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फसल की खेती (Crop Cultivation)

धान में रोपाई के बाद खरपतवार प्रबंधन: शुरुआती नियंत्रण से बढ़ेगी फसल की बढ़वार

07 अगस्त 2026, नई दिल्ली: धान में रोपाई के बाद खरपतवार प्रबंधन: शुरुआती नियंत्रण से बढ़ेगी फसल की बढ़वार –

शुरुआती खरपतवार नियंत्रण क्यों है जरूरी

धान की रोपाई के बाद शुरुआती 30 से 40 दिन फसल की वृद्धि के लिए सबसे महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इस दौरान यदि खरपतवारों का समय पर नियंत्रण नहीं किया जाए तो वे नमी, पोषक तत्वों और सूर्य के प्रकाश के लिए धान के पौधों से प्रतिस्पर्धा करते हैं। इसका सीधा असर पौधों की बढ़वार, कल्ले बनने की क्षमता और अंततः उपज पर पड़ता है।

आईसीएआर–केन्द्रीय धान अनुसंधान संस्थान (ICAR-CRRI), कटक ने जुलाई 2026 के द्वितीय पखवाड़े की कृषि परामर्श में किसानों को सलाह दी है कि रोपाई के तुरंत बाद खेतों की नियमित निगरानी करें और खरपतवारों की शुरुआती अवस्था में ही नियंत्रण सुनिश्चित करें।

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समय पर करें शाकनाशी का प्रयोग

संस्थान के अनुसार रोपाई के 5 से 10 दिन के भीतर बेंसल्फ्यूरॉन मिथाइल 0.6% + प्रेटिलाक्लोर 6% जीआर का 4 किलोग्राम प्रति एकड़ की दर से रेत के साथ मिलाकर प्रयोग किया जा सकता है।

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यदि खरपतवार निकल चुके हों और वे 2–3 पत्ती अवस्था में हों, तो बिसपायरीबैक सोडियम 10% एससी का 120 मिलीलीटर प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करने की सलाह दी गई है। समय पर किया गया शाकनाशी प्रयोग खरपतवारों को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करने में सहायक होता है।

नियमित निगरानी से मिलेगा बेहतर परिणाम

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल शाकनाशी का प्रयोग पर्याप्त नहीं है। किसानों को खेत का नियमित निरीक्षण करते रहना चाहिए ताकि यदि कहीं खरपतवार दोबारा उभरें तो समय रहते उनका नियंत्रण किया जा सके। खेत में खरपतवारों का दबाव कम रहने से पोषक तत्वों का उपयोग बेहतर होता है और फसल का विकास अधिक समान रूप से होता है।

वैज्ञानिक सलाह का पालन करें

आईसीएआर-सीआरआरआई का कहना है कि खरपतवारनाशी का प्रयोग हमेशा अनुशंसित मात्रा और उचित समय पर ही किया जाना चाहिए। इससे खरपतवार नियंत्रण की प्रभावशीलता बढ़ती है और फसल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना भी कम रहती है।

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