किसान भाई इस सप्ताह क्या करें

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5 जुलाई 2022, भोपाल । किसान भाई इस सप्ताह क्या करें –

सोयाबीन
  • यदि जल भराव की समस्या है तो जल निकासी की उचित व्यवस्था करें।
  • प्रारंभिक 45-60 दिनों के दौरान सोयाबीन के खेत को खरपतवार मुक्त रखना आवश्यक है ताकि खरपतवारों से होने वाली उपज हानि को कम किया जा सके। अत: किसानों को सलाह दी जाती है कि सोयाबीन में मोनोकोट/डाइकोट खरपतवारों के प्रबंधन के लिए उपयुक्त उपाय (डोरा/कुलपा के साथ निराई या अनुशंसित शाकनाशी) अपनाएं।
  • मानसून की अनिश्चितता के कारण उत्पादन में स्थिरता हेतु सलाह है कि संभव होने पर सोयाबीन की बुवाई बीबीएफ (चौड़ी क्यारी पद्धति) या रिज फरो (कूड़ मेड़ पद्धति) से ही करंे जिससे सूखे/अतिवर्षा के दौरान उत्पादन प्रभावित ना हो।
  • सोयाबीन की बीमारी से प्रतिरोधक क्षमता किस्मों को लगाए जेएस 20-29, 20-34, 20-69, 20-94, 20-98, 20-116, एनआरसी-38, 86, 127
  • उपलब्ध सोयाबीन बीज का अंकुरण परीक्षण (न्यूनतम 70 प्रतिशत) अवश्य करें।
बीजोपचार
  • बीज जनित रोगों की रोकथाम हेतु बीजोपचार आवश्यक है बोनी के पूर्व 5 ग्राम ट्राइकोडर्मा विरडी प्रति किलो बीज की दर से बीजोपचार करें, ट्राइकोडर्मा विरडी न मिलने पर थीरम 2 ग्राम+कार्बेन्डाजिम 1 ग्राम/किलो बीज की दर से बीजोपचार करें एवं बाद में कल्चर एवं पीएसबी से बीजोपचार करें।
  • पीला मोजेक बीमारी की रोकथाम हेतु अनुशंसित कीटनाशक थायोमिथाक्सम 30 एफएस (10 मिली/किग्रा बीज) या इमिडाक्लोप्रिड 48 एफएस (1.2 मिली/किग्रा बीज) से बीज उपचार करें।
मक्का
  • यदि जल भराव की समस्या है तो जल निकासी की उचित व्यवस्था करें।
  • भूमि की किस्मों के अनुसार संकर मक्का का चयन करें, साथ ही साथ शासकीय अनुसंधान द्वारा विकसित जेएम 215, 216, 218, एचक्यूपीएम-1,5 विवेक-1 एवं पीजेएचएम-1 (संकर) उन्नत जातियों के बीज की व्यवस्था करंे एवं बीज उपचारित करके ही बोयें।

 

उद्यानिकी फसलें
  • किसानों को अगेती फूलगोभी, टमाटर, मिर्च और बैंगन के लिए पौधशाला की तैयारी के लिए सलाह दी जाती है। पौधशाला 5-6 इंच ऊंची और 3 फीट चौड़ी हो।
  • बीज को कैप्टन 2.0 ग्राम/किलोग्राम बीज से उपचार के बाद नर्सरी में बोयें।
  • खरीफ सब्जियों की बुवाई के लिए मौसम अनुकूल है। किसानों को सलाह दी जाती है कि वे मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करें।
  • कद्दूवर्गीय सब्जियों और फलियों वाली सब्जियों की बुवाई की जा सकती है।
  • मौसम की अनुकूलता को देखते हुए किसानों को भिंडी फसल लगाने की सलाह दी जाती है अर्का अभय, पूसा ए-4, अर्का अनामिका, वर्षा उपहार, हिसार उन्नत, परभनी क्रांति किस्मों की सिफारिश बुवाई के लिए की जाती है।
  • किसानों को सलाह दी जाती है कि नए बाग की स्थापना हेतु उपयुक्त आकार और तय दूरी के गड्ढे में इस सप्ताह के दौरान 3:2:1 के अनुपात में अच्छी सड़ी गोबर की खाद, मिट्टी और रेत का मिश्रण तैयार कर गड्ढे भराई का कार्य करें।
  • आगामी मौसम को ध्यान में रखते हुए पुराने फल वृक्षों के थालों की मरम्मत और सफाई का कार्य करें।
  • वर्तमान मौसम बेर में कलिकायन (बडिंग) के लिए उपयुक्त है अत: पुराने व देसी अनुत्पादक पेड़ों में कलिकायन (बडिंग) का कार्य करें।
कपास
  • जो किसान भाई कपास में बोनी के समय कोई खाद नहीं दे पाए हैं, वे 30 दिन की कपास में 20 किग्रा यूरिया + 30 किग्रा डीएपी + 20 किग्रा पोटाश प्रति एकड़ जड़ों के पास रिंग बनाकर या कॉलम विधि से दें।
  • कपास की फसल में कुछ पौधे मुरझाते हुए घेरे-घेरे में दिखाई देने पर उसमें कार्बेन्डाजिम 1 ग्राम या कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 3 ग्राम/लीटर पानी के हिसाब से दें।

फसल विशिष्ट सलाह

मूंग : मौसम पूर्वानुमान को देखते हुए इस समय पकी हुई मंूग की फसल की कटाई कर खलियान पर रखें व सुखाकर गहाई करें।
अरहर (लाल चना/अरहर) : अरहर की बुवाई हेतु सिंचित क्षेत्रों में उन्नतशील प्रजातियां जैसे- आईसीपीएल 88039, पूसा 2001, 2002,992 का चयन कर पर्याप्त नमी होने पर बुवाई करें।
बाजरा: संभावित मौसम को देखते हुए इस समय तिल, बाजरा आदि फसलों की बुवाई करें तथा बुवाई पूर्व बीजोपचार अवश्य करें।
तिल : मौसम को देखते हुए इस समय तिल आदि फसलों की बुवाई करें तथा बुवाई पूर्व बीजोपचार अवश्य करें।

बरसीम

ग्वार, मक्का, बाजरा, लोबिया आदि चारा फसलों की बुवाई इस सप्ताह कर सकते हंै। बुवाई के समय खेत में पर्याप्त नमी होना आवश्यक है। बीजों को 3-4 सेमी गहराई पर डालें और पंक्ति से पंक्ति की दूरी 25-30 सेमी रखें।

पशु पालन

पशुओं को साफ एवं ताजा पानी दिन में दो बार दें, साथ ही साथ हरे चारा दें। बाहरी परजीवी से बचाव के लिए ब्यूटॉक्स का उपयोग करंे। पशु शाला की नियमित सफाई करंे। 1 लीटर पानी में 5 मिली फिनायल मिलाकर फर्श की सफाई करें।

मुर्गी पालन

मुर्गियों में रानी खेत बीमारी के नियंत्रण के लिए टीका लगवाएं चूजों को 7 दिन की अवस्था पर टीकाकरण करें। मुर्गे एवं मुर्गियों को मिनरल मिक्सचर तथा साफ एवं ताजा पानी दें।

बकरी पालन

बकरियों में पीपीआर रोग नियंत्रण के लिए टीका लगवाएं, हवा से बकरियों की सुरक्षा करें, बकरियों को हरा चारा, साफ पानी एवं सूखे स्थान में बांधे एवं परजीवी से बचाव के उपाय करें।

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