जल्दी पकने वाली जीरा की नई किस्म सीजेडसी – 94

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6 सितम्बर 2021, इंदौर । औषधीय फसलों की ओर अग्रसर किसान औषधीय गुणों से भरपूर जीरे को भारतीय रसोई में विशेष दजऱ्ा प्राप्त है। यही कारण है, कि देश के दो राज्यों गुजरात और राजस्थान में जीरे की खेती बड़े पैमाने पर होती है। इन दो राज्यों का जीरा उत्पादन में बड़ा योगदान है। जीरे की बढ़ती मांग और किसानों को कम समय में ज्यादा उत्पादन मिले, इस मकसद से भाकृअनुप -केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसन्धान संस्थान , जोधपुर ने जीरा की एक नई किस्म सीजेडसी -94 विकसित की है, जो न केवल जल्दी पकेगी , बल्कि उत्पादन भी अधिक देगी।

मिली जानकारी के अनुसार अधिकांश जीरा उत्पादक किसान अभी तक जीरा की पुरानी किस्म जीसी -4 की ही खेती करते हैं , जिसे तैयार होने में करीब 130 -140 दिन लगते हैं, लेकिन जीरा की नई किस्म सीजेडसी -94 करीब 100 दिनों में ही पककर तैयार हो जाती है। पुरानी किस्म में जहां 70 दिनों में फूल आते हैं , वहीं इस नई किस्म में 40 दिनों में ही फूल आने लग जाते हैं। इसलिए यह माहू कीट से भी सुरक्षित रहती है ,क्योंकि फरवरी में जब पुरानी जीरा किस्म के फूलों पर माहू कीटों का प्रकोप होता है, तब तक इस नई किस्म में फल लग जाते हैं। इसका उत्पादन भी अच्छा होता है।
उल्लेखनीय है कि हमारा देश भारत, दुनिया का सबसे बड़ा जीरा उत्पादक देश है, जहां विश्व के करीब 70 प्रतिशत जीरे का उत्पादन होता है। गुजरात में कुल जीरा उत्पादन का 55.95 प्रतिशत और राजस्थान में 43.97 प्रतिशत उत्पादन होता है।

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