात का 46.77 प्रतिशत है। यही कारण है कि सरकार घरेलू तिलहन और ऑयल पाम उत्पादन बढ़ाने पर विशेष ध्यान दे रही है।
ऑयल पाम मिशन से भी बढ़ रहा रकबा
सरकार ने अगस्त 2021 में राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-ऑयल पाम (NMEO-OP) शुरू किया था, जिसे 15 राज्यों में लागू किया जा रहा है। मिशन के तहत किसानों को उच्च गुणवत्ता वाली पौध सामग्री, अंतरवर्ती फसलों के लिए सहायता, चार वर्ष की रखरखाव लागत, सिंचाई सुविधाएं, कृषि यंत्र, नर्सरी, कस्टम हायरिंग सेंटर और प्रसंस्करण मिलों की स्थापना के लिए सहयोग दिया जा रहा है।
6.40 लाख हेक्टेयर तक पहुंचा ऑयल पाम का रकबा
वर्ष 2021-22 से 2025-26 के बीच 2.73 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र में ऑयल पाम की खेती शुरू की गई, जिससे 31 मार्च 2026 तक इसका कुल रकबा 6.40 लाख हेक्टेयर हो गया। इस अवधि में 114.66 लाख टन फ्रेश फ्रूट बंच (FFB) का उत्पादन हुआ, जिससे 20.10 लाख टन क्रूड पाम ऑयल (CPO) प्राप्त हुआ। वर्तमान में देश में 27 ऑयल पाम प्रसंस्करण मिलें संचालित हैं।
हजारों किसानों को मिला आर्थिक सहयोग
ऑयल पाम उत्पादकों को समर्थन देने के लिए मिशन के तहत व्यवहार्यता अंतर भुगतान (VGF) की सुविधा भी दी जा रही है। अब तक गोवा, तमिलनाडु, गुजरात, कर्नाटक, ओडिशा, अरुणाचल प्रदेश, असम और मिजोरम के 9,244 ऑयल पाम किसानों को 18.90 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की जा चुकी है। कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।
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